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जीन पियाजे
Asked 2 महीने पहले · Viewed 4,765 times
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणाएं बालकों में मुख्य रूप से किस विकासात्मक अवस्था के दौरान प्रकट होती हैं, और यह उनकी किस संज्ञानात्मक सीमा के समाप्त होने का संकेत देती हैं?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमताएं मुख्य रूप से मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage, 7 से 11 वर्ष) के दौरान विकसित होती हैं। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था में बालकों में 'केंद्रीयकरण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है, जिसके कारण वे किसी वस्तु या स्थिति के केवल एक ही आयाम (जैसे- लंबाई या ऊँचाई) पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और अन्य पहलुओं की उपेक्षा करते हैं। मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में प्रवेश करते ही बालक इस सीमा को पार कर लेते हैं। वे वस्तु के एक से अधिक आयामों (लंबाई और चौड़ाई दोनों) पर एक साथ ध्यान केंद्रित करने (विकेंद्रीकरण) और यह समझने में सक्षम हो जाते हैं कि किसी वस्तु के रूप, आकार या दिखावे में परिवर्तन होने पर भी उसका द्रव्यमान, आयतन या मात्रा अपरिवर्तित (संरक्षण) रहती है। अतः विकल्प (b) इस संकल्पना का सबसे सटीक और वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • मूर्त संक्रियात्मक अवस्था: यह अवस्था 7 से 11 वर्ष तक चलती है, जिसमें तार्किक चिंतन का आधार मूर्त वस्तुएं होती हैं।
  • विकेंद्रीकरण (Decentration): केंद्रीयकरण की सीमा का अंत, जिससे बालक किसी समस्या के कई पहलुओं पर विचार कर पाता है।
  • संरक्षण (Conservation): यह समझना कि पदार्थ का भौतिक स्वरूप बदलने पर भी उसकी मात्रा या गुण संरक्षित रहते हैं।
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण: विकल्प (a) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था से संबंधित है जहाँ केंद्रीयकरण होता है, संरक्षण नहीं; विकल्प (c) और (d) क्रमशः अमूर्त चिंतन और वस्तु स्थायित्व से जुड़े हैं।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत बाल मनोविज्ञान का एक केंद्रीय स्तंभ है, जो यह स्पष्ट करता है कि बच्चे अपनी आयु और अनुभव के साथ पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करके ज्ञान का निर्माण कैसे करते हैं। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत पढ़ें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और BPSC TRE) में पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाओं और उनकी विशिष्ट विशेषताओं (जैसे वस्तु स्थायित्व, केंद्रीयकरण, विकेंद्रीकरण, संरक्षण और अमूर्त चिंतन) पर आधारित प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 'संरक्षण' की समझ का विकास तभी संभव होता है जब बालक 'केंद्रीयकरण' की मानसिक बाधा को पार कर 'विकेंद्रीकरण' की योग्यता हासिल कर लेता है। कक्षा-कक्ष शिक्षण के दौरान शिक्षकों को ऐसे मूर्त अनुभव और गतिविधियां प्रदान करनी चाहिए जो बच्चों को विभिन्न आयामों को देखने और समझने में मदद करें।

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→ जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु या परिस्थिति के केवल एक ही पहलू, आयाम या विशेषता पर अपना ध्यान केंद्रित करने (केंद्रण/Centration) के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं या आयामों को एक साथ देखने, समझने और मानसिक रूप से समन्वित करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, तार्किक संरक्षण (Conservation) और संज्ञानात्मक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रवेश करने वाले किशोरों में विकसित होने वाली 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thought) की क्षमताओं का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक एवं संज्ञानात्मक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? → पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की किस अवस्था में बालक 'संरक्षण' (Conservation) की अवधारणा समझ जाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' की आयु अवधि क्या है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई बच्चा औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) में प्रवेश करता है, तो उसकी सोच में 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोगीय तर्क' (Combinatorial Reasoning) का विकास होता है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की सबसे मौलिक और वैज्ञानिक विशेषता को रेखांकित करता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) के दौरान बच्चों में पाए जाने वाले 'केंद्रीयकरण' (Centration) और 'अपरिवर्तनीयता' (Irreversibility) के गुणों का सूक्ष्म अध्ययन करने पर, जब बच्चा 'संरक्षण' (Conservation) की क्षमता को और 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) की योग्यता को मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में प्राप्त करता है, तो यह संज्ञानात्मक बदलाव निम्नलिखित में से किस मुख्य मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया को सर्वोत्तम रूप से दर्शाता है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' (Concrete Operational Stage, लगभग 7 से 11 वर्ष) की अवधि में बालकों के संज्ञान में होने वाले प्रमुख गुणात्मक परिवर्तनों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सी विशिष्ट मानसिक क्षमता इस चरण की सबसे मौलिक और निर्णायक विशेषता को दर्शाती है जो इसके पूर्ववर्ती 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' से इसे स्पष्ट रूप से भिन्न करती है? → जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage) में प्रकट होने वाले 'परिकल्पित-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) और 'संयोजनवादी विचार' (Combinatorial Thinking) का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यह अवस्था पूर्ववर्ती 'मूर्त संक्रियात्मक अवस्था' से किस मौलिक विशेषता के आधार पर सबसे अधिक भिन्न होती है?
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