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भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और जलवायु-आधारित कृषि क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'मिश्रित खेती' (Mixed Farming) के अंतर्गत भूमि पर फसलों के उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, कुक्कुट पालन और मत्स्य पालन जैसी कृषि-संबद्ध गतिविधियों को एक साथ बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है, जिससे किसानों की आय में स्थिरता आती है।
  2. 2. भारत में 'झूम कृषि' (Shifting Cultivation) या स्थानांतरित कृषि को देश के उत्तर-पूर्वी राज्यों में 'झूम' कहा जाता है, जबकि दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में इसे 'वाल्रे' या 'वाल्टर', और ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों में इसे 'पडाडू' या 'कमादा' के नाम से जाना जाता है।
  3. 3. भारत की राष्ट्रीय कृषि नीति के तहत दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन - दलहन' (NFSM-Pulses) क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसके तहत रबी और खरीफ दोनों मौसमों में दलहन की खेती को प्रोत्साहित किया जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में हरित क्रांति के दूसरे चरण में मोटे अनाजों और तिलहन फसलों पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिससे देश खाद्य तेलों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि मिश्रित खेती (Mixed Farming) वह कृषि पद्धति है जिसमें फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन और अन्य सहायक कृषि गतिविधियों को समान महत्व दिया जाता है। कथन 2 सही है क्योंकि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित कृषि के अलग-अलग स्थानीय नाम हैं; जैसे- पूर्वोत्तर राज्यों में झूम, राजस्थान में वाल्रे/वाल्टर और ओडिशा में इसे विभिन्न स्थानीय नामों से जाना जाता है। कथन 3 सही है क्योंकि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत दलहन (NFSM-Pulses) का उद्देश्य देश में दलहनी फसलों का रकबा और उत्पादकता बढ़ाना है। कथन 4 गलत है क्योंकि भारत आज भी अपनी खाद्य तेल की घरेलू मांग का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 55-60%) आयात के माध्यम से पूरा करता है, और हरित क्रांति का मुख्य फोकस चावल तथा गेहूं पर था। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि में विविधीकरण और तकनीकी सुधार की प्रक्रिया लगातार जारी है।
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