स्मृति एवं विस्मृति
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठनकर्ता या एडवांस ऑर्गेनाइजर' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक शैक्षणिक शिक्षण सामग्री या परिचयात्मक विषयवस्तु के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक द्वारा किसी नए, जटिल और विस्तृत पाठ या संप्रत्यय को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह उनके संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों और पूर्व ज्ञान के बीच एक वैचारिक सेतु का कार्य कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए ज्ञान के सार्थक आत्मसातकरण (Meaningful Assimilation) और दीर्घकालिक स्मृति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Theory of Meaningful Verbal Learning) के अनुसार, 'अग्रिम संगठनकर्ता' (Advance Organizer) वे प्रारंभिक और उच्च-स्तरीय अवधारणाएँ हैं जिन्हें मुख्य विषयवस्तु से पहले प्रस्तुत किया जाता है। यह विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक ढांचे (Cognitive Structure) में पहले से मौजूद प्रासंगिक ज्ञान (Inclusive Concepts) और नए ज्ञान के बीच समावेशन (Assimilation) की प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे रटने के बजाय 'सार्थक अधिगम' (Meaningful Learning) संभव होता है। इसलिए विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है।
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'अधिगम अक्षमताओं (Learning Disabilities) और विशिष्ट बालकों के तंत्रिका-मनोवैज्ञानिक (Neuro-psychological) स्वरूप' के संदर्भ में, सैमुअल किर्क (Samuel Kirk) द्वारा सर्वप्रथम प्रतिपादित शब्द 'लर्निंग डिसएबिलिटी' (Learning Disability) के अंतर्गत 'डिस्लेक्सिया' (Dyslexia - पठन संबंधी विकार) के न्यूरो-बायोलॉजिकल आधार और मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के टेम्परो-पैराइटल जंक्शन' (Left Hemisphere Temporo-parietal Junction) की कार्यात्मक अक्षमता, तथा रेमंड बार्कले (Russell Barkley) द्वारा प्रतिपादित 'अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर' (ADHD) के 'एग्जीक्यूटिव फंक्शनिंग मॉडल' (Executive Functioning Model) के अंतर्गत प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) की शिथिलता के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'यूनिवर्सल डिजाइन फॉर लर्निंग' (UDL) के अनुप्रयोग और विद्यार्थियों में बहुसंवेदी शिक्षण रणनीतियों (Multi-sensory Teaching Strategies) के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, जॉर्ज स्टिचवेल (George Still) और रसेल बार्कले (Russell Barkley) द्वारा प्रतिपादित 'कार्यकारी कार्य मॉडल' (Executive Function Model of ADHD) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Prefrontal Cortex), 'बेसल गैन्ग्लिया' (Basal Ganglia), और 'सेरेबेलम' (Cerebellum) के बीच अवरोध नियंत्रण (Inhibitory Control), कार्यशील स्मृति (Working Memory) और स्व-नियमन (Self-Regulation) की सक्रियण गतिकी, तथा पॉल लिंडन (Paul Linden) और सहकर्मियों के 'दोषपूर्ण डोपापिनर्जिक न्यूरोट्रांसमिशन' (Dysfunctional Dopaminergic Neurotransmission) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, संज्ञानात्मक-व्यवहार संबंधी रणनीतियों (Cognitive-Behavioral Strategies) और विद्यार्थियों में आवेग नियंत्रण व शैक्षणिक संलग्नता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'अधिगम अक्षमता और डिसकैलकुलिया (Dyscalculia - गणितीय वैकल्य)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, इस्तवान ज़ोरोघी (Istvan Zollei) और अन्य न्यूरोलॉजिस्ट्स द्वारा विश्लेषित 'डिसकैलकुलिया' के अंतर्गत मस्तिष्क के 'इंट्रापैरिएटल सल्कुस' (Intraparietal Sulcus - IPS), 'डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC) और 'वेंट्रेल ऑसिपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Ventral Occipito-Temporal Cortex) के बीच 'संख्यात्मक परिमाण प्रसंस्करण' (Numerical Magnitude Processing), स्थानिक-दृश्य कार्यशील स्मृति और प्रतीकात्मक संख्या प्रतिनिधित्व की सक्रियण विसंगति, तथा स्टैनिस्लास डीहेन (Stanislas Dehaene) द्वारा प्रतिपादित 'ट्रिपल-कोड मॉडल' (Triple-Code Model: विजुअल अरेबिक नंबर फॉर्म, वर्बल ऑडिट वर्ड फॉर्म, और एनालॉग मेग्नीट्यूड रिप्रेजेंटेशन) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, उपचारात्मक संख्यात्मक शिक्षाशास्त्र (Remedial Numeracy Pedagogy) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, बहुसंवेदी गणितीय दृष्टिकोण और स्थानिक-संख्यात्मक (Visuo-numerical) संरेखण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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'अधिगम स्थानांतरण (Transfer of Learning)' के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों के संदर्भ में, एडवर्ड थार्नडाइक (Edward Thorndike) और रॉबर्ट वुडवर्थ (Robert Woodworth) द्वारा प्रतिपादित 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के अंतर्गत 'पूर्व अधिगम और नवीन अधिगम के मध्य संज्ञानात्मक सामान्यीकरण' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex) और 'हिप्पोकैम्पस' (Hippocampus) के बीच क्रॉस-डोमेन मैपिंग, न्यूरल सर्किट री-यूटिलाइजेशन और कार्यशील स्मृति की सक्रियण गतिकी, तथा चार्ल्स जुड (Charles Judd) द्वारा प्रतिपादित 'सामान्यीकरण का सिद्धांत' (Theory of Generalization) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, समस्या-समाधान आधारित शिक्षाशास्त्र (Problem-based Pedagogy) और विद्यार्थियों में उच्च-क्रम के संज्ञानात्मक कौशल, अमूर्त सिद्धांतों के अनुप्रयोग व सकारात्मक अधिगम स्थानांतरण के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत (Structure of Intellect Model) का प्रतिपादन करते हुए जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने बुद्धि को तीन स्वतंत्र आयामों—संक्रियाओं (Operations), अंतर्वस्तुओं (Contents) और उत्पादों (Products)—के रूप में वर्गीकृत किया था। इस मॉडल के अंतर्गत, यदि कोई व्यक्ति किसी दी गई समस्या के समाधान के लिए अपनी स्मृति और संज्ञान का उपयोग करते हुए विभिन्न दिशाओं में स्वतंत्र रूप से अनेक मौलिक एवं भिन्न विचार उत्पन्न करता है, तो गिलफोर्ड के बुद्धि के घन (Intellect Cube) में यह विशिष्ट मानसिक प्रक्रिया किस श्रेणी के अंतर्गत आएगी?
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उत्तर प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और मेलों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. शाकंभरी देवी मेला - सहारनपुर जिला (प्रतिवर्ष माँ शाकंभरी देवी के मंदिर में आयोजित, जहाँ उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के श्रद्धालु भी आते हैं)
2. बटेश्वर मेला - आगरा जिला (यमुना नदी के तट पर आयोजित एक प्रसिद्ध पशु मेला, जो ऊँटों और अन्य पशुओं की खरीद-फरोख्त के लिए राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है)
3. हरिदास जयंती मेला - मथुरा जिला (निधिवन, वृंदावन में संगीत सम्राट स्वामी हरिदास की स्मृति में प्रतिवर्ष आयोजित ध्रुपद गायन और शास्त्रीय संगीत का प्रसिद्ध उत्सव)
4. सैयद सलार मसूद गाजी का मेला - बहराइच जिला (यह मेला हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की साझा संस्कृति का प्रतीक है, जिसे 'बहराइच का मेला' भी कहा जाता है)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning / Assimilation Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रिम संगठन या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक परिचयात्मक और उच्च-स्तरीय शैक्षणिक सामग्री (Pedagogical Material) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे शिक्षक किसी नए, जटिल और विस्तृत विषय को पढ़ाने से ठीक पहले विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करता है ताकि यह नया ज्ञान शिक्षार्थी के मस्तिष्क में पहले से मौजूद प्रासंगिक संज्ञानात्मक संरचना (Existing Cognitive Structure / Schemata) के साथ एक सुदृढ़ 'समावेशन' (Assimilation) स्थापित कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान के सदुपयोग, संज्ञानात्मक ब्रिजिंग और दीर्घकालिक सार्थक ज्ञानार्जन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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डेविड औसुबेल (David Ausubel) के 'सार्थक मौखिक अधिगम सिद्धांत' (Meaningful Verbal Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'अग्रगामी संगठक या एडवांस ऑर्गेनाइज़र' (Advance Organizer)**—जिसे उस प्रारंभिक परिचयात्मक और उच्च-स्तरीय शैक्षणित सामग्री के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसे मुख्य अधिगम सामग्री को प्रस्तुत करने से ठीक पहले शिक्षार्थियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है ताकि यह नए आने वाले ज्ञान को शिक्षार्थी की संज्ञानात्मक संरचना में पहले से मौजूद प्रासंगिक विचारों (Anchoring Ideas) के साथ जोड़ने के लिए एक वैचारिक पुल का काम कर सके—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्कीमा विकास, ज्ञान के अनुक्रमण और दीर्घकालिक प्रतिधारण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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