नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के विभिन्न स्तरों और चरणों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, जब कोई किशोर या वयस्क इस अवस्था में पहुँचता है जहाँ वह सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकारों (Social Contract and Individual Rights) को प्राथमिकता देता है, और यह मानता है कि नियमों को आपसी सहमति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं द्वारा बदला जा सकता है ताकि समाज के अधिकांश लोगों के कल्याण की रक्षा हो सके, तो कोहलबर्ग के इस सिद्धांत के अनुसार यह विशिष्ट चरण किस स्तर के अंतर्गत आता है और इसकी सबसे मूल दार्शनिक विशेषता क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में, 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के अंतर्गत पाँचवाँ चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights Orientation) कहलाता है। इस चरण में व्यक्ति यह समझता है कि कानून और नियम लचीले उपकरण हैं जिन्हें समाज की भलाई और आपसी सहमति से बदला जा सकता है, न कि वे ब्रह्मांडीय और अपरिवर्तनीय सत्य हैं। इस विषय में विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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कोहलबर्ग के अनुसार, सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों के संदर्भ में, यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन केवल इसलिए किया जाना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का सामाजिक विघटन न हो, तो कोहलबर्ग के किस स्तर और चरण का यह सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है?
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कोहलबर्ग के अनुसार, बच्चा किस अवस्था में दंड से बचने के लिए नियमों का पालन करता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) की आलोचना करते हुए मनोवैज्ञानिक कैरोल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया था कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के नैतिक अनुभवों और न्याय के सिद्धांत (Justice Perspective) पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि महिलाओं के नैतिक विकास का मार्ग 'देखभाल और संबंधों की नैतिकता' (Care Perspective) द्वारा निर्देशित होता है। गिलिगन के इस नारीवादी आलोचनात्मक दृष्टिकोण के अनुसार, कोहलबर्ग के उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) के अंतिम चरण में न्यायोन्मुख और अधिकार-आधारित चिंतन की तुलना में देखभाल के दृष्टिकोण की क्या तात्विक और विकासात्मक विशेषता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत, रूढ़िगत नैतिकता के स्तर (Conventional Level) के दूसरे चरण यानी 'प्राधिकरण और सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने के उन्मुखीकरण' (Authority and Social-Order Maintaining Orientation) तथा उत्तर-रूढ़िगत स्तर के पहले चरण 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) के बीच के तात्विक एवं विश्लेषणात्मक अंतर का सूक्ष्म परीक्षण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों चरणों के मध्य के मूल दार्शनिक प्रस्थान को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के विभिन्न स्तरों और चरणों का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, 'पारंपरिक नैतिकता का स्तर' (Conventional Morality Level) के अंतर्गत आने वाले दोनों चरणों—'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Stage 3) तथा 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Stage 4)—के मध्य का तात्विक और विकासात्मक अंतर निम्नलिखित में से किस मुख्य आधार पर सबसे स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) पर पहुँच जाता है, तो इस अवस्था में उसके नैतिक तर्कों और निर्णयों की सबसे मुख्य, दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी होगी?
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