थार्नडाइक के सीखने के सिद्धांत (Connectionism Theory) और शिक्षा में इसके अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एडवर्ड एल. थार्नडाइक ने अपने इस सिद्धांत का प्रतिपादन भूखी बिल्लियों पर प्रयोग करके 'एनिमल इंटेलिजेंस' (1898) पुस्तक में किया था, जिसे 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory) कहा जाता है।
- 2. थार्नडाइक के मुख्य नियमों में 'तत्परता का नियम' (Law of Readiness), 'अभ्यास का नियम' (Law of Exercise) और 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) शामिल हैं, जिसमें 'प्रभाव का नियम' पुरस्कार और दंड (संतोष और असंतोष) पर आधारित है।
- 3. अभ्यास के नियम को आगे दो उप-भागों में विभाजित किया गया है: 'उपयोग का नियम' (Law of Use) और 'अनुपयोग का नियम' (Law of Disuse), जो यह बताता है कि किसी क्रिया की पुनरावृत्ति से बंध मजबूत होता है और छोड़े जाने पर कमजोर हो जाता है।
- 4. थार्नडाइक का यह सिद्धांत 'अंतर्दृष्टि' (Insight) और सूझबूझ पर अत्यधिक बल देता है, जिसके अनुसार सीखना अचानक होने वाली एक मानसिक प्रक्रिया है न कि क्रमिक या यांत्रिक संबंध।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
एडवर्ड एल. थार्नडाइक (E.L. Thorndike) को आधुनिक शैक्षणिक मनोविज्ञान और पशु मनोविज्ञान के संस्थापकों में गिना जाता है। उन्होंने अपना प्रसिद्ध 'प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत' (Trial and Error Theory / Connectionism Theory) भूखी बिल्लियों पर पहेली बक्से (Puzzle Box) में प्रयोग करके प्रतिपादित किया था। इसे उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'एनिमल इंटेलिजेंस' (1898) में प्रकाशित किया था। इस सिद्धांत के अनुसार, सीखना उद्दीपक और अनुक्रिया (Stimulus-Response or S-R Bond) के बीच संबंध स्थापित होने की एक क्रमिक प्रक्रिया है, जिसमें अचानक होने वाली अंतर्दृष्टि का कोई स्थान नहीं होता। इस प्रकार कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 4 गलत है क्योंकि अंतर्दृष्टि का सिद्धांत कोहलर के गेस्टाल्टवाद से संबंधित है, न कि थार्नडाइक के यांत्रिक संबंधवाद से।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- थार्नडाइक के सीखने के तीन मुख्य नियम हैं: तत्परता का नियम, अभ्यास का नियम (जो उपयोग और अनुपयोग में बंटा है), तथा प्रभाव का नियम जो संतुष्टि और असंतोष पर आधारित है।
- थार्नडाइक ने 5 गौण (Secondary/Subordinate) नियम भी दिए हैं: बहु-अनुक्रिया का नियम, मनोवृत्ति का नियम, आंशिक क्रिया का नियम, आत्मीकरण का नियम और सहचर स्थानांतरण का नियम।
- कथन 4 गलत है क्योंकि थार्नडाइक का सिद्धांत यांत्रिक (Mechanical) और क्रमिक है, जबकि 'अंतर्दृष्टि' (Insight) का सिद्धांत गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिकों (कोहलर, कोफ्का, वर्दीमर) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
- अतः सही विकल्पों का संयोजन 1, 2 और 3 (विकल्प A) है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: थार्नडाइक का संयोजनवाद (Connectionism) शिक्षा में अभ्यास, ड्रिल और रिवार्ड-पनिश्ड आधारित प्रणाली की नींव रखता है। बाल विकास और पेडागोजी के अंतर्गत अधिगम के सिद्धांत को समझने के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET, और MPTET) में थार्नडाइक के नियमों से प्रत्यक्ष और अनुप्रयुक्त (Applied) दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) कक्षा-कक्ष शिक्षण में गृहकार्य, प्रशंसा, पुरस्कार और दंड के प्रावधानों का वैचारिक आधार प्रदान करता है। वहीं, 'अभ्यास का नियम' बार-बार पुनरावृत्ति (Repetition and Drill Work) के माध्यम से स्थायी ज्ञान निर्माण पर जोर देता है। उम्मीदवारों को यह विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि थार्नडाइक का सिद्धांत 'प्रयास और त्रुटि' पर आधारित होने के कारण यांत्रिक है, और इसे गेस्टाल्टवादी अंतर्दृष्टि के साथ भ्रमित नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के विश्लेषणात्मक प्रश्न परीक्षा में नकारात्मक अंकन से बचने और उच्च स्कोर प्राप्त करने में मदद करते हैं।