अल्बर्ट बंडूरा
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावकारिता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिपरक विश्वास या संज्ञानात्मक मूल्यांकन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत कोई शिक्षार्थी किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपेक्षित लक्ष्यों को प्राप्त करने, जटिल कार्यों को सफलताપૂર્વक निष्पादित करने और चुनौतियों का सामना करने की अपनी व्यक्तिगत क्षमता का आकलन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रेरणा, दृढ़ता और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक संज्ञान और सामाजिक अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) किसी व्यक्ति की उस क्षमता में विश्वास को दर्शाती है जिसके द्वारा वह किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को व्यवस्थित और निष्पादित कर सकता है। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले छात्र चुनौतियों से भागते नहीं बल्कि उनका सामना करते हैं, असफलताओं से सीखते हैं और अपने लक्ष्यों के प्रति अधिक दृढ़ रहते हैं। अतः विकल्प (A) इस संप्रत्यय का सबसे प्रामाणिक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत करता है।
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी व्यक्ति का यह व्यक्तिगत विश्वास शामिल होता है कि वह विशिष्ट परिस्थितियों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने, किसी कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक व्यवहारों को प्रभावी ढंग से संगठित और निष्पादित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा प्रबंधन, अकादमिक दृढ़ता और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहारों के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अपने व्यवहार और क्षमताओं का कितना प्रभावी ढंग से संचालन कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक दृढ़ता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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'अधिगम के सिद्धांत' (Theories of Learning) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) द्वारा प्रतिपादित 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के चार प्रमुख चरणों (अवधान, धारणा, पुनरुत्पादन और अभिप्रेरणा) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'मिरर न्यूरॉन सिस्टम' (Mirror Neuron System - MNS), 'सुपीरियर टेम्पोरल सुलस' (Superior Temporal Sulcus), और 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System) के बीच प्रत्यक्ष अवलोकन, न्यूरल अनुकरण (Neural Simulation), और विकल्पी सुदृढ़ीकरण (Vicarious Reinforcement) की सक्रियण गतिकी, तथा जूलियन रोटर (Julian Rotter) के 'नियंत्रण का locus (Locus of Control)' सिद्धांत के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-सोशल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Social Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में सकारात्मक रोल मॉडल प्रभाव, स्व-प्रभावकारिता (Self-Efficacy) व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) की अवधारणा—जिसके तहत किसी विशिष्ट कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी क्षमता के बारे में व्यक्ति का व्यक्तिगत विश्वास और मूल्यांकन शामिल होता है, जो उसके प्रेरणा स्तर, लक्ष्य निर्धारण और चुनौतियों के सामने टिके रहने के दृढ़ संकल्प को प्रत्यक्ष रूप से नियंत्रित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्वायत्त ज्ञानार्जन, आंतरिक अभिप्रेरणा और संज्ञानात्मक पुनर्बलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावीकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति अपनी विशिष्ट परिस्थितियों में किसी कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और अभीष्ट परिणामों को प्राप्त करने की अपनी स्वयं की क्षमताओं पर कितना भरोसा करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रेरणा स्तर, चुनौती-सामना करने की क्षमता और लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)**—जिसे उस व्यक्तिपरक विश्वास या क्षमता-बोध के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपेक्षित प्रदर्शन करने, चुनौतियों का सामना करने और अपने जीवन को प्रभावित करने वाले कार्यों को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की अपनी स्वयं की क्षमता का आकलन करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संकल्प, शैक्षणिक प्रेरणा (Academic Motivation), लक्ष्य निर्धारण और स्वायत्त अधिगम के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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