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History of India
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनके विशिष्ट सिलसिलों के वैचारिक तथा व्यवहारिक पक्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चिश्ती सिलसिला संगीत (समां) और स्थानीय लोक भाषाओं के प्रयोग के प्रति अत्यधिक उदार था, तथा इस सिलसिले के संतों ने राजकीय संरक्षण और जागीर-अनुदान स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से त्याग किया था।
- 2. सुहरावर्दी सिलसिला राजनीतिक मामलों में तटस्थता की नीति अपनाता था और वह राज्य के संरक्षण, शाही पदों तथा धन-संपत्ति को स्वीकार करने में विश्वास नहीं रखता था।
- 3. नक्शबंदी सिलसिला भारत में सबसे अधिक कट्टर और रूढ़िवादी सिलसिला माना जाता था, जिसने अकबर की उदार धार्मिक नीतियों और 'दीन-ए-इलाही' का कड़ा विरोध किया था तथा शेख अहमद सरहिंदी ने इस दिशा में प्रमुख वैचारिक भूमिका निभाई थी।
- 4. कादिरिया सिलसिला के संतों ने शाहजहां के काल में दरबार में विशेष प्रभाव प्राप्त किया, और इस सिलसिले के राजकुमार दारा शिकोह ने सूफी मत और उपनिषदों के दार्शनिक सामंजस्य पर बल दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्यकालीन भारत में सूफी आंदोलन के विभिन्न सिलसिलों (संप्रदायों) की अपनी अलग विशेषताएँ और नीतियां थीं। कथन 1 सही है क्योंकि चिश्ती संतों ने 'समां' (आध्यात्मिक संगीत) को अपनाया और स्थानीय जनता से जुड़ने के लिए हिंडवी/अवधी जैसी भाषाओं का प्रयोग किया, साथ ही उन्होंने राजाओं के अनुदान व जागीर लेने से परहेज किया। कथन 2 गलत है क्योंकि सुहरावर्दी सिलसिले के संत राजकीय संरक्षण, शाही पदों (जैसे शेख उल-इस्लाम) और धन-संपत्ति को स्वीकार करने में संकोच नहीं करते थे, जो चिश्ती संतों के बिल्कुल विपरीत था। कथन 3 सही है, नक्शबंदी सिलसिला भारत में रूढ़िवादी और कट्टरपंथी विचारों का संवाहक था तथा शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद अलिफसानी) ने अकबर की उदार नीतियों की कड़ी आलोचना की थी। कथन 4 भी सही है, कादिरिया सिलसिले के राजकुमार दारा शिकोह ने सूफियों के वाdatुल वजूद और वेदांत दर्शन के बीच समानता स्थापित करने का प्रयास किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और महारानी विक्टोरिया की घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर समस्त शक्तियाँ भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) में निहित कर दी गईं।
2. महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार देशी रियासतों को हड़पने की अपनी पुरानी नीति का विस्तार करेगी और भविष्य में 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) को और अधिक कड़ाई से लागू किया जाएगा।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारत की प्राचीन धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने तथा नस्ल, जन्म या धर्म के भेदभाव के बिना सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर निष्पक्ष अवसर देने की घोषणा की।
4. इस अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर-जनरल के पद को समाप्त कर दिया गया और इसके स्थान पर सीधे ब्रिटिश कैबिनेट द्वारा नियुक्त 'भारत के सम्राट' (Emperor of India) को संपूर्ण प्रशासनिक अधिकार सौंप दिए गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा किया गया था, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, और उनके सैन्य अभियान को अंततः ब्रिटिश अधिकारी जनरल कैंपबेल द्वारा पूरी तरह कुचल दिया गया था।
2. रोहेलखंड के मुख्य केंद्र बरेली में खान बहादुर खान ने रोहिला सेना का गठन कर स्वयं को नवाब घोषित किया था, किंतु कर्नल जोन्स और सर कॉलिन कैंपबेल के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने इस विद्रोह का अत्यंत दमनकारी ढंग से अंत कर दिया।
3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील द्वारा पराजित कर इस सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार स्थापित किया गया था।
4. इन तीनों केंद्रों पर विद्रोह के दमन के पश्चात खान बहादुर खान को बरेली में ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी, जबकि लियाकत अली को युद्ध के दौरान ही मार गिराया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप, कारणों और उसके विभिन्न आयामों के विश्लेषण के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश अधिकारी/इतिहासकार ने यह प्रसिद्ध मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह मुख्य रूप से विदेशी शासन के विरुद्ध रूढ़िवादी तत्वों की प्रतिक्रिया और धर्म की रक्षा के नाम पर भड़काया गया एक धार्मिक युद्ध (Religious War) था, जिसमें क्रूरता और बर्बरता का बोलबाला था'?
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