अधिगम (Learning) के अध्ययन में थार्नडाइक के 'सीखने के प्राथमिक और गौण नियम', 'अधिगम वक्र' (Learning Curves) के विभिन्न प्रकारों—जैसे उत्तल वक्र (Convex Curve), अवतल वक्र (Concave Curve) और एस-आकार का वक्र (S-shaped Curve)—तथा 'अधिगम स्थानांतरण के समवयव सिद्धांत' (Theory of Identical Elements by Thorndike) का गहन मनोवैज्ञानिक और प्रायोगिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों संप्रत्ययों के मध्य पाए जाने वाले तात्विक और अंतर्संबंधित स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
थार्नडाइक के अधिगम सिद्धांतों और अधिगम वक्रों (Learning Curves) के अंतर्गत, 'उत्तल वक्र' (Convex Curve) को 'धनात्मक-त्वरित या ह्रासमान निष्पादन वक्र' (Decreasing Returns Curve) भी कहा जाता है। इस वक्र की मुख्य विशेषता यह होती है कि अधिगम की प्रारंभिक अवस्था में सीखने की गति या निष्पादन बहुत तीव्र होता है (क्योंकि शिक्षार्थी नया होता है और उच्च प्रेरणा या आसान कार्य से जुड़ता है), किंतु ज्यों-ज्यों अभ्यास बढ़ता जाता है, जटिलता, थकान, रुचि में कमी या पठार (Plateau) के कारण प्रगति की दर मंद पड़ने लगती है। यह संकल्पना थार्नडाइक के सीखने के नियमों और मानसिक थकान के प्रभावों को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- उत्तल वक्र (Convex Curve): प्रारंभ में तेज गति, बाद में धीमी गति (ह्रासमान निष्पादन)। विकल्प C इस तथ्य की पूर्ण पुष्टि करता है।
- अवतल वक्र (Concave Curve): इसे 'वर्धमान निष्पादन वक्र' कहते हैं, जहाँ प्रारंभ में अधिगम धीमा और बाद में तीव्र होता है। अतः विकल्प A भ्रामक है क्योंकि यह अभ्यास के नियम की सरल पुनरावृत्ति से अलग है।
- पठार (Plateau): विकल्प B गलत है क्योंकि पठार केवल शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि मानसिक परिपक्वता, प्रेरणा की कमी या गलत शिक्षण विधि के कारण भी होता है।
- द्विपार्श्विक स्थानांतरण: विकल्प D गलत है क्योंकि इसका अधिगम वक्र और अभ्यास की विधियों से गहरा संबंध होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में एडवर्ड एल. थार्नडाइक (E.L. Thorndike) के प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत तथा अधिगम वक्रों का विशेष महत्व है। परीक्षा में अक्सर वक्रों के प्रकार और उनके मनोवैज्ञानिक कारणों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
इस प्रश्न में थार्नडाइक के सिद्धांतों और अधिगम वक्रों के तात्विक संबंध का परीक्षण किया गया है। उत्तल वक्र (Convex Curve) को 'धनात्मक वृद्धि' या 'ह्रासमान वक्र' (Decreasing Returns) इसलिए कहा जाता है क्योंकि जैसे-जैसे कार्य की कठिनाई बढ़ती है या अभ्यास का स्तर स्थिर होता है, सीखने की दर में गिरावट आने लगती है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अधिगम वक्र केवल आंकड़ों का आरेख नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षार्थी की मानसिक स्थिति, थकान, प्रेरणा और विषय-वस्तु की जटिलता के जीवंत मनोवैज्ञानिक दस्तावेज हैं। ऐसे विश्लेषणात्मक प्रश्न आजकल केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, Super TET, BPSC TRE) में व्यापक रूप से पूछे जा रहे हैं, जहाँ अवधारणा की स्पष्टता अनिवार्य होती है।