शिक्षण विधियाँ
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,770 times
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) और विद्यालयी शिक्षण विधियों के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करते समय, स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey) और अन्य शिक्षाविदों द्वारा प्रतिपादित क्रियात्मक अनुसंधान की प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इसकी विशिष्ट कार्यप्रणाली, उद्देश्य और कक्षा-कक्षीय शिक्षण विधियों पर इसके प्रभाव को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसी व्यावहारिक पद्धति है जिसके माध्यम से शिक्षक और विद्यालयीय कार्मिक अपनी कक्षा-कक्ष की तात्कालिक समस्याओं का वैज्ञानिक और तार्किक समाधान खोजते हैं। शिक्षाशास्त्र में इसका उद्देश्य शिक्षण विधियों, पाठ्यचर्या और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में सुधार लाकर शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। इस अनुसंधान पद्धति के ऐतिहासिक विकास और इसके चरणों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) और विद्यालयी शिक्षण विधियों के…
← पिछला प्रश्न
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के संदर्भ में…
Related Questions
→
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के क्षेत्र में स्टीफन कोरी (Stephen Corey) और डेविड हूपर (David Hopkins) द्वारा विकसित मॉडलों का शिक्षण विधियों के सुधार के संदर्भ में सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब एक शिक्षक अपनी कक्षा में किसी विशेष पठन अक्षमता (जैसे डिस्लेक्सिया) से जूझ रहे छात्रों के लिए 'उपचारात्मक शिक्षण विधि' (Remedial Teaching Method) के प्रभाव का मूल्यांकन करने हेतु त्वरित और व्यावहारिक शोध चक्र चलाता है, तब इस प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इसकी तात्विक और कार्यप्रणालीगत विशेषता को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों' (CWSN) के लिए 'विशेष शिक्षा' (Special Education), 'एकीकृत शिक्षा' (Integrated Education) और 'समावेशी शिक्षा' (Inclusive Education) के दार्शनिक, प्रशासनिक तथा शैक्षणिक स्वरूपों का गहन विश्लेषणात्मक अध्ययन करने पर, यदि एक सामान्य विद्यालय अपनी संरचना, पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धतियों और मूल्यांकन प्रणालियों में इस प्रकार का मूलभूत परिवर्तन करता है कि वह प्रत्येक बालक (चाहे उसकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक या भाषाई क्षमताएं कितनी भी भिन्न क्यों न हों) की व्यक्तिगत अधिगम आवश्यकताओं को पूरा करने में समर्थ हो सके, तो समावेशी शिक्षा के इस आधुनिक और वैज्ञानिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
→
शैक्षणिक अनुसंधान और कक्षा-कक्ष के व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य में, जब एक शिक्षक 'क्रियात्मक अनुसंधान' (Action Research) के अंतर्गत अपनी शिक्षण विधियों में सुधार लाने के लिए 'कार्रवाई पर विचार' (Reflection-in-Action) और 'कार्रवाई पर परावर्तन' (Reflection-on-Action) की अवधारणाओं का अनुप्रयोग करता है, तो इन दोनों चिंतन प्रक्रियाओं के मध्य तात्विक और क्रियात्मक अंतर को सबसे सटीक रूप से कौन-सा कथन स्पष्ट करता है?
→
समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बालकों (CWSN) के लिए 'सार्वभौमिक डिज़ाइन अधिगम' (Universal Design for Learning - UDL) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. UDL एक ऐसा पाठ्यक्रम और शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को दूर करने के लिए शिक्षण विधियों, सामग्रियों और मूल्यांकन के तरीकों में शुरुआत से ही लचीलापन और बहुविकल्प प्रदान करता है।
2. UDL के तीन मुख्य मनोवैज्ञानिक और तंत्रिका-वैज्ञानिक आधार हैं: सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Action and Expression)।
3. यह दृष्टिकोण केवल दिव्यांग या बौद्धिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए ही अनुकूलित है, और सामान्य अथवा प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए इसका उपयोग करने से उनके उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के अंतर्गत प्रदत्त आंकड़ों के संग्रहण और विश्लेषण के पश्चात् जब एक शिक्षक अपनी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पद्धति में तात्कालिक सुधार लाने के लिए परिकल्पना (Hypothesis) का पुनर्गठन करता है, तो इस चक्राकार प्रक्रिया (Cyclical Process) में 'कर्ट लेविन' (Kurt Lewin) द्वारा प्रतिपादित मॉडल के कौन से दो चरण सबसे अधिक निर्णायक होते हैं और वे किस प्रकार शिक्षण विधियों की प्रभावशीलता को बढ़ाते हैं?
→
शैक्षिक अनुसंधान के अंतर्गत 'क्रियात्मक अनुसंधान' (Action Research) की मूल अवधारणा और शिक्षण विधियों में इसके प्रायोगिक अनुप्रयोग का गहन विश्लेषण करते समय, स्टीफन कोरे (Stephen M. Corey) तथा अन्य शिक्षाविदों के दृष्टिकोण के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस शोध पद्धति के वास्तविक उद्देश्य और इसकी तात्विक प्रकृति को सर्वाधिक सटीक रूप से रेखांकित करता है?
→
शिक्षण विधियों और क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) के बीच घनिष्ठ संबंध का विश्लेषण करते समय, जब एक शिक्षक कक्षा-कक्ष में विद्यार्थियों की पठन संबंधी कठिनाइयों (जैसे डिस्लेक्सिया के लक्षण) को दूर करने के लिए 'उपचारात्मक शिक्षण' (Remedial Teaching) के साथ-साथ विभिन्न शिक्षण विधियों (जैसे मोंटेसरी पद्धति या सहयोगात्मक अधिगम) के प्रभावशीलता की जाँच वैज्ञानिक ढंग से करता है, तो इस प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
शिक्षण विधियों (Teaching Methods) के प्रभाव का मूल्यांकन करते समय और कक्षा-कक्ष की तात्कालिक समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान हेतु शिक्षक द्वारा निष्पादित 'क्रियात्मक अनुसंधान' (Action Research) के विभिन्न चरणों—विशेष रूप से 'परिकल्पना निर्माण' (Formulation of Action Hypothesis) और 'डेटा संकलन एवं विश्लेषण' (Data Collection and Analysis)—के पारस्परिक संबंधों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस शोध प्रक्रिया के वास्तविक उद्देश्य और इसकी प्रकृति को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.