सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत के अंतर्गत 'अव्यक्त अवस्था' (Latency Stage) जो लगभग 6 वर्ष की आयु से यौवनारंभ तक चलती है, के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास के सिद्धांत (Theory of Psychosexual Development) के अनुसार, 'अव्यक्त अवस्था' या 'सुषुप्त अवस्था' (Latency Stage) लगभग 6 वर्ष की आयु से यौवनारंभ (Puberty) तक चलती है। इस अवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इसमें कामेच्छा (Libido) शांत या सुषुप्त हो जाती है। बालक अपनी ऊर्जा और कामेच्छा का दमन (Repression) करके उसे सामाजिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रस्थापित (Sublimation) कर देता है। इस काल में बच्चा स्कूल जाने लगता है, खेलकूद में भाग लेता है, बौद्धिक कौशल विकसित करता है और समलिंगी मित्रों के साथ सामाजिक संबंध बनाता है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सत्य एवं वैज्ञानिक है क्योंकि यह इस अवस्था की मुख्य मनोवैज्ञानिक विशेषताओं को सटीक रूप से परिभाषित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- फ्रायड के अनुसार मनो-लैंगिक विकास की पांच अवस्थाएं हैं: मौखिक (Oral), गुदीय (Anal), लैंगिक (Phallic), अव्यक्त (Latency), और जननेंद्रिय (Genital)।
- अव्यक्त अवस्था में कोई नया कामुक क्षेत्र (Erogenous Zone) सक्रिय नहीं होता, बल्कि यह पिछले संघर्षों के शमन का काल है।
- विकल्प (a) और (d) क्रमशः लैंगिक और जननेंद्रिय अवस्थाओं का वर्णन करते हैं, जबकि विकल्प (c) फालिक अवस्था से संबंधित ओडिपस और इलेक्ट्रा ग्रंथि की बात करता है।
- सुब्लीमेशन (Sublimation) या उदात्तीकरण एक महत्वपूर्ण रक्षा तंत्र (Defense Mechanism) है जो इस अवस्था में प्रमुख रूप से दिखाई देता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मनोविश्लेषणवाद के जनक सिग्मंड फ्रायड ने बाल विकास में अचेतन मन और कामेच्छा के प्रभाव को महत्वपूर्ण माना है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन हेतु देखें सिग्मंड फ्रायड का मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत एवं बाल विकास के विभिन्न आयाम।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास की अवस्थाओं से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं। 'अव्यक्त अवस्था' (Latency Stage) स्कूल जाने की उम्र (6 से 12 वर्ष) से मेल खाती है, जहाँ बच्चे का ध्यान पढ़ाई, खेल और सामाजिक समाजीकरण पर केंद्रित होता है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस चरण में कोई नया कामुक विकास नहीं होता, बल्कि ऊर्जा का मार्गान्तरण (Redirecting energy) होता है। ऐसे वैचारिक प्रश्नों को हल करने के लिए डिफेंस मैकेनिज्म और विकासात्मक चरणों की काल-अवधि को अच्छी तरह याद रखना आवश्यक है।