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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की कृषि व्यवस्था, आर्थिक जीवन और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु सभ्यता के लोग गेहूँ, जौ, राई, मटर और तिल के उत्पादन के साथ-साथ कपास की खेती करने वाले विश्व के पहले लोग थे, जिन्हें यूनानियों द्वारा 'सिंडन' (Sindon) कहा जाता था।
  2. 2. लोथल से प्राप्त गोदीबाड़ा (Dockyard) और धान की भूसी तथा रंगपुर से प्राप्त चावल के साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि सिंधु सभ्यता के लोगों का समुद्री व्यापार अत्यधिक विकसित था, और वे मेसोपोटामिया के साथ प्रत्यक्ष व्यापारिक संबंध रखते थे।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों से लोहे के कृषि उपकरण और अस्त्र-शस्त्र प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुए हैं, जिसके आधार पर इतिहासकार इस सभ्यता को पूर्ण रूप से लौह-युगीन सभ्यता मानते हैं।
  4. 4. मुहरों (Seals) के निर्माण में मुख्य रूप से 'स्टेलाइट' (Steatite) पत्थर का प्रयोग किया जाता था, और व्यापारिक विनिमय के लिए अधिकांशतः वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) का प्रचलन था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 4 सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) के लोग कपास उगाने वाले विश्व के पहले लोग थे, जिसे यूनानी 'सिंडन' कहते थे। लोथल और रंगपुर से चावल के साक्ष्य मिले हैं तथा लोथल का गोदीबाड़ा मेसोपोटामिया के साथ समुद्री व्यापार का प्रमाण है। मुहरें मुख्य रूप से स्टेलाइट (खड़िया पत्थर) से बनती थीं और विनिमय वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था। कथन 3 गलत है क्योंकि सिंधु सभ्यता एक कांस्य-युगीन सभ्यता थी और वे **लोहे** से परिचित नहीं थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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