मापन, मूल्यांकन एवं परीक्षण: अवधारणा
Asked 2 महीने पहले · Viewed 3,889 times
शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 29 के अंतर्गत संस्तुत 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) के संदर्भ में 'आकलन' (Assessment) और 'मूल्यांकन' (Evaluation) के तात्विक और क्रियात्मक भेदों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन दोनों अवधारणाओं के बीच के अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट करता है?
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Detailed Explanation
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) प्रणाली में 'आकलन' (Assessment) और 'मूल्यांकन' (Evaluation) दोनों भिन्न लेकिन परस्पर पूरक अवधारणाएँ हैं। आकलन एक सतत प्रक्रिया है जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की कमियों को पहचानना (नैदानिक) और उनके अधिगम में सुधार के लिए रचनात्मक प्रतिपुष्टि (Formative Feedback) देना है। इसके विपरीत, मूल्यांकन (मूल्य का अंकन) एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें एकत्रित साक्ष्यों और आँकड़ों के आधार पर किसी छात्र की संपूर्ण शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक प्रगति का निर्णयात्मक मूल्य निर्धारण, श्रेणीकरण (Grading) या प्रमाणन किया जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के संस्तुतियों और निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की धारा 29(2) के प्रावधानों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र को बढ़ावा देते हुए बच्चों के ज्ञान को उनके बाहरी जीवन से जोड़ता है, परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाता है और संरागात्मक एवं संज्ञानात्मक विकास हेतु 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) को अनिवार्य रूप से लागू करता है, तो इन दोनों वैधानिक एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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