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Indian Polity
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान सभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारत की सीटों का आंटन प्रत्येक दस लाख की जनसंख्या पर एक सदस्य के अनुपात में किया गया था।
  2. 2. रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधियों का चयन रियासतों के शासकों द्वारा नामांकित किया जाना था, और यही कारण है कि संविधान सभा पूरी तरह से एक निर्वाचित निकाय थी जिसमें मनोनीत सदस्यों के लिए कोई स्थान नहीं था।
  3. 3. 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) में यह संकल्प व्यक्त किया गया था कि भारत एक स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य होगा और इसके समस्त क्षेत्रों का प्रशासन तथा शक्ति का स्रोत जनता होगी।
  4. 4. संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा द्वारा कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी और इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के माध्यम से हुआ था और जनसंख्या (लगभग 10 लाख पर 1 सीट) के आधार पर सीटें आवंटित की गई थीं। कथन 2 गलत है क्योंकि संविधान सभा आंशिक रूप से निर्वाचित और आंशिक रूप से मनोनीत (रियासतों के प्रतिनिधि शासकों द्वारा मनोनीत थे) निकाय थी। कथन 3 सही है; पंडित नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' में संप्रभुता, गणराज्य और जनता को समस्त शक्तियों का स्रोत बनाने का संकल्प लिया गया था। कथन 4 गलत है क्योंकि संविधान सभा द्वारा कुल 22 मुख्य समितियां नहीं बल्कि प्रक्रिया संबंधी नियमों और कार्यों के लिए प्रमुख समितियों की संख्या अलग थी, हालांकि प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर ही थे। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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