विकास के सिद्धांत (Principles)
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,622 times
बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों, यथा 'निरंतरता का सिद्धांत' (Principle of Continuity), 'विकास की दिशा का नियम' (Cephalocaudal and Proximodistal Tendencies), और 'व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धांत' (Principle of Individual Differences) का गहन तात्विक और वैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि कोई बाल मनोवैज्ञानिक यह प्रेक्षण करता है कि शैशवावस्था से किशोरावस्था तक पहुँचने वाले बालकों में शारीरिक, मानसिक और संवेगात्मक परिवर्तनों की दर असमान होने के बावजूद विकास का समग्र प्रतिमान एक पूर्व-निर्धारित क्रम (जैसे सिर से पैर की ओर तथा केंद्र से परिधि की ओर) का अनुसरण करता है, तो विकास की इस समग्र प्रक्रिया और उसके मूल सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बाल विकास (Child Development) की प्रक्रिया केवल मात्रात्मक नहीं बल्कि गुणात्मक और परिपक्वता (Maturation) आधारित होती है। विकास के सार्वभौमिक सिद्धांतों के अनुसार, विकास की दिशा हमेशा सिर से पैर की ओर ('सेफेलोकॉडल' या Cephalocaudal trend) तथा शरीर के केंद्र से बाहर की ओर यानी परिधि की ओर ('प्रॉक्सिमोडिस्टल' या Proximodistal trend) होती है। यद्यपि बालकों में व्यक्तिगत भिन्नताएँ पाई जाती हैं और विकास की गति अलग-अलग हो सकती है, किंतु विकास का क्रम और दिशा का प्रतिमान सभी में समान रहता है। इसके अतिरिक्त, विकास के सभी आयाम (शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक) परस्पर घनिष्ठ रूप से जुड़े होते हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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