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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संस्थाओं, उनके संस्थापकों तथा उनके वैचारिक उद्देश्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. तत्त्वबोधिनी सभा (1839) - देवेंद्रनाथ ठाकुर द्वारा स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना और ब्रह्म समाज के वैचारिक आधार को अधिक सुदृढ़ करना था।
- 2. सेवा सदन (1885) - बहरामजी एम. मलाबारी और दियाराम गिदूमल द्वारा स्थापित, जिसका प्रमुख उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं की सहायता करना तथा बाल विवाह और परदा प्रथा का विरोध करना था।
- 3. देव समाज (1887) - शिवनारायण अग्निहोत्री द्वारा लाहौर में स्थापित, जिसका उद्देश्य आत्मा की शुद्धि, उच्च नैतिक आचरण तथा गुरु की सर्वोच्चता पर बल देना था।
- 4. सोशल सर्विस लीग (1911) - गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा बॉम्बे में स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक सेवा के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ता तैयार करना और आपदा राहत कार्य चलाना था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 1839 में 'तत्त्वबोधिनी सभा' की स्थापना की थी, जो बाद में ब्रह्म समाज से जुड़ी और उपनिषद के विचारों के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युग्म 2 सही है; बहरामजी एम. मलाबारी और उनके मित्र दियाराम गिदूमल ने 'सेवा सदन' की स्थापना कर विशेष रूप से पीड़ित और शोषित महिलाओं के कल्याण के लिए कार्य किया था। युग्म 3 सही है, शिवनारायण अग्निहोत्री ने 1887 में लाहौर में 'देव समाज' की स्थापना की थी जो नैतिक जीवन और गुरु की सत्ता पर जोर देता था। युग्म 4 गलत है क्योंकि 'सोशल सर्विस लीग' की स्थापना गोपाल कृष्ण गोखले ने नहीं, बल्कि उनके सहयोगी नारायण मल्हार जोशी (N. M. Joshi) ने 1911 में बॉम्बे में की थी (हालांकि गोखले ने सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की थी)। इस काल के विभिन्न आंदोलनों के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान आयोजित 'कन्नौज सभा' का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य उत्सव आयोजित करना था, जिसमें बीस विभिन्न देशों के राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम द्वारा रचित संस्कृत प्रहसन 'मत्तविलास प्रहसन' में बौद्ध और जैन भिक्षुओं के आचरण तथा उस समय की सामाजिक एवं धार्मिक रूढ़ियों पर हास्यपूर्ण व्यंग्य किया गया है, और महेंद्रवमन् अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म के अनुयायी थे, जिन्हें बाद में शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की उत्तर भारत विजय के रथ को रोककर उसे पराजित किया था, जिसका विस्तृत और जीवंत विवरण बाणभट्ट द्वारा रचित 'हर्षचरित' में खुलकर मिलता है।
4. तंजावुर के प्रसिद्ध 'बृहदेश्वर या राजराजेश्वर मंदिर' का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है और इसमें ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी, जिसके विरुद्ध राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था।
2. चंपारण जाँच समिति के समक्ष किसानों पर किए गए अवैध वित्तीय उत्पीड़न को सिद्ध करने के बाद, समिति ने सर्वसम्मति से बागान मालिकों द्वारा वसूले गए अवैध धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को तत्काल वापस करने की सिफारिश की थी।
3. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य पंजाब और खिलाफत के अन्यायपूर्ण कृत्यों का निवारण करते हुए 'स्वराज' की प्राप्ति करना था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के उपरांत बारदोली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, व्यापारिक संपर्कों और मुहरों (Seals) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन के साथ-साथ आंतरिक एवं बाह्य व्यापार की केंद्रीय भूमिका थी, जिसमें मेसोपोटामिया और ओमान के साथ समुद्री और स्थलीय दोनों प्रकार के व्यापारिक संबंध स्थापित होने के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य मिलते हैं।
2. लोथल से प्राप्त फारसी खाड़ी (Persian Gulf) शैली की एक बटननुमा मुहर और सुतकागेंडोर तथा देशूदेर जैसे तटीय स्थल यह प्रमाणित करते हैं कि हड़प्पा वासियों ने पश्चिमी एशियाई क्षेत्रों के साथ प्रत्यक्ष समुद्री व्यापार के लिए सुव्यवस्थित बंदरगाहों का निर्माण किया था।
3. सिंधु लिपि (Harappan Script) को आज तक पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है, लेकिन उपलब्ध मुहरों और ताम्र पट्टिकाओं पर सबसे अधिक संख्या में 'एकसिंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, जिसके बाद दूसरा सबसे लोकप्रिय अंकन कुबड़ वाले सांड (Humped Bull) का है।
4. हड़प्पाकालीन मुहरें मुख्य रूप से पकी हुई मिट्टी (टेराकोटा) से बनाई जाती थीं, और तांबे या सोने जैसी धातुओं का प्रयोग कभी भी मुहरों के निर्माण के लिए नहीं किया गया था, क्योंकि ये धातुएँ केवल आभूषण और हथियार बनाने के लिए आरक्षित थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु सभ्यता के अधिकांश नगरों (अपवादस्वरूप धौलाविरा और लोथल को छोड़कर) में पारंपरिक रूप से नगर को दो भागों में विभाजित किया गया था—पश्चिमी भाग जो ऊंचे चबूतरे पर स्थित 'दुर्ग' (Citadel) कहलाता था और पूर्वी भाग जो 'निचला नगर' (Lower Town) था, जहाँ सामान्य जनता निवास करती थी।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) इस सभ्यता की ईंट-चिनाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके तल को जल-रोधी (Water-tight) बनाने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था और इसके उत्तर व दक्षिण में सीढ़ियां बनी हुई थीं।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों (Seals) पर सर्वाधिक संख्या में 'एकसिंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, इसके अतिरिक्त कुबड़ वाले सांड, बाघ, हाथी और गैंडे के चित्र भी प्रचुर मात्रा में उत्कीर्ण हैं, किंतु घोड़े के स्पष्ट और नियमित साक्ष्य इस सभ्यता के परिपक्व स्तर पर बहुतायत में मिलते हैं।
4. सुरकोटाड़ा नामक स्थल से घोड़े की अस्थियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, तथा यहाँ से एक अनोखी 'अंडाकार कब्र' (Oval Grave) और तराशे गए पत्थरों से निर्मित दीवार से घिरी हुई बस्ती के साक्ष्य भी मिले हैं जो इसके रक्षात्मक महत्व को दर्शाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के पश्चात अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंद) घोषित किया गया, जबकि विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य और प्रशासनिक कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में गठित 'न्याय अदालत' के पास थी।
2. ब्रिटिश सेना द्वारा सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के बाद, ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने सम्राट के पुत्रों और पोते को हुमायूं के मकबरे के पास गिरफ्तार कर गोली मार दी थी, तथा बहादुर शाह जफर पर देशद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया था।
3. दिल्ली में विद्रोह के दौरान सम्राट बहादुर शाह जफर ने सक्रिय रूप से युद्ध के मैदान में सेना का नेतृत्व किया और संपूर्ण देश के राजाओं व नवाबों को अंग्रेजों के विरुद्ध एक स्थायी और मजबूत केंद्रीय संगठन के तहत सीधे निर्देश जारी किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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