लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अच्छा लड़का - अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy - Good Girl Orientation)—जिसे उस पारंपरिक स्तर (Conventional Level) के चरण के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ व्यक्ति (सामान्यतः किशोरावस्था के शुरुआती दौर में) दूसरों की नज़रों में अच्छा बनने, सामाजिक अनुमोदन (Social Approval) प्राप्त करने, आपसी स्नेह, विश्वास और साठ-गांठ बनाए रखने के आधार पर अपने नैतिक निर्णयों का निर्धारण करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सामाजिक-नैतिक विकास, सहकर्मी स्वीकृति (Peer Acceptance) और नैतिक तर्कों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत में 'अच्छा लड़का - अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy - Good Girl Orientation) पारंपरिक स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत आने वाला तीसरा चरण (Stage 3) है। इस अवस्था में बालक या किशोरावस्था के शुरुआती चरण के विद्यार्थी अपने नैतिक निर्णयों का निर्धारण इस बात के आधार पर करते हैं कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। यहाँ मुख्य उद्देश्य सामाजिक अनुमोदन (Social Approval), प्रशंसा प्राप्त करना, तथा माता-पिता, शिक्षकों और सहपाठियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरना होता है। बालक चाहता है कि लोग उसे एक 'अच्छा' और आज्ञाकारी व्यक्ति समझें। विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है क्योंकि यह पारस्परिक अनुरूपता और सामाजिक प्रशंसा की लालसा को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कोहलबर्ग का सिद्धांत तीन स्तरों (पूर्व-रूढ़िगत, रूढ़िगत/पारंपरिक, और उत्तर-रूढ़िगत) तथा प्रत्येक में दो-दो चरणों (कुल 6 चरणों) में विभाजित है।
- चरण 3 (अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास) पारंपरिक स्तर का हिस्सा है, जो पारस्परिक संबंधों और सामाजिक स्वीकृतियों पर बल देता है।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता सार्वभौमिक सिद्धांतों से जुड़ी है, न कि सामाजिक प्रशंसा से।
- विकल्प (c) पूर्व-रूढ़िगत स्तर के पहले चरण (दंड एवं आज्ञाकारिता अभिविन्यास) से संबंधित है, न कि पारंपरिक स्तर से।
- विकल्प (d) कोहलबर्ग के सर्वोच्च चरण (सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास - चरण 6) की गलत और विकृत व्याख्या प्रस्तुत करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: लॉरेंस कोहलबर्ग का नैतिक विकास सिद्धांत बाल मनोविज्ञान और संज्ञानात्मक विकास का एक आधारभूत स्तंभ है। यह जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के विचारों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए कोहलबर्ग का सिद्धांत का अध्ययन करें, जो सीटेट और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
परीक्षाओं में कोहलबर्ग के चरणों पर आधारित प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिदृश्यों (Case Studies) के रूप में पूछे जाते हैं। शिक्षकों के लिए यह समझना अनिवार्य है किशोरावस्था में विद्यार्थी सहकर्मी स्वीकृति (Peer Acceptance) के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' चरण में छात्र शिक्षकों की सराहना पाने के लिए गृहकार्य समय पर करते हैं और नियमों का पालन करते हैं। अध्यापकों को इस मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति का सकारात्मक उपयोग करते हुए विद्यार्थियों में सहयोगात्मक अधिगम और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए, साथ ही उन्हें धीरे-धीरे आंतरिक प्रेरणा (Intrinsic Motivation) की ओर अग्रसर करना चाहिए ताकि वे बाहरी प्रशंसा के बिना भी सही और गलत का स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।