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संज्ञानात्मक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 2,067 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) की तात्विक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमता इस चरण के दौरान बच्चों में विकसित नहीं होती है, बल्कि इसके लिए उन्हें अगली यानी 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' की आवश्यकता होती है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था' (7 से 11 वर्ष) में बच्चे ठोस या मूर्त वस्तुओं और घटनाओं पर तार्किक रूप से विचार करना शुरू कर देते हैं। इस चरण के दौरान वे संरक्षण (Conservation), वर्गीकरण (Classification), क्रमबद्धता (Seriation) और प्रतिवर्तीता (Reversibility) जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं को भली-भांति सीख जाते हैं। हालांकि, वे अभी भी अमूर्त विचारों, काल्पनिक परिस्थितियों या सैद्धांतिक समस्याओं से जूझने में असमर्थ होते हैं। विकल्प (c) में उल्लिखित 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन' (Hypothetico-deductive reasoning) और अमूर्त तर्क का विकास इस अवस्था में नहीं होता है, बल्कि यह पियाजे की अंतिम अवस्था यानी 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' (11 वर्ष से आगे) की मुख्य विशेषता है। इसलिए विकल्प (c) इस प्रश्न के लिए सही उत्तर है क्योंकि यह इस चरण की विशेषता नहीं है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (7-11 वर्ष) में बच्चे विकेंद्रीकरण (Decentration) और संरक्षण के नियम को भली-भांति समझ लेते हैं।
  • विकल्प (a) क्रमबद्धता, (b) संरक्षण, और (d) प्रतिवर्तीता तीनों ही मूर्त-संक्रियात्मक चरण की प्रमुख विशेषताएं हैं।
  • परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक चिंतन और वैज्ञानिक पद्धति से सोचना केवल औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) में ही संभव होता है।
  • बाल विकास परीक्षाओं जैसे CTET, UPTET और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में पियाजे के चरणों से जुड़े अनुप्रयोग आधारित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बच्चों के मानसिक विकास को चार चरणों में विभाजित करता है, जिसमें संवेदी-गामक, पूर्व-संक्रियात्मक, मूर्त-संक्रियात्मक और औपचारिक-संक्रियात्मक चरण शामिल हैं। अधिक जानने के लिए पढ़ें जीन पियाजे का सिद्धांत और बाल मनोविज्ञान के विभिन्न पहलू।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET पेपर 1 और पेपर 2) में पियाजे के चरणों की विशेषताओं से जुड़े प्रश्न बहुत सूक्ष्मता से पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मूर्त अवस्था में बच्चे केवल उन्हीं तर्कों को समझ सकते हैं जिन्हें वे छू या देख सकते हैं (मूर्त वास्तविकता)। जब बात अमूर्त परिकल्पनाओं, जैसे कि 'यदि x, y है तो z क्या होगा' जैसे प्रतीकात्मक और तार्किक समीकरणों की आती है, तो छात्र औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था में प्रवेश कर चुके होते हैं। इस प्रकार के विभेदकारी प्रश्नों को हल करते समय विकल्पों के तकनीकी शब्दों जैसे 'Reversibility' और 'Hypothetico-deductive reasoning' पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage, लगभग 11 वर्ष से आगे) की तात्विक विशेषताओं का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी प्रमुख संज्ञानात्मक क्षमता इस चरण की सबसे मौलिक और निर्णायक विशेषता को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करती है? → लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'निजी वाक्' (Private Speech) और 'आंतरिक वाक्' (Inner Speech) की अवधारणाओं तथा बच्चों के संज्ञानात्मक विकास में इनकी भूमिका का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वाइगोत्स्की के दृष्टिकोण को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, जब कोई बच्चा 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करता है, तब उसकी चिंतन प्रक्रिया में कौन-सी प्रमुख तात्विक विशेषता प्रकट होती है जो उसे पिछली 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' से स्पष्ट रूप से अलग करती है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत (Cognitive Development Theory) के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: 11 वर्ष से आगे) का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की प्रमुख विशेषता 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक सटीक एवं वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
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