संज्ञानात्मक विकास
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बर्नर वेइनर (Bernard Weiner) के 'अधिगम के आरोपण सिद्धांत' (Attribution Theory of Motivation) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'नियंत्रण का locus' (Locus of Control)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक आयाम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी अपनी शैक्षणिक सफलताओं या असफलताओं के कारणों को आंतरिक कारकों (जैसे- अपनी स्वयं की योग्यता, प्रयास) या बाह्य कारकों (जैसे- परीक्षा की कठिनाई, भाग्य, शिक्षक का पक्षपात) के रूप में आरोपित या जिम्मेदार मानते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आंतरिक अभिप्रेरण, आत्म-नियामक व्यवहार और जिम्मेदारी के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
बर्नर वेइनर के आरोपण सिद्धांत (Attribution Theory) के अनुसार, छात्र अपनी सफलता और असफलता के कारणों की व्याख्या कैसे करते हैं, यह उनके भावी व्यवहार, अभिप्रेरण और भावनाओं को अत्यधिक प्रभावित करता है। यदि विद्यार्थी अपनी सफलता या असफलता का श्रेय आंतरिक और नियंत्रणीय कारकों (विशेषकर 'प्रयास' या 'मेहनत') को देते हैं, तो वे भविष्य में अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित होते हैं और उनमें उत्तरदायित्व की भावना तथा आत्म-प्रभावकारिता विकसित होती है। इसके विपरीत, बाह्य और अनियंत्रणीय कारकों (जैसे भाग्य या शिक्षक की कठोरता) पर आरोपण करने से सीखने की लाचारी (Learned Helplessness) उत्पन्न हो सकती है। अतः विकल्प (b) वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से पूर्णतः सही है।
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रगामी संगठक या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक परिचयात्मक और उच्च-स्तरीय शिक्षण सामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक किसी नए, जटिल और विस्तृत विषय को पढ़ाने से ठीक पहले प्रस्तुत करता है, ताकि यह शिक्षार्थी की संज्ञानात्मक संरचना में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों (Inclusive Concepts) के साथ नए ज्ञान को जोड़ने (Anchoring) के लिए एक वैचारिक सेतु या पुल का कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक समावेश, अवधारण (Retention) और संज्ञानात्मक एकीकरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बच्चा यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, रंग, आकार या विन्यास (Appearance) में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है, और यह क्षमता सामान्यतः किस संज्ञानात्मक अवस्था में पूर्ण रूप से विकसित होती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विसर्जन, विकेंद्रीकरण (Decentration) और मूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण' (Decentration)**—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशिष्ट विशेषता पर ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण / Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने और मानसिक रूप से विभिन्न चरों के बीच समन्वय स्थापित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, संरक्षण (Conservation) की क्षमता और तार्किक विमर्श के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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