BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
18 views

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, तारकीय विकास (Stellar Evolution) और सौर मण्डल की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. तारों के जीवन चक्र में, जब मुख्य अनुक्रम (Main Sequence) चरण समाप्त होता है, तो सूर्य जैसे मध्यम द्रव्यमान वाले तारों का कोर सिकुड़ता है और बाहरी परतें फैलकर 'लाल दानव' (Red Giant) का निर्माण करती हैं, जिसके पश्चात अंततः इनका अंत एक 'श्वेत वामन' (White Dwarf) के रूप में होता है।
  2. 2. 'सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर' द्वारा प्रतिपादित 'चंद्रशेखर सीमा' (Chandrasekhar Limit) लगभग 1.44 सौर द्रव्यमान के बराबर है, जो यह निर्धारित करती है कि कौन-सा तारा अपने जीवन के अंत में श्वेत वामन बनेगा और कौन-सा तारा न्यूट्रॉन तारा या ब्लैक होल के रूप में सुपरनोवा विस्फोट से समाप्त होगा।
  3. 3. बृहस्पति और मंगल ग्रहों की कक्षाओं के बीच स्थित क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) के अधिकांश पिंड प्राचीन सौर मण्डल के ऐसे अवशेष हैं जिन्हें गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण किसी बड़े ग्रह में समेकित होने का अवसर नहीं मिला।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'शुक्र ग्रह' (Venus) हमारे सौर मण्डल का सबसे गर्म ग्रह है, जिसका मुख्य कारण इसके वायुमंडल में 95% से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति के कारण उत्पन्न अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. मध्यम द्रव्यमान वाले तारे (जैसे सूर्य) अपने मुख्य अनुक्रम चरण के पश्चात रेड जाइंट अवस्था से गुजरते हुए अंत में श्वेत वामन बनते हैं। 2. चंद्रशेखर सीमा (लगभग 1.44 सौर द्रव्यमान) वह अधिकतम सीमा है जिसके भीतर श्वेत वामन स्थिर रह सकता है; इससे अधिक द्रव्यमान वाले तारे सुपरनोवा विस्फोट के बाद न्यूट्रॉन स्टार या ब्लैक होल बनाते हैं। 3. क्षुद्रग्रह पेटी बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के कारण ग्रहों के रूप में नहीं जुड़ सकी। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शुक्र ग्रह सौर मण्डल का सबसे गर्म ग्रह है क्योंकि इसका घना CO2 वायुमंडल तीव्र ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करता है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय मृदा विज्ञान और उनके सूक्ष्मपोषक तत्वों (Micro-nutrients) की कमी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत की अधिकांश जलोढ़ और लाल मिट्टियों में नाइट्रोजन (Nitrogen) और ह्यूमस (Humus) की मात्रा सामान्यतः बहुत कम पाई जाती है, जिसके कारण भारतीय कृषि में यूरिया जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग करना पड़ता है। 2. 'काली मिट्टी' (Regur Soil) में चूना (Lime), मैग्नीशियम, पोटाश और कैल्शियम कार्बोनेट की प्रचुरता होती है, परंतु इसमें फॉस्फोरस (Phosphorus) और नाइट्रोजन की भारी कमी पाई जाती है। 3. 'लैटेराइट मिट्टी' में सिलिका के तीव्र निक्षालन (Leaching) के कारण लोहे और एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी अत्यधिक अम्लीय हो जाती है और इसमें चूना या जिप्सम मिलाकर इसकी उर्वरता बढ़ाई जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा किए गए मृदा स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में यह पाया गया है कि देश की कृषि योग्य मिट्टियों में जस्ते (Zinc) की कमी सबसे व्यापक रूप से फैली हुई है, जो फसल उत्पादन को प्रभावित करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण तथा उनकी भूगर्भीय विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडार का लगभग 90% हिस्सा और अधिकांश उच्च श्रेणी का कोकिंग कोयला 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं। 2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) क्षेत्र, जो भारत का सबसे बड़ा अपतटीय (Offshore) पेट्रोलियम उत्पादन क्षेत्र है, खंभात की खाड़ी के महाद्वीपीय मग्नतट पर स्थित है और यहाँ तेल का मुख्य उत्पादन 'मिओसीन' काल की चूना पत्थर संरचनाओं से होता है। 3. भारत में थोरियम के विशाल भंडार 'मोनाजाइट' (Monazite) रेत के रूप में मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं, और मोनाजाइट रेत का निष्कर्षण मुख्य रूप से इल्मेनाइट, रुटाइल और जिरकोन के साथ किया जाता है। 4. यूरेनियम के प्रमुख भंडारों के लिए प्रसिद्ध 'तुमलापल्ले' (Tummalapalle) खदान झारखंड के सिंहभूम खनिज पट्टी में स्थित है, जो देश का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक केंद्र है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों के चक्र (Rock Cycle) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पृथ्वी की क्रूर क्रस्ट (Crust) से कोर (Core) की ओर जाने पर तापमान और घनत्व में निरंतर वृद्धि होती है, और सीमा (SIMA) परत मुख्य रूप से सिलिकॉन और मैग्नीशियम से बनी होती है जिसका औसत घनत्व सियाल (SIAL) की तुलना में अधिक होता है। 2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) मूल रूप से आग्नेय या अवसादी चट्टानों के अत्यधिक ताप (Temperature), दाब (Pressure) और रासायनिक सक्रिय द्रवों के प्रभाव से अपने रूप और संरचना में परिवर्तन के पश्चात बनती हैं, जैसे कि चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में परिवर्तित होना। 3. ग्रेनाइट, बेसाल्ट, पेग्माटाइट और गैब्रो सभी प्रकार की आग्नेय चट्टानें (Igneous Rocks) हैं, जिनमें बेसाल्ट बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान का सबसे प्रमुख उदाहरण है, जबकि शेष अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टानें हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → भारत में ऊर्जा संसाधनों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और परमाणु खनिज) के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना और उत्पादन प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में कोयला उत्पादन का लगभग 98 प्रतिशत भाग गोंडवाना युगीन अवसादी चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में केंद्रित है, जबकि टर्शियरी युगीन कोयला मुख्य रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में पाया जाता है जिसमें गंधक (Sulfur) की मात्रा अधिक होती है। 2. देश में कच्चे तेल (Petroleum) और प्राकृतिक गैस के अधिकांश भंडार टर्शियरी काल के वलित पर्वतीय क्षेत्रों और अपतटीय (Offshore) द्रोणियों में स्थित हैं, जिसमें 'मुंबई हाई' भारत का सबसे बड़ा अपतटीय कच्चा तेल उत्पादक क्षेत्र है तथा 'कृष्णा-गोदबारी बेसिन' (KG Basin) प्राकृतिक गैस के अपार भंडारों के लिए जाना जाता है। 3. भारत में 'यूरेनियम' के प्रमुख निक्षेप मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम की कायांतरित चट्टानों में पाए जाते हैं, जिसमें झारखंड का 'जादूगोड़ा' क्षेत्र और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना की सीमा पर स्थित 'तुಮ್ಮलपल्ले' यूरेनियम के विशाल भंडारों के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'थोरियम' का सबसे प्रमुख स्रोत 'मोनाज़ाइट रेत' है, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की बालू में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, और भारत विश्व में थोरियम के सबसे बड़े भंडारों वाले देशों में अग्रणी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की मिट्टी (मृदा) के प्रकार, उनके वितरण और रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जलाल और कछारी मिट्टी (Alluvial Soil) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा घेरती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालयी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से हुआ है, तथा इसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता पाई जाती है जबकि नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी होती है। 2. काली मृदा (Regur Soil) का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप क्षेत्र में बेसाल्ट लावा के अपक्षय से हुआ है, और इसकी मुख्य विशेषता 'स्वः-जुताई की क्षमता' (Self-ploughing capacity) है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। 3. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के कारण होता है, जिससे इस मिट्टी में सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा लौह ऑक्साइड और एल्युमिनियम के यौगिक शेष रह जाते हैं, जिस कारण यह मिट्टी ईंट बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है। 4. शुष्क और मरुस्थलीय मृदा (Arid Soil) में घुलनशील लवणों और कैल्शम कार्बोनेट (कंकड़ परत) की मात्रा बहुत अधिक होती है, तथा इस मिट्टी में निचले संस्तरों में कैल्सियम की मात्रा बढ़ने के कारण जल को सोखने की क्षमता अत्यधिक उच्च हो जाती है, जिससे यह बिना सिंचाई के भी धान की खेती के लिए सर्वोत्तम बन जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.