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History of India
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी वहाँ पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20 वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी।
  2. 2. सरकार द्वारा गठित 'चंपारण कृषि समिति' (Champaran Agrarian Committee) के समक्ष महात्मा गांधी ने यह कड़ा रुख अपनाया कि बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 100 प्रतिशत हिस्सा तत्काल वापस किया जाए, और समिति ने पूर्ण शत-प्रतिशत वापसी की उनकी इस मांग को स्वीकार करते हुए एक भी पैसा कम नहीं किया।
  3. 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ हुए असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने 'शांतिपूर्ण और वैध तरीकों से स्वराज की प्राप्ति' को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया तथा आंदोलन के सकारात्मक कार्यक्रमों के तहत राष्ट्रीय विद्यालयों और पंचायतों की स्थापना को प्रमुखता दी।
  4. 4. चौरी-चौरा कांड (फरवरी 1922) की हिंसक घटना से आहत होकर महात्मा गांधी ने कांग्रेस की कार्य समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिससे सुभाष चंद्र बोस और चित्तरंजन दास जैसे युवा नेताओं ने इस निर्णय का पुरजोर समर्थन किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी का भारत में पहला सफल सविनय अवज्ञा प्रयोग था। कथन 1 सही है क्योंकि राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गांधीजी चंपारण गए और 'तीनकठिया' प्रणाली (3/20 भाग पर नील की खेती) का विरोध किया। कथन 2 गलत है क्योंकि गांधीजी ने 100% वापसी की मांग की थी, किंतु अंततः समझौता हुआ और अवैध वसूली का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही किसानों को वापस किया गया। कथन 3 सही है क्योंकि 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस का लक्ष्य शांतिपूर्ण और वैध तरीकों से स्वराज प्राप्त करना बना तथा रचनात्मक कार्यक्रमों को बल मिला। कथन 4 गलत है क्योंकि चौरी-चौरा कांड के बाद असहयोग आंदोलन वापस लेने पर सी.आर. दास, सुभाष चंद्र बोस और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों (जैसे बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा) में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिसमें सतारा की 'प्रति सरकार' सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकार थी। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) जैसे जर्मनी, जापान और इटली द्वारा औपचारिक मान्यता प्रदान की गई थी। 3. आज़ाद हिंद फौज का गठन सर्वप्रथम रास बिहारी बोस के प्रयासों से कैप्टन मोहन सिंह द्वारा किया गया था, और बाद में सुभाष चंद्र बोस ने इस सेना की कमान संभालते हुए इसमें महिलाओं की एक अलग रेजिमेंट का गठन किया जिसका नाम 'रानी झांसी रेजिमेंट' रखा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रह आंदोलनों—विशेष रूप से चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन—की कार्यप्रणाली और उनके परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान, जहाँ एक ओर राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा पद्धति' के विरुद्ध सफल संघर्ष किया, वहीं सरकार द्वारा नियुक्त 'चंपारण अग्रैरियन कमेटी' के दबाव में आकर अंततः इस शोषणकारी प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली में कोई रियायत नहीं दी गई, तब गांधीजी ने किसानों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे स्वेच्छा से लगान देना बंद कर दें, और इस आंदोलन के परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का आदेश जारी किया जो भुगतान करने में सक्षम थे। 3. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में पहली बार गांधीजी द्वारा 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का सफल प्रयोग किया गया, जिसका उद्देश्य मिल मालिकों और मजदूरों के बीच चल रहे प्लेग बोनस विवाद को सुलझाना था, और मध्यस्थता बोर्ड द्वारा मजदूरों को 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि दिए जाने के निर्णय के साथ यह विवाद समाप्त हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? ग़दर पार्टी और उसके संस्थापकों द्वारा संचालित क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' (जिसे आगे चलकर ग़दर पार्टी के रूप में प्रसिद्धि मिली) के संस्थापक अध्यक्ष सोहन सिंह भकना थे, जबकि लाला हरदयाल इसके प्रमुख विचारक, प्रणेता और मार्गदर्शक के रूप में सक्रिय थे। 2. ग़दर पार्टी द्वारा निकाले जाने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र 'ग़दर' का मुख्य पृष्ठ हमेशा 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक के साथ छपता था, और यह अखबार अपनी स्थापना के समय से ही केवल गुरुमुखी और उर्दू लिपि में प्रकाशित होता था ताकि प्रवासियों तक आसानी से अपनी बात पहुँचाई जा सके। 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर ग़दर पार्टी के नेताओं ने 'ग़दर पाक्षिक' के माध्यम से प्रवासी भारतीयों से अपील की कि वे ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह करने के लिए शीघ्र भारत लौटें, जिसे 'ग़दर षड्यंत्र' के नाम से भी जाना जाता है। 4. वर्ष 1915 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए गए 'भारत रक्षा अधिनियम' (Defence of India Act) और कड़े खुफिया तंत्र के कारण ग़दर आंदोलन का यह सशस्त्र विद्रोह समय से पहले ही विफल हो गया था, जिसके फलस्वरुप कई प्रमुख क्रांतिकारियों पर प्रसिद्ध लाहौर षड्यंत्र मुकदमा चलाया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल प्रशासन में "मुश़रिफ" का मुख्य कार्य क्या था? मौर्य साम्राज्य के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के शासनकाल तथा उनकी प्रशासनिक एवं धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन परंपरा के अनुसार, अपने शासन के अंतिम वर्षों में चंद्रगुप्त मौर्य ने भीषण अकाल के समय भद्रबाहु के प्रभाव में आकर जैन धर्म दीक्षा ली और श्रवणबेलगोला में संलेखना (संथारा) पद्धति द्वारा अपने प्राण त्याग दिए थे। 2. अशोक के 'भाब्रू (बैराट) लघु शिलालेख' से यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि उनका व्यक्तिगत झुकाव बौद्ध धर्म की त्रिरत्न (बुद्ध, धम्म और संघ) में अटूट आस्था और निष्ठा के प्रति था। 3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देना था, और धम्म नीति के अंतर्गत उन्होंने पशु-बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ केवल शाकाहारी भोजन को अनिवार्य कर दिया था। 4. यूनानी इतिहासकार प्लूटार्क और जस्टिन के विवरणों के अनुसार, चंद्रगुप्त मौर्य ने अपनी विशाल सेना (जिसमें छह लाख सैनिक शामिल थे) के बल पर संपूर्ण भारत को रौंद डाला और यूनानी क्षत्रप सेलुकस निकेटर को पराजित कर एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया और पैरोपैनिसाडाई के प्रदेश प्राप्त किए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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