एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) के 'अधिगम के संबंधात्मक सिद्धांत' (Connectionism Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'प्रभाव का नियम' (Law of Effect)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक नियम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अनुसार किसी उद्दीपक और अनुक्रिया (S-R Bond) के बीच का संबंध उस स्थिति में मजबूत हो जाता है जब उस अनुक्रिया के बाद संतोषजनक, सुखद या सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, तथा यदि परिणाम असंतोषजनक या कष्टदायक होते हैं तो वह संबंध कमजोर हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सुदृढ़ीकरण, त्रुटिहीन अभ्यास और सकारात्मक पुनर्बलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
एडवर्ड थॉर्नडाइक (Edward Thorndike) का 'संबंधात्मक सिद्धांत' (Connectionism Theory) आधुनिक शैक्षिक मनोविज्ञान की नींव माना जाता है। इस सिद्धांत के अंतर्गत प्रतिपादित 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) यह स्पष्ट करता है कि अधिगम केवल उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के यांत्रिक मिलन पर नहीं, बल्कि उस अनुक्रिया के परिणाम पर आधारित होता है। जब किसी कार्य या व्यवहार का परिणाम संतोषजनक, सुखद या सकारात्मक होता है, तो S-R बंध (S-R Bond) मजबूत होता है और विद्यार्थी उस व्यवहार को दोहराना सीखता है। इसके विपरीत, असंतोषजनक परिणाम उस संबंध को कमजोर करते हैं। अतः विकल्प (b) इस नियम के वैज्ञानिक और सकारात्मक शैक्षिक निहितार्थ को पूर्णतः सत्य रूप में परिभाषित करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- थॉर्नडाइक के मुख्य नियमों में तत्परता का नियम, अभ्यास का नियम और प्रभाव का नियम शामिल हैं।
- प्रभाव का नियम आधुनिक कक्षा में 'पुनर्बलन' (Reinforcement) और 'प्रोत्साहन' की अवधारणा का प्रत्यक्ष आधार है।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि यह नियम तार्किक चिंतन को बाधित नहीं करता बल्कि सही आदतों के निर्माण में सहायता करता है।
- विकल्प (c) गलत है क्योंकि यह नियम मानसिक, बौद्धिक और व्यावहारिक सभी प्रकार के अधिगम पर लागू होता है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि थॉर्नडाइक ने बाद के शोधों में पाया कि पुरस्कार (Reward) दंड की तुलना में अधिगम को अधिक स्थायी रूप से प्रभावित करता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: थॉर्नडाइक ने अपने प्रयोग भूखी बिल्ली पर पजल बॉक्स (Puzzle Box) के माध्यम से किए थे, जिससे यह सिद्ध हुआ कि पशुओं और मनुष्यों दोनों में अधिगम 'प्रयत्न एवं भूल' (Trial and Error) तथा संतोषजनक परिणामों के माध्यम से होता है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अधिगम के सिद्धांत.
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, Super TET आदि) में थॉर्नडाइक के नियमों से प्रत्यक्ष और व्यावहारिक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। 'प्रभाव का नियम' कक्षा-कक्षीय प्रबंधन में सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) की वकालत करता है। जब एक शिक्षक विद्यार्थियों की छोटी-छोटी सफलताओं पर उनकी प्रशंसा करता है या उन्हें पुरस्कार प्रदान करता है, तो बच्चों के मस्तिष्क में सकारात्मक S-R कनेक्शन मजबूत होते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और शैक्षणिक प्रदर्शन दोनों उन्नत होते हैं। इस प्रकार यह नियम केवल पशुओं पर किए गए प्रयोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि बाल-केंद्रित शिक्षा प्रणाली का एक अनिवार्य स्तंभ है।