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General Science
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आँख का रंग किस पर निर्भर?

Detailed Explanation

आइरिस का पिगमेंट।
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→ विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के प्रथम नियम के अनुसार, जब भी किसी बंद कुंडली से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) में परिवर्तन होता है, तो उस कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) उत्पन्न होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल या धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है, और यह किसी कुंडली की वह क्षमता है जिसके कारण वह अपने अंदर प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है। 4. भंवर धाराएँ (Eddy currents) केवल चालकों के सिरों पर उत्पन्न होने वाली पृष्ठीय परिघटना हैं और इनका उपयोग किसी भी व्यावहारिक या औद्योगिक अनुप्रयोग में नहीं किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? → मानव शरीर के पाचन, श्वसन और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय में जठर रस (Gastric juice) के भीतर मौजूद 'पेप्सिनोजन' एक निष्क्रिय एंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) की उपस्थिति में सक्रिय पेप्सिन में बदल जाता है और यह प्रोटीन को प्रोटीज तथा पेप्टोन में जलसघटित करता है। 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के दौरान, जब बाहरी अंतःश्वसन पेशियां (बाहरी इंटरकोस्टल मांसपेशियाँ और डायाफ्राम) संकुचित होती हैं, तो वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों के भीतर का अंतःफुफ्फुसीय दबाव वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो जाता है। 3. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के न्यूरॉन्स में 'मिएलिन आच्छद' (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में श्वान कोशिकाओं द्वारा तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स द्वारा होता है, जो तंत्रिका आवेगों के संचरण की गति को साल्टेटरी संवहन के माध्यम से तीव्र करता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) के भीतर उच्च चुम्बकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) वाली नरम लोहे की कोर को रखा जाता है, तो परिनालिका के भीतर का चुंबकीय क्षेत्र कमजोर हो जाता है क्योंकि नरम लोहा बाह्य चुंबकीय क्षेत्र को प्रतिकर्षित करता है। 4. स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से गुजरने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक हेनरी (Henry) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी तरल विलायक में गैस की विलेयता हेनरी के नियम (Henry's Law) द्वारा नियंत्रित होती है, जिसके अनुसार स्थिर तापमान पर किसी गैस का आंशिक दाब विलयन में गैस के मोल अंश (Mole fraction) के सीधे आनुपातिक होता है, और यह नियम उन गैसों पर भी पूरी तरह लागू होता है जो विलायक के साथ रासायनिक रूप से संगुणित या वियोजित होती हैं। 2. 'सजातीय उत्प्रेरण' (Homogeneous Catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैसीय या सभी द्रव अवस्था) में होते हैं, उदाहरण के लिए सीसा कक्ष विधि द्वारा सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में नाइट्रिक ऑक्साइड का गैस के रूप में उत्प्रेरक का कार्य करना। 3. उत्प्रेरक वर्धक (Catalytic Promoters वे पदार्थ होते हैं जो स्वयं रासायनिक अभिक्रिया में उत्प्रेरक के रूप में कार्य नहीं करते हैं, बल्कि उत्प्रेरक की सक्रियता (Catalytic activity) को बढ़ा देते हैं, जैसे Haber प्रक्रम द्वारा अमोनिया निर्माण में मोलिब्डेनम (Mo) का लोहे (Fe) के उत्प्रेरक के साथ कार्य करना। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → पादप जगत के वर्गीकरण और पादप हारमोन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें वास्तविक संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) अनुपस्थित होते हैं। 2. जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) पौधों में बीज नग्न होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय भित्ति नहीं पाई जाती है, किंतु इन पौधों में द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) का पूर्ण अभाव होता है। 3. जिबरेलिन ($GA_3$) एक अम्लीय पादप हॉर्मोन है जो तने की लंबाई में वृद्धि, आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में पर्णवृंत दीर्गीकरण और अंगूर के डंठल को लंबा करने में सहायता करता है, साथ ही यह बीज प्रसुप्ति (Seed dormancy) को तोड़कर अंकुरण को प्रेरित करता है। 4. ऑक्सिन (जैसे IAA और IBA) का मुख्य संश्लेषण स्थान प्ररोह (Shoot) और जड़ के अग्रभाग का शीर्ष भाग है, और यह पौधों में 'शीर्ष प्रमुखता' (Apical dominance) को बढ़ावा देता है जबकि पार्श्व कलियों की वृद्धि को संदमित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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