प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के जनक जॉन डीवी (John Dewey) द्वारा प्रतिपादित 'प्रोजेक्ट विधि' (Project Method) और 'विद्यालय एक समाज है' (School is a society) के दार्शनिक आधार का गहन शिक्षण-शास्त्रीय विश्लेषण करने पर, पारंपरिक शिक्षा प्रणाली की तुलना में प्रगतिशील कक्षा-कक्ष की वास्तविक प्रकृति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के प्रणेता जॉन डीवी (John Dewey) ने शिक्षा को जीवन की एक अनिवार्य प्रक्रिया माना है। उनके प्रसिद्ध कथन 'शिक्षा भविष्य की तैयारी नहीं, बल्कि स्वयं जीवन है' (Education is not preparation for life, life itself) पर आधारित प्रगतिशील कक्षा-कक्ष बाल-केंद्रित होते हैं। यहाँ छात्र निष्क्रिय श्रोता नहीं बल्कि सक्रिय अन्वेषक होते हैं। 'करके सीखना' (Learning by Doing) और 'प्रोजेक्ट विधि' (Project Method) इस शिक्षा प्रणाली की आत्मा हैं, जो बच्चों में लोकतांत्रिक मूल्यों, समस्या समाधान कौशल और सामाजिक सहभागिता का विकास करती है। विकल्प 'c' इस दर्शन का सबसे सटीक और प्रामाणिक वर्णन करता है क्योंकि यह कक्षा को एक लोकतांत्रिक प्रयोगशाला के रूप में देखने पर जोर देता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- जॉन डीवी ने शिकागो में अपनी प्रयोगशाला स्कूल की स्थापना की थी जहाँ प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा दिया गया।
- विकल्प a गलत है क्योंकि प्रगतिशील शिक्षा कभी भी शिक्षक-केंद्रित नहीं बल्कि बाल-केंद्रित होती है।
- विकल्प b रटने की प्रवृत्ति (Rote Learning) का समर्थन करता है, जबकि प्रगतिशील शिक्षा समझ और करके सीखने पर बल देती है।
- विकल्प d कठोर अनुशासन और बाह्य नियंत्रण की बात करता है, जबकि प्रगतिशील शिक्षा स्व-अनुशासन (Self-discipline) और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की वकालत करती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जॉन डीवी का प्रगतिशील शिक्षा और प्रयोजनवाद (Pragmatism) का सिद्धांत आधुनिक बाल विकास और शिक्षाशास्त्र का आधार स्तंभ है। अधिक जानकारी के लिए प्रगतिशील शिक्षा एवं जॉन डीवी के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET) में जॉन डीवी, जीन पियाजे और लेव वाइगोत्स्की के विचारों पर आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। प्रगतिशील कक्षा-कक्ष की पहचान लचीली पाठ्यचर्या, सहयोगात्मक अधिगम (Collaborative Learning), और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) से होती है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रगतिशील शिक्षा पारंपरिक शिक्षा के उस ढांचे को खारिज करती है जहाँ ज्ञान को ऊपर से थोपा जाता है। इसके विपरीत, यह छात्रों के पूर्व अनुभवों, जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।