लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) की आलोचना करते हुए कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के नैतिक विकास के अनुभवों पर आधारित है और यह महिलाओं के दृष्टिकोण की उपेक्षा करता है। गिलिगन के 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) के परिप्रेक्ष्य और कोहलबर्ग के उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-conventional Level) के मध्य के तात्विक अंतर का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस वैचारिक द्वंद्व की सबसे सटीक वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की प्रमुख आलोचकों में से एक कैरल गिलिगन थीं। गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के शोध में केवल पुरुषों और लड़कों को शामिल किया गया था, जिसके कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक केंद्रित हो गया। इसके विपरीत, गिलिगन ने 'देखभाल की नैतिकता' (Ethics of Care) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार महिलाओं और लड़कियों का नैतिक विकास न्याय और अमूर्त नियमों की बजाय मानवीय संबंधों, देखभाल, करुणा, सहानुभूति और अंतःवैयक्तिक दायित्वों (Interpersonal Responsibilities) पर आधारित होता है। विकल्प 'ए' इस वैचारिक द्वंद्व की सबसे सटीक व्याख्या करता है, क्योंकि यह कोहलबर्ग के न्याय-केंद्रित प्रतिमान और गिलिगन के संबंध-केंद्रित नैतिक परिप्रेक्ष्य के बीच के मूल अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। बाल विकास मनोविज्ञान में यह दृष्टिकोण लैंगिक समाजीकरण और नैतिक निर्णय लेने की विविध शैलियों को समझने में अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कोहलबर्ग का प्रतिमान: न्याय, मानवाधिकार, सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत और अमूर्त तार्किक नियमों पर आधारित है।
- गिलिगन का परिप्रेक्ष्य: देखभाल की नैतिकता, परस्पर निर्भरता, मानवीय संबंधों और दायित्वों को प्राथमिकता देती है।
- विकल्प 'बी' का विश्लेषण: गलत है क्योंकि गिलिगन ने बाह्य पुरस्कार और दंड की बात नहीं की, बल्कि उन्होंने महिलाओं के उच्च स्तरीय सामाजिक-संवेगात्मक नैतिक तर्कों को उभारा।
- विकल्प 'सी' का विश्लेषण: विपरीत है; कोहलबर्ग का सिद्धांत मुख्य रूप से संज्ञानात्मक संरचनाओं और तार्किकता पर आधारित है, न कि केवल भावनाओं पर।
- विकल्प 'डी' का विश्लेषण: पूरी तरह भ्रामक और असत्य है क्योंकि गिलिगन ने महिलाओं की नैतिक असमर्थता नहीं, बल्कि उनकी भिन्न और अनूठी नैतिक शैली का समर्थन किया।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र (CDP) में नैतिक विकास के विभिन्न आयामों को समझने के लिए कोहलबर्ग का सिद्धांत तथा समावेशी शिक्षा के अंतर्गत लैंगिक संवेदनशीलता (Gender Sensitivity) का अध्ययन करना आवश्यक है। कैरल गिलिगन ने यह साबित किया कि नैतिक विकास का कोई एकल सार्वभौमिक मानक नहीं होता है, बल्कि सामाजिक सांस्कृतिक और लैंगिक अनुभव इसमें निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET पेपर 1 और पेपर 2) में कैरल गिलिगन और लॉरेंस कोहलबर्ग के बीच के वैचारिक मतभेद पर आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि गिलिगन ने कोहलबर्ग के चरणों को पूरी तरह खारिज नहीं किया, बल्कि उनके दायरे की सीमा (Gender Bias) को उजागर किया। कक्षा-कक्ष शिक्षण के दौरान अध्यापकों को बालकों और बालिकाओं दोनों के दृष्टिकोण का सम्मान करना चाहिए तथा न्याय के साथ-साथ देखभाल और सहानुभूति की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। इस प्रकार के विश्लेषणात्मक प्रश्न वैचारिक स्पष्टता की परीक्षा लेते हैं, जिससे शिक्षकों को बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ प्राप्त होती है।