गिलफोर्ड (J.P. Guilford) के त्रि-आयामी बुद्धि सिद्धांत (Structure of Intellect Model) के अंतर्गत मानसिक योग्यताओं को 'संक्रिया' (Operations), 'सामग्री' (Contents) और 'उत्पाद' (Products) के आयामों में वर्गीकृत किया गया है। यदि इस मॉडल के अंतर्गत कुल कारकों (Factors) की प्रारंभिक एवं अंतिम रूप से विकसित संख्या का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाए, तथा 'उत्पाद' श्रेणी के अंतर्गत आने वाले घटकों (जैसे- इकाइयाँ, वर्ग, संबंध, प्रणालियाँ, रूपांतरण और निहितार्थ) की प्रकृति को देखा जाए, तो निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प गिलफोर्ड के इस सिद्धांत और उसके घटकों की सही एवं प्रामाणिक व्याख्या करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित बुद्धि का त्रि-आयामी सिद्धांत (Structure of Intellect - SOI Model) बुद्धि के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस सिद्धांत के अनुसार, मानव बुद्धि को किसी एक सामान्य कारक के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह मानसिक योग्यताओं का एक जटिल जाल है। गिलफोर्ड ने बुद्धि को तीन स्वतंत्र आयामों में विभाजित किया है: पहला आयाम 'संक्रिया' (Operations) है जिसके अंतर्गत व्यक्ति सूचनाओं को ग्रहण करने और प्रसंस्कृत करने के कार्य करता है, दूसरा आयाम 'सामग्री' (Contents) है जिस पर संक्रियाएं लागू होती हैं, तथा तीसरा आयाम 'उत्पाद' (Products) है जो संक्रियाओं के परिणामस्वरूप प्राप्त होने वाले संज्ञानात्मक परिणामों को दर्शाता है। मूल रूप से इस मॉडल में 5 × 4 × 6 = 120 कारक थे। आगे के शोधों और संशोधनों के माध्यम से 'सामग्री' और 'संक्रिया' श्रेणियों का विस्तार किया गया, जिससे कारकों की संख्या पहले 150 और अंततः 180 हो गई। उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत छह घटक शामिल हैं: इकाइयाँ (Units), वर्ग (Classes), संबंध (Relations), प्रणालियाँ (Systems), रूपांतरण (Transformations), और निहितार्थ (Implications), जिसमें 'निहितार्थ' सबसे उन्नत और जटिल संज्ञानात्मक परिणाम माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कारकों का क्रमिक विकास: गिलफोर्ड के मॉडल में प्रारंभिक कारकों की संख्या 120 थी, जिसे संशोधित कर 150 किया गया और बाद में 'निहितार्थ' के उप-विभाजनों के कारण यह संख्या बढ़कर 180 हो गई।
- उत्पाद आयाम के घटक: उत्पाद श्रेणी में इकाइयाँ, वर्ग, संबंध, प्रणालियाँ, रूपांतरण और निहितार्थ आते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि संसाधित सूचना किस रूप में प्रस्तुत होती है।
- विकल्प 'b' का विश्लेषण: यह कथन पूर्णतः असत्य है क्योंकि गिलफोर्ड का मॉडल त्रि-आयामी (3D) है, द्वि-कारक नहीं।
- विकल्प 'c' का विश्लेषण: कारकों की संख्या स्थिर नहीं रही है बल्कि समय के साथ 120 से बढ़कर 180 हुई है और उत्पाद श्रेणी में केवल दो नहीं बल्कि छह घटक शामिल हैं।
- विकल्प 'd' का विश्लेषण: यह स्पीयरमैन के सिद्धांत से संबंधित नहीं है और इसमें 'सामग्री' आयाम को हटाया नहीं गया है, बल्कि यह इसका एक अनिवार्य हिस्सा है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बुद्धि के संरचनात्मक मॉडलों में गिलफोर्ड का सिद्धांत बहुआयामी दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। परीक्षा की दृष्टि से इसके आयामों और उनके उप-घटकों का गहन अध्ययन करना आवश्यक होता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें बुद्धि के सिद्धांत और वर्गीकरण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:ः
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB और BPSC TRE) में बुद्धि के बहुआयामी सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न अक्सर सीधे तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों रूपों में पूछे जाते हैं। गिलफोर्ड के SOI मॉडल से जुड़े प्रश्नों में अक्सर छात्रों को 120, 150 और 180 के आंकड़ों और उनके तीन आयामों (संक्रिया, सामग्री, उत्पाद) के बीच उलझाने का प्रयास किया जाता है। यहाँ यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि 'उत्पाद' के अंतर्गत 'निहितार्थ' (Implications) सबसे जटिल संज्ञानात्मक स्तर को दर्शाता है क्योंकि यह भविष्य के परिणामों या पूर्वानुमानों से जुड़ा होता है। अध्यापन के दौरान शिक्षकों को बालकों की सृजनात्मकता और divergent thinking (अपसारी चिंतन) को बढ़ावा देने के लिए गिलफोर्ड के इन मॉडलों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को समझना चाहिए, क्योंकि गिलफोर्ड को सृजनात्मकता अध्ययन का भी प्रणेता माना जाता है।