थार्नडाइक के 'प्रयत्न एवं भूल सिद्धांत' (Trial and Error Theory), पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning) तथा स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning) के अधिगम संबंधी मूलभूत प्रक्रमों का तुलनात्मक और सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों सिद्धांतों के मध्य पाए जाने वाले उद्दीपक-अनुक्रिया (S-R) और अनुक्रिया-उद्दीपकों (R-S) के संदर्भात्मक अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
थार्नडाइक का 'प्रयत्न एवं भूल सिद्धांत' तथा पावलव का 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' दोनों ही उद्दीपक-अनुक्रिया (Stimulus-Response या S-R) प्रतिमान पर आधारित हैं। इसमें उद्दीपक (Stimulus) पहले आता है जो प्राणी से एक विशिष्ट अनुक्रिया (Response) को उत्पन्न करवाता है (जैसे- पावलव के प्रयोग में घंटी का बजना या भोजन का आना)। इसके विपरीत, बी.एफ. स्किनर का 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning) अनुक्रिया-उद्दीपकों (Response-Stimulus या R-S) या परिणाम-केंद्रित (Consequence-based) प्रतिमान पर कार्य करता है। स्किनर के अनुसार, प्राणी अपनी इच्छा से सक्रिय रूप से क्रिया (Operant Response) करता है और उसके बाद मिलने वाला परिणाम या पुनर्बलन (Reinforcement) उस क्रिया की पुनरावृत्ति की संभावना को निर्धारित करता है। इसलिए विकल्प (b) इन तीनों सिद्धांतों के मध्य पाए जाने वाले S-R और R-S के संदर्भात्मक अंतर को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- S-R थ्योरी: थार्नडाइक (Trial and Error) और पावलव (Classical Conditioning) उद्दीपक की प्रधानता वाले मॉडल हैं जहाँ उद्दीपक अनुक्रिया को नियंत्रित करता है।
- R-S थ्योरी: स्किनर (Operant Conditioning) अनुक्रिया की प्रधानता वाला मॉडल है जहाँ स्वैच्छिक व्यवहार (Operant) परिणामों द्वारा नियंत्रित होता है।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि थार्नडाइक का सिद्धांत सूझ पर नहीं बल्कि यांत्रिक अभ्यास पर आधारित है (कोहलर का सिद्धांत सूझ पर आधारित है)।
- विकल्प (c) गलत है क्योंकि थार्नडाइक ने पुनर्बलन (Law of Effect के रूप में संतोषजनक परिणाम) को महत्वपूर्ण माना है, न कि नकारा है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि पावलव का सिद्धांत शास्त्रीय अनुबंधन से संबंधित है, न कि सीधे संज्ञानात्मक विकास से।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा मनोविज्ञान में अधिगम के व्यवहारवादी (Behaviorism) संप्रदाय के अंतर्गत थार्नडाइक, पावलव और स्किनर के सिद्धांत आते हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि पर्यावरण और उत्तेजनाओं का बालक के व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम के सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB, और BPSC TRE) में व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिकों के तुलनात्मक प्रश्नों को बार-बार पूछा जाता है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि S-R प्रतिमान अनुक्रिया को बाह्य उद्दीपक द्वारा नियंत्रित मानता है, जबकि R-S प्रतिमान (स्किनर) में जीव सक्रिय रूप से पर्यावरण में ऑपरेट करता है और उसके परिणाम (Rewards/Punishments) उसके सीखने की दिशा तय करते हैं। कक्षा शिक्षण में सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) का प्रयोग स्किनर के सिद्धांत पर आधारित है, जबकि अभ्यास और पुनरावृत्ति (Drill and Practice) थार्नडाइक के नियमों से जुड़ी है।