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MPTET
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मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) और बाल विकास के विशेष संदर्भ में, रीनू फेउरस्टीन (Reuven Feuerstein) के 'संरचनात्मक संज्ञानात्मक मूकता और मध्यस्थता अधिगम सिद्धांत' (Theory of Mediated Learning Experience - MLE) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'मध्यस्थता का अनुभव या मीडिएटेड लर्निंग एक्सपीरियंस' (Mediated Learning Experience - MLE)**—जिसे उस विशिष्ट शैक्षणिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत एक वयस्क या शिक्षक (मध्यस्थ) शिक्षार्थी और पर्यावरण के बीच एक फिल्टर या ट्रांसमीटर के रूप में कार्य करता है, जो उद्दीपनों को चयन करके, उन्हें अर्थपूर्ण बनाकर और बालक की संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive Modifiability) को विकसित करते हुए उसे स्वतंत्र रूप से सीखने योग्य बनाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक लचीलेपन, उच्च-क्रम चिंतन कौशल (HOTS) और सांस्कृतिक संचरण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
रीनू फेउरस्टीन (Reuven Feuerstein) का 'मध्यस्थता अधिगम अनुभव' (MLE) सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि बच्चे का विकास केवल पर्यावरण के सीधे संपर्क से नहीं होता, बल्कि एक 'मध्यस्थ' (शिक्षक या अभिभावक) की उपस्थिति और मार्गदर्शन से होता है जो उद्दीपनों को अर्थपूर्ण बनाता है। 'संरचनात्मक संज्ञानात्मक मूकता या परिवर्तनीयता' (Structural Cognitive Modifiability) फेउरस्टीन के सिद्धांत का मूल आधार है, जिसके अनुसार मनुष्य की बौद्धिक क्षमताएं स्थिर नहीं होतीं, बल्कि उचित मध्यस्थता के द्वारा उन्हें विकसित और परिवर्तित किया जा सकता है। विकल्प (c) इस मनोवैज्ञानिक अवधारणा के वैज्ञानिक निहितार्थ को पूरी तरह स्पष्ट करता है।
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