जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्मसाತ್करण और समंजन' (Assimilation and Accommodation) की द्वंद्वात्मक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप उत्पन्न होने वाली वह मानसिक स्थिति—'संज्ञानात्मक संतुलन या साम्यधारण' (Equilibration)—जिसे उस नियामक तंत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बालक अपने पूर्व-ज्ञान (Schemes) और नवीन पर्यावरणीय अनुभवों के बीच आए विरोधाभास, असंतुलन या संज्ञानात्मक संघर्ष (Disequilibrium) को दूर करके मानसिक स्थिरता और उच्चतर स्कीमा का निर्माण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विकास, संकल्पना निर्माण और वैचारिक लचीलेपन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'साम्यधारण' या 'इक्विलिब्रेशन' (Equilibration) एक बेहद महत्वपूर्ण और केंद्रीय आत्म-नियामक (Self-regulatory) प्रक्रिया है। जब बालक अपने पूर्व-स्थापित स्कीमा (Schemas) के अनुकूल नए पर्यावरणीय अनुभवों का सामना करता है, तो कभी-कभी नया अनुभव पूर्व ज्ञान से मेल नहीं खाता, जिससे मानसिक असंतुलन या संज्ञानात्मक संघर्ष (Disequilibrium) उत्पन्न होता है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए बालक 'आत्मसात्करण' (Assimilation - मौजूदा स्कीमा में जानकारी जोड़ना) और 'समंजन' (Accommodation - पुराने स्कीमा में संशोधन करना या नया स्कीमा बनाना) का उपयोग करता है। इन दोनों प्रक्रियाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की इस गतिशील प्रक्रिया को ही 'साम्यधारण' (Equilibration) कहा जाता है, जिसके परिणामस्वरुप उच्चतर और अधिक परिपक्व संज्ञानात्मक संरचनाओं का निर्माण होता है। इसलिए विकल्प (b) पूरी तरह सही और वैज्ञानिक है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्कीमा (Schema): मानसिक संरचनाओं या ज्ञान के पैटर्नों का संगठन।
- आत्मसात्करण (Assimilation): मौजूदा स्कीमा में बिना बदलाव किए नए अनुभवों को जोड़ना।
- समंजन (Accommodation): नए अनुभवों के अनुसार पुराने स्कीमा में परिवर्तन करना या नया स्कीमा बनाना।
- असंतुलन (Disequilibrium): जब पूर्व ज्ञान नई स्थिति को समझाने में असफल होता है।
- विकल्प विश्लेषण: विकल्प (a) गलत है क्योंकि साम्यधारण कोई स्थिर अवस्था नहीं बल्कि गतिशील है; विकल्प (c) गलत है क्योंकि यह बाहरी पुरस्कारों पर नहीं बल्कि आंतरिक मानसिक प्रक्रिया पर आधारित है; विकल्प (d) गलत है क्योंकि समंजन तब सक्रिय होता है जब पूर्व ज्ञान अपर्याप्त सिद्ध होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक महान मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने बालकों के संज्ञानात्मक विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया। उनका यह सिद्धांत इस बात पर जोर देता है कि बच्चे नन्हे वैज्ञानिक होते हैं जो सक्रिय रूप से अपने ज्ञान का निर्माण पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करके करते हैं। अधिक जानने के लिए पढ़ें जीन पियाजे का संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET, UPTET, DSSSB, BPSC TRE) में पियाजे के शब्दावली आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। 'इक्विलिब्रेशन' (Equilibration) वह नियामक तंत्र है जो सीखने की प्रक्रिया को गति देता है। कक्षा कक्षीय शिक्षण में शिक्षकों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों के सामने ऐसी समस्याएँ प्रस्तुत करें जो उनके मौजूदा ज्ञान को चुनौती दें (Cognitive Conflict उत्पन्न करें), ताकि वे सक्रिय रूप से समंजन और आत्मसात्करण के माध्यम से उच्चतर चिंतन स्तर तक पहुँच सकें। रटन विद्या के विपरीत यह बाल-केंद्रित शिक्षा और रचनात्मकता (Constructivism) पर जोर देता है।