प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के मूल दर्शन के अंतर्गत कार्ल रोजर्स और जॉन डीवी द्वारा प्रतिपादित 'छात्र-केंद्रित शिक्षा' (Student-Centered Education) तथा 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) के सिद्धांतों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन कक्षा-कक्षीय परिवेश में इन शैक्षिक सुधारों के सबसे मौलिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक उद्देश्य को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) जॉन डीवी और कार्ल रोजर्स जैसे महान शिक्षाविदों के विचारों पर आधारित एक ऐसी क्रांतिकारी शैक्षिक विचारधारा है जो यह मानती है कि शिक्षा केवल तथ्यों को रटने या बाह्य रूप से थोपने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बालक के आंतरिक अनुभवों, क्षमताओं और वैयक्तिक विविधताओं का पूर्ण विकास है। इस दृष्टिकोण के अंतर्गत 'छात्र-केंद्रित शिक्षा' और 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) का मुख्य उद्देश्य शिक्षार्थी को एक निष्क्रिय श्रोता के रूप में देखने के बजाय उसे ज्ञान के सक्रिय निर्माता (Active Constructor of Knowledge) के रूप में स्थापित करना है। जॉन डीवी के अनुसार, शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं बल्कि स्वयं जीवन है, और विद्यालय एक ऐसा लोकतांत्रिक समाज है जहाँ बालक सहयोगात्मक रूप से सीखते हैं। कार्ल रोजर्स ने अनुभवात्मक अधिगम पर बल देते हुए यह स्पष्ट किया कि सार्थक अधिगम तब होता है जब छात्र अपनी जिज्ञासा, स्वायत्तता और व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से स्वयं ज्ञान का अर्जन करते हैं। अतः विकल्प (c) इस दर्शन के मनोवैज्ञानिक, व्यावहारिक और लोकतांत्रिक उद्देश्यों को पूर्णतः रेखांकित करता है, जहाँ आलोचनात्मक चिंतन और वैयक्तिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- सक्रिय अधिगमकर्ता: प्रगतिशील शिक्षा में छात्र अपनी कक्षा के केंद्र में होते हैं और शिक्षक एक मार्गदर्शक (Facilitator) की भूमिका निभाता है।
- लोकतांत्रिक मूल्य: यह कक्षा में स्वतंत्रता, सहयोग, सहिष्णुता और सहभागिता जैसे मूल्यों को बढ़ावा देती है।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: यह पारंपरिक शिक्षा (Traditional Education) या अधिनायकवादी शिक्षण प्रणाली की विशेषता है, जो प्रगतिशील शिक्षा के बिल्कुल विपरीत है।
- विकल्प (b) का विश्लेषण: मानकीकृत पाठ्यचर्या और कठोर अनुशासन व्यवहारवाद के अति-रूढ़िवादी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जबकि प्रगतिशील शिक्षा लचीलेपन और अनुभव पर जोर देती है।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: रटकर सीखना (Rote Memorization) और केवल परीक्षाओं में अंक लाना बाल-केंद्रित शिक्षा के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: प्रगतिशील शिक्षा और अनुभवात्मक अधिगम का यह सिद्धांत जॉन डीवी के प्रगतिशील शिक्षा सिद्धांत तथा आधुनिक बाल-विकास मनोविज्ञान की उन अवधारणाओं पर आधारित है जो संज्ञानवाद और रचनावाद को सर्वोपरि मानती हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में प्रगतिशील शिक्षा, जॉन डीवी और कार्ल रोजर्स से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों को हल करते समय छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि आधुनिक शिक्षाशास्त्र हमेशा 'बाल-केंद्रित' (Child-Centered), 'समावेशी' (Inclusive) और 'रचनावादी' (Constructivist) दृष्टिकोण का समर्थन करता है। शिक्षक की भूमिका ज्ञान थोपने वाले की नहीं, बल्कि एक सुगमकर्ता (Facilitator) की होती है जो छात्रों को अन्वेषण और समस्या-समाधान के लिए प्रेरित करता है। परीक्षा में 'निष्क्रिय', 'रटना', 'कठोर अनुशासन' और 'मानकीकृत परीक्षा' जैसे नकारात्मक शब्द यदि किसी विकल्प में हों, तो वे अमूमन गलत होते हैं, जबकि 'सक्रिय', 'अनुभव', 'आलोचनात्मक चिंतन' और 'लोकतांत्रिक मूल्य' जैसे सकारात्मक शब्द सही उत्तर की ओर संकेत करते हैं।