सिग्मंड फ्रायड द्वारा प्रतिपादित 'मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत' (Psychosexual Development Theory) के अंतर्गत विभिन्न अवस्थाओं—जैसे मुखीय अवस्था (Oral Stage), गुदीय अवस्था (Anal Stage), लैंगिक अवस्था (Phallic Stage), अव्यक्त अवस्था (Latency Stage) और जननेंद्रिय अवस्था (Genital Stage)—का गहन मनोवैज्ञानिक और तात्विक विश्लेषण करने पर, 'लैंगिक अवस्था' के दौरान उत्पन्न होने वाली 'ओडिपस ग्रंथि' (Oedipus Complex) तथा 'इलेक्ट्रा ग्रंथि' (Electra Complex) की संकल्पनाओं और उनके समाधान के रूप में उभरने वाली 'तादात्म्यीकरण' (Identification) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक और सटीक है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के अनुसार, 'लैंगिक अवस्था' (Phallic Stage) लगभग 3 से 6 वर्ष की आयु के बीच होती है। इस अवस्था में बच्चों का मुख्य केंद्र उनकी जननेंद्रण (Genitals) होती है। इसी चरण में बालक 'ओडिपस ग्रंथि' (Oedipus Complex) का अनुभव करते हैं, जिसमें वे अपनी माता के प्रति कामुक आकर्षण महसूस करते हैं और पिता को अपना प्रतिद्वंद्वी या बाधक मानते हैं। इसके विपरीत, बालिकाओं में 'इलेक्ट्रा ग्रंथि' (Electra Complex) पाई जाती है, जिसके तहत वे अपने पिता के प्रति गहरा आकर्षण महसूस करती हैं और माता को अपनी प्रतिद्वंद्वी मानती हैं। इस मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और भय (जैसे बालकों में कैस्ट्रोफ फोबिया) से उबरने के लिए बच्चे उसी लिंग के माता-पिता के साथ खुद को जोड़ते हैं, जिसे 'तादात्म्यीकरण' (Identification) कहा जाता है। इसके माध्यम से वे अपने उसी लिंग के माता-पिता के मूल्यों, आदर्शों और व्यवहारों को आत्मसात कर लेते हैं, जिससे इस ग्रंथि का समाधान होता है। अतः विकल्प (ए) पूरी तरह से सटीक और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- ओडिपस ग्रंथि (Oedipus Complex): यह लड़कों में पाई जाने वाली प्रवृत्ति है जिसमें माता के प्रति प्रेम और पिता के प्रति ईर्ष्या/प्रतिद्वंद्विता होती है।
- इलेक्ट्रा ग्रंथि (Electra Complex): यह लड़कियों में पाई जाने वाली प्रवृत्ति है जिसमें पिता के प्रति प्रेम और माता के प्रति प्रतिद्वंद्विता होती है।
- तादात्म्यीकरण (Identification): फ्रायड के अनुसार, इस द्वंद्व को सुलझाने का तरीका यह है कि बालक अपने पिता (समान लिंगी) और बालिका अपनी माता (समान लिंगी) के व्यवहार और गुणों को अपना लेती है।
- विकल्प विश्लेषण: विकल्प (बी) विपरीत लिंगी तादात्म्य कहता है जो गलत है; विकल्प (सी) और (डी) अवस्थाओं के काल और लक्षणों का गलत वर्णन करते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: सिग्मंड फ्रायड का मनोविश्लेषणवाद (Psychoanalysis) व्यक्तित्व विकास में अचेतन मन और बाल्यावस्था के अनुभवों के प्रभाव को रेखांकित करता है। अधिक जानने के लिए पढ़ें सिग्मंड फ्रायड का मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत और बाल विकास के अन्य मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में फ्रायड के चरणों से जुड़े प्रश्न अक्सर भ्रमित करने वाले होते हैं। परीक्षा में यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ओडिपस और इलेक्ट्रा दोनों ग्रंथियां केवल और केवल 'लैंगिक अवस्था' (Phallic Stage) से जुड़ी हैं। इनके समाधान के लिए बच्चे विरोधी लिंग के बजाय अपने समलैंगिक माता-पिता के साथ तादात्म्य (Identification) स्थापित करते हैं। इस संकल्पना को समझकर अभ्यर्थी परीक्षा में इस प्रकार के कठिन बहुविकल्पीय प्रश्नों को आसानी से हल कर सकते हैं।