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General Science
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टाइगर?

Detailed Explanation

1973।
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांतों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है। 2. 'लेंज का नियम' (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित विद्युत धारा या प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. 'भंवर धाराएँ' (Eddy Currents) किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं जब उसे परिवर्तित चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, और इनका उपयोग प्रेरण भट्टी (Induction Furnace) में धातुओं को पिघलाने तथा विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) प्रणालियों में प्रभावी रूप से किया जाता है। 4. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) किसी कुंडली का वह गुण है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करता है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' ($Henry$) है जो कि $Weber/Ampere$ के तुल्य नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रकाशिकी और लेंस-दर्पण के व्यावहारिक अनुप्रयोगों तथा उनके प्रकाशीय गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति समाप्त हो जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है। 2. पानी के अंदर स्थित वायु का बुलबुला प्रकाश की किरणों को अभिसरित (Converge) करता है, क्योंकि पानी का अपवर्तनांक वायु की तुलना में अधिक होता है, जिससे बुलबुला एक उत्तल लेंस की तरह कार्य करता है। 3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की वास्तविक दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो उत्तल दर्पण और अवतल दर्पण दोनों के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) का सामान्य सूत्र $m = \frac{f}{f - u}$ होता है, जहाँ $f$ दर्पण की फोकस दूरी है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाना अनिवार्य है, और आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आवर्त सारणी के तत्वों के रासायनिक गुणों, आवर्तिता और आयनिक विभव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' (First Ionization Enthalpy) का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (फ्लोरीन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता जाता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन बंधुता अपने समूह में सबसे अधिक होती है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal Relationship) मुख्य रूप से द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम, बोरॉन) और तृतीय आवर्त के विकर्ण पर स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम, सिलिकॉन) के बीच देखा जाता है, क्योंकि इनके ध्रुवणात्मक गुण (Polarizing power) और आयनिक आकार लगभग समान होते हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? आवर्त सारणी के संदर्भ में, 'आयनन एन्थैल्पी' (Ionization Enthalpy) और 'विद्युतऋणात्मकता' (Electronegativity) के आवर्ती रुझानों (Periodic Trends) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी एक ही आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर सामान्यतः परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण आयनन एन्थैल्पी के मान में क्रमिक वृद्धि होती है, हालांकि नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के बीच नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $p$-कक्षक का अतिरिक्त स्थायित्व होता है। 2. पाउलिंग पैमाने (Pauling Scale) के अनुसार आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युतऋणात्मकता बढ़ती है, जबकि किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर घटती है, और संपूर्ण आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युतऋणात्मक तत्व 'फ्लोरीन' है। 3. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) और विद्युतऋणात्मकता दोनों एक ही भौतिक राशि को दर्शाती हैं, क्योंकि दोनों का मापन विलगित गैसीय परमाणु की स्थिति में ही किया जाता है और इनकी इकाइयाँ भी पूर्णतः समान होती हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटिन' (Somatostatin) हॉर्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) के स्रावण को प्रेरित करता है, जबकि 'थायरोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (TRH) प्रोलैक्टिन के स्रावण को भी उत्तेजित कर सकता है। 2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) के एड्रिनल मेडुला द्वारा स्रावित 'कैटेकोलामाइन्स' (एपिलीनफ्राइन और नॉरएपिनीफ्राइन) आपातकालीन हॉर्मोन कहलाते हैं, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस, लाइपोलिसिस और हृदय स्पंदन दर में वृद्धि के माध्यम से 'फाइट-या-फ्लाई' प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं। 3. अग्नाशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की अल्फा कोशिकाएँ (Alpha cells) 'ग््लुकागन' (Glucagon) हॉर्मोन स्रावित करती हैं, जो यकृत कोशिकाओं पर कार्य करके ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है और रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करने का मुख्य कार्य करता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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