कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति' (Fully Functioning Person)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक स्थिति के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अनुभवों के प्रति खुलापन (Openness to experience), अस्तित्वगत जीवन जीने की क्षमता (Existential living), अपने जीव पर भरोसा (Organismic trusting), अनुभवात्मक स्वतंत्रता (Experiential freedom) और रचनात्मकता (Creativity) का निरंतर प्रदर्शन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-स्वीकृति (Self-acceptance), आंतरिक अभिप्रेरणा और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) का मानवतावादी सिद्धांत (Humanistic Approach) मानव स्वभाव की सकारात्मकता, स्वय H-अनिर्देशित विकास (Self-directed growth) और व्यक्तिगत एजेंसी पर जोर देता है। 'पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति' (Fully Functioning Person) रोजर्स के व्यक्तित्व सिद्धांत का एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसके अंतर्गत व्यक्ति अनुभवों के प्रति खुला रहता है, वर्तमान में जीता है, अपने आंतरिक अनुभवों पर विश्वास करता है और रचनात्मक जीवन शैली अपनाता है। कक्षा शिक्षण में इसका अर्थ यह है कि शिक्षक विद्यार्थियों को 'बिना शर्त सकारात्मक स्वीकृति' (Unconditional Positive Regard) प्रदान करें, जिससे उनका आत्म-सम्मान (Self-esteem) बढ़ता है और वे बाहरी दबावों के बजाय आंतरिक अभिप्रेरणा से सीखते हैं। विकल्प (b) इस मानवतावादी और शिक्षार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या करता है, जो बाल-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की रीढ़ है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- मानवतावादी उपागम: कार्ल रोजर्स और अब्राहम मैस्लो द्वारा प्रतिपादित, जो संज्ञानात्मक और व्यवहारवादी दृष्टिकोण से परे मानवीय भावनाओं और आत्म-सिद्धि (Self-actualization) पर ध्यान केंद्रित करता है।
- विकल्प (a) का विश्लेषण: यह व्यवहारवाद (Behaviorism) और स्किनर के ऑपरेंट कंडीशनिंग से संबंधित है, न कि मानवतावाद से। अतः यह गलत है।
- विकल्प (c) का विश्लेषण: संज्ञानात्मक विकास के चरण जीन पियाजे से जुड़े हैं, जबकि रोजर्स का उपागम संवेगात्मक और अनुभवात्मक पक्षों पर केंद्रित है। अतः यह कथन भ्रामक है।
- विकल्प (d) का विश्लेषण: पूर्णतः कार्यशील व्यक्ति का संप्रत्यय प्रत्येक मानव के लिए प्रासंगिक है, न कि केवल विशिष्ट या प्रतिभाशाली बालकों के लिए।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: आधुनिक बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र में कार्ल रोजर्स का योगदान अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) और सुगमकर्ता (Facilitator) के रूप में शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करता है। अधिक जानकारी के लिए मानवतावादी मनोविज्ञान के सिद्धांतों को समझें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
टीईटी परीक्षाओं में मानवतावादी मनोविज्ञान से जुड़े प्रश्न अक्सर 'सुगमकर्ता' (Facilitator), 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization), और 'बिना शर्त स्वीकृति' (Unconditional Positive Regard) के इर्द-गिर्द घूमते हैं। कार्ल रोजर्स मानते थे कि शिक्षक को पारंपरिक सत्तावादी रवैये को छोड़कर एक सहज और सहायक वातावरण तैयार करना चाहिए। जब छात्रों को अपनी गलतियों से सीखने की स्वतंत्रता (Experiential Freedom) मिलती है, तो वे आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में दक्ष बनते हैं। यह दृष्टिकोण समावेशी शिक्षा और बाल-केंद्रित शिक्षा दोनों के मूल दर्शन के साथ पूरी तरह से मेल खाता है।