त्वरित लिंक्स
Indian Polity
28 views
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) का ही परिष्कृत रूप भारतीय संविधान की प्रस्तावना है।
- 2. 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है।
- 3. प्रस्तावना में उल्लिखित 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक' न्याय के आदर्श को रूस की क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया था, जबकि 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' के आदर्श फ्रांस की क्रांति (1789) से लिए गए हैं।
- 4. संविधान की प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है और न ही यह न्यायालय द्वारा न्यायोचित (Justiciable) है, अर्थात इसके प्रावधानों को किसी भी न्यायालय में स्वतः प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान की प्रस्तावना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को पेश किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' पर आधारित है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'बेरूबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह कहा था कि प्रस्तावना संविधान का अंग नहीं है; हालाँकि बाद में 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है। कथन 3 सही है, प्रस्तावना में न्याय के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से तथा स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है। कथन 4 सही है, प्रस्तावना गैर-न्यायिक (Non-justiciable) है, यानी इसके प्रावधानों को अदालतों में लागू नहीं कराया जा सकता और यह विधायिका की शक्ति का स्रोत या प्रतिबंध नहीं है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था का अध्ययन करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कामकाज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 75(1) के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा इस व्यवस्था के तहत मंत्रिपरिषद के सदस्यों के लिए यह अनिवार्य है कि वे नियुक्ति के समय संसद के किसी भी सदन के सदस्य हों, अन्यथा वे छह माह के भीतर अपनी सदस्यता खो देंगे।
2. अनुच्छेद 78 के अंतर्गत प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट संवैधानिक कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन और विधान संबंधी प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित करे, और यदि राष्ट्रपति ऐसी कोई सूचना माँगता है, तो उसे उपलब्ध कराए।
3. 'सामूहिक उत्तरदायित्व' (Collective Responsibility) के सिद्धांत के अंतर्गत लोकसभा में किसी एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने या प्रधानमंत्री के त्यागपत्र देने पर पूरी मंत्रिपरिषद का विघटन हो जाता है, क्योंकि सभी मंत्री लोकसभा के प्रति संयुक्त रूप से उत्तरदायी होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
नि:शुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) से संबंधित प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 18 के तहत उपाधियों का अंत किया गया है, जिसके अंतर्गत राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा, तथा भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं कर सकता है।
2. 'बाल कृष्ण बनाम भारत संघ वाद' और 'इंदिरा साहनी वाद' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 18 के तहत दी जाने वाली 'भारत रत्न', 'पद्म विभूषण', 'पद्म भूषण' और 'पद्म श्री' जैसी राष्ट्रीय उपाधियाँ अनुच्छेद 18(1) के अर्थ के अंतर्गत 'उपादियाँ' (Titles) हैं, इसलिए इनका प्रयोग व्यक्तियों द्वारा अपने नाम के पहले या बाद में प्रत्यय या उपसर्ग के रूप में किया जा सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 20(3) के अनुसार किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त किसी व्यक्ति को अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य (Self-incrimination) नहीं किया जाएगा, और यह संरक्षण केवल आपराधिक न्यायालयों की कार्यवाहियों तक ही सीमित है, विभागीय या प्रशासनिक जाँच के दौरान यह लागू नहीं होता है।
4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण' प्रदान किया गया है, जिसके दायरे में 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को 'पुट्टास्वामी वाद (2017)' में नौ जजों की पीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 21 तथा भाग III के अन्य अनुच्छेदों के तहत एक मूल अधिकार घोषित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राष्ट्रपति की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) किस अनुच्छेद में वर्णित है?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके विशिष्ट अनुच्छेदों के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 40 के तहत राज्य को ग्राम पंचायतों के संगठन के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया गया है, जिसे 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 से पूर्व केवल एक नीति निर्देशक तत्व के रूप में मान्यता प्राप्त थी, किंतु इस संशोधन के पश्चात इसे एक संवैधानिक और अनिवार्य संस्थागत स्वरूप प्रदान कर दिया गया।
2. अनुच्छेद 44 के अंतर्गत राज्य पूरे भारत के राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और वर्तमान में देश के सभी राज्यों के लिए इसे विधिवत रूप से पूर्ण रूप से लागू करना संवैधानिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
3. अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य देश के पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का और वन तथा वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, जिसे मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इसे वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
4. संविधान के अनुच्छेद 50 के अंतर्गत राज्य की लोक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक् करने के लिए राज्य कदम उठाएगा, और यह प्रावधान केवल सैद्धांतिक है क्योंकि इसका व्यावहारिक रूप से न्यायिक निर्णयों से कोई संबंध नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.