लेव वाइगोत्स्की
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बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, लेव वाइगोत्स्की (Lev Vygotsky) के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत (Socio-Cultural Theory) की प्रमुख अवधारणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वाइगोत्स्की के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास एक सामाजिक रूप से मध्यस्थता वाली प्रक्रिया है, जिसमें बच्चे अपनी संस्कृति के अधिक ज्ञानी अन्य (More Knowledgeable Other - MKO) व्यक्तियों, जैसे माता-पिता, शिक्षकों या साथियों के साथ अंतःक्रिया के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करते हैं।
- 2. 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) वास्तविक विकास स्तर और संभावित विकास स्तर के बीच का अंतर है, जिसे बच्चे द्वारा स्वतंत्र रूप से हल की जाने वाली समस्याओं तथा वयस्क या सक्षम साथी के मार्गदर्शन में हल की जाने वाली समस्याओं के बीच मापा जाता है।
- 3. 'चान्स्कड' या 'मचान' (Scaffolding) वाइगोत्स्की द्वारा दिया गया एक ऐसा शब्द है, जिसके तहत सीखने की प्रक्रिया के प्रारंभिक चरणों में शिक्षार्थी को दिया जाने वाला अस्थायी और लचीला समर्थन उसकी प्रवीणता बढ़ने के साथ-साथ धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है।
- 4. वाइगोत्स्की का मानना था कि बच्चों की 'निजी भाषा' (Private Speech) केवल उनके अहंकेन्द्रित व्यवहार को दर्शाती है और इसका उनके संज्ञानात्मक विकास, आत्म-नियमन (Self-regulation) या समस्या-समाधान की क्षमता से कोई संबंध नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूरी तरह सही हैं। वाइगोत्स्की ने सामाजिक अंतःक्रिया, MKO, ZPD और मचान (Scaffolding) को संज्ञानात्मक विकास का केंद्रीय आधार माना है। हालांकि, कथन 4 गलत है क्योंकि वाइगोत्स्की के अनुसार 'निजी भाषा' (Private Speech) बच्चों के लिए आत्म-नियमन (Self-regulation) और अपनी सोच को निर्देशित करने का एक महत्वपूर्ण साधन है, न कि केवल अहंकेन्द्रित व्यवहार (जबकि जीन पियाजे ने इसे अहंकेन्द्रित माना था)। अतः सही विकल्प (a) है।
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लेव वाइगोत्스키 के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, बच्चों में अधिगम किसके…
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विकास के मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों और शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉरेन्स कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता (Post-conventional Morality) के स्तर पर व्यक्ति के नैतिक निर्णय पूरी तरह से सामाजिक नियमों, कानूनों और अधिकारिता के पालन पर आधारित होते हैं, न कि सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों पर।
2. लेव वाइगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत में 'समीपस्थ विकास का क्षेत्र' (Zone of Proximal Development - ZPD) उस अंतर को दर्शाता है जो किसी बालक के स्वतंत्र रूप से समस्या समाधान करने के स्तर और किसी वयस्क या अधिक ज्ञानी साथी (More Knowledgeable Other) के मार्गदर्शन में समस्या हल करने के स्तर के बीच होता है।
3. जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'संरक्षण' (Conservation) का गुण बालक में पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage) के दौरान ही पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे वह यह समझ पाता है कि किसी वस्तु के आकार या रूप बदलने पर उसकी मात्रा या आयतन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
4. हावर्ड गार्डनर के बहु-बुद्धि सिद्धांत (Theory of Multiple Intelligences) के अनुसार, बुद्धिमत्ता कोई एक एकल सामान्य कारक नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र प्रकार की कई बुद्धियों का एक समुच्चय है, जिसमें संगीत, तार्किक-गणितीय, स्थानिक और अंतःवैयक्तिक बुद्धिमत्ता शामिल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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