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शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा चिंतक
Asked एक महीने पहले · Viewed 2,122 times
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और बौद्ध शिक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बौद्ध शिक्षा प्रणाली में अध्ययन की शुरुआत 'प्रवज्या' संस्कार के साथ होती थी, जिसके लिए बालक की न्यूनतम आयु 8 वर्ष निर्धारित थी और यह संस्कार मठ या विहार में प्रवेश के समय होता था।
  2. 2. बौद्ध शिक्षा में उच्च शिक्षा की समाप्ति पर 'उपनायन' संस्कार संपन्न होता था, जिसके पश्चात छात्र को 'भिक्षु' या 'श्रमण' की उपाधि दी जाती थी और वह बौद्ध संघ का पूर्ण सदस्य बन जाता था।
  3. 3. तक्षशिला, नालंदा और वल्लभी प्राचीन भारत के प्रमुख बौद्ध शिक्षा के केंद्र थे, जहाँ वेदों के साथ-साथ चिकित्सा शास्त्र, तर्कशास्त्र, शिल्प और दर्शनशास्त्र की शिक्षा दी जाती थी।
  4. 4. वैदिक शिक्षा प्रणाली की तरह बौद्ध शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से जातिगत कठोरता पर आधारित थी और इसमें शूद्रों व महिलाओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली दो मुख्य धाराओं—वैदिक और बौद्ध शिक्षा—में विभाजित थी। बौद्ध शिक्षा प्रणाली में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 8 वर्ष निर्धारित थी और इस प्रारंभिक संस्कार को 'प्रवज्या' कहा जाता था, जिसके माध्यम से बालक मठ या विहार में प्रवेश करता था। इसके विपरीत, कथन 2 में उल्लिखित 'उपनायन' संस्कार वैदिक शिक्षा प्रणाली से संबंधित है, न कि बौद्ध शिक्षा से। बौद्ध शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा (लगभग 20 वर्ष की आयु के बाद) की समाप्ति पर 'उपसंपदा' संस्कार होता था, जिसके बाद छात्र को 'भिक्षु' या 'श्रमण' की उपाधि मिलती थी। कथन 3 पूरी तरह सही है क्योंकि तक्षशिला, नालंदा और वल्लभी प्राचीन भारत के महान शिक्षा केंद्र थे जहाँ धर्म, दर्शन, चिकित्सा और विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी। कथन 4 गलत है क्योंकि बौद्ध शिक्षा प्रणाली जाति व्यवस्था से मुक्त थी और इसमें शूद्रों तथा महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा के द्वार खुले थे, जो इसे वैदिक शिक्षा से अधिक समावेशी बनाता था। अतः केवल कथन 1 और 3 सत्य हैं।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • प्रवज्या संस्कार: बौद्ध शिक्षा की शुरुआत, न्यूनतम आयु 8 वर्ष, छात्र को 'सामनेर' कहा जाता था।
  • उपसंपदा संस्कार: उच्च शिक्षा की समाप्ति पर (लगभग 20 वर्ष की आयु में) संघ की सदस्यता हेतु संपन्न होने वाला संस्कार।
  • समावेशी दृष्टिकोण: बौद्ध शिक्षा ने जाति, वर्ण और लिंग भेद को नकारा, जो समावेशी शिक्षा के मूल सिद्धांतों का प्राचीन रूप प्रस्तुत करता है।
  • प्रमुख केंद्र: नालंदा, तक्षशिला और वल्लभी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बौद्ध विहार और विश्वविद्यालय थे।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शिक्षा के ऐतिहासिक विकास और सामाजिक संदर्भो के अध्ययन में यह प्रश्न प्राचीन भारतीय शिक्षा दर्शन के तुलनात्मक विश्लेषण को स्पष्ट करता है। शिक्षा मनोविज्ञान और इतिहास में मूल्य आधारित समावेशी परिवेश के लिए समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों को समझना अत्यंत आवश्यक है।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, BPSC TRE) में भारतीय शिक्षा के इतिहास, विभिन्न शैक्षिक संस्कारों (प्रवज्या, उपसंपदा, उपनयन) और प्राचीन शिक्षण संस्थानों से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। उम्मीदवारों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि वैदिक शिक्षा में 'उपनायन' और बौद्ध शिक्षा में 'प्रवज्या' व 'उपसंपदा' संस्कारों का क्या महत्व है। इसके साथ ही, बौद्ध शिक्षा का लोकतांत्रिक एवं समतावादी स्वरूप (जाति और लिंग भेद से मुक्त होना) इसे आधुनिक बाल-केंद्रित व समावेशी शिक्षा प्रणालियों के निकट लाता है। ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए कथनों के प्रत्येक शब्द (जैसे उपनयन बनाम उपसंपदा) पर बारीकी से ध्यान देना चाहिए ताकि नकारात्मक और सकारात्मक विकल्पों में अंतर स्पष्ट हो सके।

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'समापवर्दन संस्कार' शिक्षा की समाप्ति या दीक्षांत समारोह के अवसर पर संपन्न होता था, जिसके बाद छात्र 'स्नातक' कहलाता था और वह अपने गृहस्थ आश्रम में प्रवेश कर सकता था। 3. वैदिक शिक्षा प्रणाली में छात्रों के लिए कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य था, और शिक्षा का मुख्य माध्यम संस्कृत भाषा थी, जिसमें वेदों, वेदांगों, दर्शन और आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती थी। 4. वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का पूर्ण अधिकार था और ऋग्वेद काल में गार्गी, मैत्रेयी, अपाला और घोषा जैसी विदुषी महिलाओं (ब्रह्मवादिनी) का उल्लेख मिलता है जिन्होंने वेदों के मंत्रों की रचना भी की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → चंपारण सत्याग्रह (1917) और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी का ध्यान बिहार के चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अमानवीय अत्याचार और 'तीनकथा प्रणाली' (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी) की ओर आकर्षित हुआ था। 2. चंपारण पहुँचने के बाद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा महात्मा गांधी को जिला छोड़ने का आदेश दिए जाने पर उन्होंने सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग किया, जिसके फलस्वरूप सरकार को विवश होकर 'चंपारण कृषि समिति' (Champaran Agrarian Enquiry Committee) का गठन करना पड़ा और गांधीजी इसके एकमात्र अशासकीय भारतीय सदस्य के रूप में शामिल किए गए थे। 3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान ही देश के प्रख्यात नेताओं जैसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, आचार्य जे.बी. कृपलानी और महादेव देसाई ने गांधीजी के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर गहरी प्रशासनिक और कानूनी जाँच-पड़ताल की थी, जिससे बिहार राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख केंद्र बन गया था। 4. इस सत्याग्रह की समाप्ति और 'तीनकथा प्रणाली' के पूर्ण उन्मूलन के बाद रवीन्द्रनाथ टैगोर ने महात्मा गांधी की राजनीतिक और नैतिक सफलता से प्रभावित होकर उन्हें पहली बार 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था, जो आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व में वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन और 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस आंदोलन की शुरुआत जनवरी 1974 में गुजरात के छात्रों द्वारा बढ़ती कीमतों और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए 'नवनिर्माण आंदोलन' के बाद बिहार में हुई, जहाँ मार्च 1974 में 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' का गठन किया गया और छात्रों ने जयप्रकाश नारायण से इस आंदोलन का नेतृत्व संभालने का अनुरोध किया था। 2. जयप्रकाश नारायण ने 5 जून 1974 को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया था। 3. जेपी आंदोलन के दौरान ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल (Emergency) की घोषणा किए जाने के बाद जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया गया था, और उनके नेतृत्व में गठित जनता पार्टी ने वर्ष 1977 के आम चुनावों में भारी जीत हासिल कर केंद्र में पहली बार गैर-कांग्रेस सरकार बनाई थी। 4. इस आंदोलन में केवल छात्र और युवा ही शामिल थे, और इसमें समाजवादी, कम्युनिस्ट (CPI) तथा उस समय की सभी वामपंथी पार्टियों ने इस छात्र आंदोलन और जेपी के नेतृत्व का पूर्ण और एकीकृत समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? 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