संज्ञानात्मक विकास
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विकेंद्रीकरण' (Decentration)—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बालक किसी वस्तु या समस्या के केवल एक ही आयाम (जैसे- लंबाई या चौड़ाई) पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके एकाधिक पहलुओं, आयामों और दृष्टिकोणों पर एक साथ विचार करने में सक्षम होता है, जो कि 'अहम्-केंद्रितता' (Egocentrism) और 'केंद्रीयकरण' (Centration) से बाहर निकलने का एक प्रमुख मील का पत्थर है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहु-आयामी चिंतन, संरक्षण (Conservation) की अवधारणा और तार्किक विश्लेषण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (MPTET) के पाठ्यक्रम और बाल विकास के सिद्धांतों के अनुसार, जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत में 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) एक अत्यंत केंद्रीय संप्रत्यय है। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage, लगभग 2 से 7 वर्ष) में बालकों में 'केंद्रीयकरण' (Centration) की प्रवृत्ति पाई जाती है, यानी वे किसी वस्तु या घटना के केवल एक ही आयाम (जैसे किसी बर्तन की केवल ऊंचाई) पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। जैसे-जैसे बालक मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) में प्रवेश करता है, उसमें 'विकेंद्रीकरण' की क्षमता विकसित होती है, जिससे वह एक साथ दो या अधिक आयामों (ऊंचाई और चौड़ाई दोनों) पर विचार कर पाता है। यह क्षमता संरक्षण (Conservation) की अवधारणा को समझने और गणितीय व तार्किक समस्याओं को हल करने के लिए आधारशिला का कार्य करती है।
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'व्युत्क्रमित या अनुभवजन्य अधिगम सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब होता है जब छात्र की व्यक्तिगत जिज्ञासा, उसकी अपनी समस्याओं और उसके स्व-सचेतन (Self-initiated) अनुभवों के साथ विषय-वस्तु जुड़ जाती है, और शिक्षक केवल एक 'सहायक या सुविधाप्रदाता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है न कि एक पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता की—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-निर्देशित अधिगम, संवेगात्मक संलग्नता और व्यक्तिगत स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'अमूर्त चिंतन' (Formal Operational Stage) की अवस्था निम्नलिखित में से किस आयु वर्ग से संबंधित है?
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'जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Cognitive Development Theory) के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, पियाजे द्वारा प्रतिपादित 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: अमूर्त चिंतन और निगमनात्मक तर्क) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - DLPFC), 'पैरिएटल कॉर्टेक्स' (Parietal Cortex), और 'पूर्वकाल सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC) के बीच कार्यकारी नियंत्रण, अमूर्त परिकल्पना निर्माण (Hypothesis Generation), और तार्किक लचीलेपन की सक्रियण गतिकी, तथा जेरोम ब्रूनर के 'प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व' (Symbolic Representation) मॉडल के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-कोग्निटिव ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Cognitive Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समस्या-समाधान कौशल व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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चार्ल्स स्पीयरमैन (Charles Spearman) के 'द्वि-कारक बुद्धि सिद्धांत' (Two-Factor Theory of Intelligence) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सामान्य बुद्धि या जी-कारक' (General Intelligence - 'g' Factor)—जिसे उस सार्वभौमिक, जन्मजात और अपरिवर्तनीय मानसिक ऊर्जा या क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जो व्यक्ति के जीवन के सभी प्रकार के बौद्धिक कार्यों, तार्किक समस्याओं और संज्ञानात्मक प्रदर्शनों में अनिवार्य रूप से समान रूप से उपस्थित रहती है और नियंत्रित करती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों की अकादमिक योग्यताओं, मानसिक क्षमता के मूल्यांकन और बौद्धिक भिन्नताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संरक्षण का सिद्धांत' (Conservation)—जिसे उस तार्किक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के रूप, आकार या दिखावे में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, द्रव्यमान, आयतन या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के विकेंद्रीकरण (Decentration), उत्क्रमणीयता (Reversibility) और मूर्त संक्रियात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory or Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)—जिसे उस मानसिक स्थानिक प्रतिनिधित्व (Mental Spatial Representation) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने भौतिक या वैचारिक पर्यावरण के लेआउट, मार्गों, लक्ष्यों और वैकल्पिक रास्तों का एक आंतरिक ढांचा या नक्शा अपने मस्तिष्क में निर्मित करता है, न कि केवल यांत्रिक उत्तेजना-अनुक्रिया (S-R) बंधनों के आधार पर सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक चिंतन, समग्र अधिगम (Holistic Learning) और लचीली समस्या-समाधान क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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