चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के बुद्धि के 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) और उसके पश्चात लुईस थर्स्टन (Louis Thurstone) द्वारा प्रतिपादित 'समूह कारक सिद्धांत' (Group Factor Theory) के मध्य पाए जाने वाले सैद्धांतिक एवं विश्लेषणात्मक अंतर का गहराई से अध्ययन करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन थर्स्टन के 'प्राथमिक मानसिक योग्यताओं' (Primary Mental Abilities) के दृष्टिकोण की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
चार्ल्स स्पीयरमैन ने 1904 में बुद्धि का 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-Factor Theory) प्रतिपादित किया था, जिसके अनुसार बुद्धि दो कारकों से मिलकर बनी होती है: सामान्य कारक (G-Factor) और विशिष्ट कारक (S-Factor)। स्पीयरमैन का मानना था कि हर बौद्धिक गतिविधि में एक सामान्य मानसिक ऊर्जा (G-Factor) की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, लुईस थर्स्टन (Louis Thurstone) ने अपने 'समूह कारक सिद्धांत' (Group Factor Theory) या प्राथमिक मानसिक योग्यताओं के सिद्धांत में स्पीयरमैन के जी-कारक (G-Factor) की अवधारणा को अस्वीकार कर दिया। थर्स्टन ने सांख्यिकीय तकनीक 'फैक्टर एनालिसिस' (Factor Analysis) का उपयोग करते हुए यह सिद्ध किया कि बुद्धि किसी एक सामान्य कारक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह सात या आठ स्वतंत्र प्राथमिक मानसिक योग्यताओं (Primary Mental Abilities - PMAs) जैसे कि शाब्दिक अर्थ, संख्यात्मक क्षमता, स्थानिक संबंध, स्मरण शक्ति आदि का एक समूह या समुच्चय होती है। इसलिए विकल्प (b) इस सिद्धांत की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्पीयरमैन का 'G-कारक' सभी प्रकार के संज्ञानात्मक कार्यों में एक समान रूप से भाग लेने वाली मानसिक ऊर्जा को दर्शाता है।
- थर्स्टन ने 7 मुख्य प्राथमिक मानसिक योग्यताओं की पहचान की, जिन्हें PMA (Primary Mental Abilities) कहा जाता है।
- विकल्प (a) स्पीयरमैन के सिद्धांत का वर्णन करता है, थर्स्टन का नहीं; अतः यह गलत है।
- विकल्प (c) जे.पी. गिलफोर्ड के 'बुद्धि की संरचना मॉडल' (Structure of Intellect Model) का वर्णन करता है, जिसमें 3D बॉक्स (संक्रिया, विषय-वस्तु, उत्पाद) होता है।
- विकल्प (d) बुद्धि की स्थिरता और डेविड वेक्स्लर द्वारा दी गई विचलन बुद्धि लब्धि (Deviation IQ) से संबंधित है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में बुद्धि के कारक सिद्धांतों का विशेष स्थान है। स्पीयरमैन, थर्स्टन और गिलफोर्ड के सिद्धांत संज्ञानात्मक विकास को समझने के लिए आधारशिला प्रदान करते हैं। अधिक जानकारी के लिए जीन पियाजे का सिद्धांत तथा समावेशी शिक्षा के संदर्भों का अध्ययन करें ताकि व्यक्तिगत भिन्नताओं को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, BPSC TRE) में बुद्धि के सिद्धांतों से सीधे तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि स्पीयरमैन ने पदानुक्रमित या एकात्मक रूप से 'G' और 'S' कारक की बात की, जबकि थर्स्टन ने बहु-कारक या समूह कारक के रूप में स्वतंत्र योग्यताओं पर बल दिया। कक्षा शिक्षण के दौरान एक शिक्षक को यह समझना आवश्यक है कि प्रत्येक छात्र की बौद्धिक क्षमताएँ एक समान नहीं होतीं, बल्कि उनमें अलग-अलग प्राथमिक योग्यताओं (जैसे स्थानिक, संख्यात्मक या शाब्दिक) की विविधता पाई जाती है। यही कारण है कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में विभेदित अनुदेशन (Differentiated Instruction) पर जोर दिया जाता है, जो थर्स्टन और गार्डनर जैसे मनोवैज्ञानिकों के बहु-कारकीय दृष्टिकोण से अत्यधिक प्रभावित है।