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History of India
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दीन-ए-इलाही की स्थापना कब हुई?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अकबर ने 1582 में यह धर्म शुरू किया।
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हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ?
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में पुर्तगालियों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के मध्य भारत में वर्चस्व की स्थापित होड़ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1612 में लड़े गए 'स्वाली के युद्ध' (Battle of Swally) में कैप्टन थॉमस बेस्ट के नेतृत्व में ब्रिटिश नौसेना ने पुर्तगाली बेड़े को निर्णायक रूप से पराजित किया, जिससे मुगल सम्राट जहांगीर अत्यधिक प्रभावित हुआ और अंग्रेजों को सूरत में अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री स्थापित करने का शाही फरमान जारी कर दिया।
2. पुर्तगालियों द्वारा हिंद महासागर में व्यापार पर एकाधिकार बनाए रखने के लिए लागू की गई 'कार्टाज' (Cartaz) प्रणाली के अंतर्गत यह अनिवार्य था कि एशियाई और भारतीय व्यापारी अपनी नौकाओं के लिए पुर्तगाली गवर्नरों से लाइसेंस लें, और अक्साइज शुल्क के साथ-साथ हथियारों के व्यापार पर प्रतिबंध का पालन करें।
3. ब्रिटिश कंपनी को भारत में व्यापारिक रियायतें दिलाने के लिए वर्ष 1615 में सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में उपस्थित हुआ, जिसने सफलतापूर्वक संपूर्ण मुगल साम्राज्य में कहीं भी कारखाने खोलने और बिना किसी अतिरिक्त सीमा शुल्क के आंतरिक व्यापार करने का अधिकार प्राप्त कर लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया तथा वेदों की अचूकता और उनके दिव्य ज्ञान को स्वीकार किया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मध्यकालीन पुराणों तथा पौराणिक अनुष्ठानों को खारिज करते हुए मूर्तिपूजा का खंडन किया।
3. ज्योतिराव फुले ने 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना कर ब्राह्मणवादी वर्चस्व, सामाजिक असमानता और धार्मिक पाखंडों के विरुद्ध आवाज उठाई तथा शूद्रों एवं अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त के अंतर्गत लॉर्ड कार्नवालिस ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा में भूमि का मालिकाना हक जमींदारों को सौंप दिया, जिससे किसानों की स्थिति मात्र किरायेदारों (Tenants) तक सीमित हो गई और जमींदारों द्वारा समय पर लगान न चुकाए जाने पर उनकी संपदा को नीलाम करने के लिए 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया गया था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा विकसित रयतवारी व्यवस्था के अंतर्गत मद्रास और बॉम्बे प्रेसीडेंसी में भूमि का स्वामित्व सीधे किसानों (रयत) के पास था, तथा सरकार और किसानों के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह से स्थाई थीं और कभी भी संशोधित नहीं की जाती थीं।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा प्रतिपादित महालवारी व्यवस्था के उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में लागू की गई, जिसके अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान के स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या ग्राम समुदाय (महाल) के स्तर पर किया जाता था, और इसके भुगतान के लिए पूरा गाँव सामूहिक रूप से उत्तरदायी था।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों में से ब्रिटिश भारत के सबसे बड़े भू-भाग पर 'स्थाई बंदोबस्त' लागू किया गया था, जबकि रयतवारी व्यवस्था का विस्तार सबसे कम क्षेत्रफल पर था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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