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विकास के प्रमुख सिद्धांतकार सभी देखें (1928) जीन पियाजे519 लेव वाइगोत्स्की403 लॉरेंस कोहलबर्ग19 एरिक एरिक्सन37 जेरोम ब्रूनर76 अल्बर्ट बंडूरा134 सिगमंड फ्रायड278 मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद406 अन्य सिद्धांतकार (गेसेल, ब्रोनफेनब्रेनर, हॉल, आदि)56
अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
बुद्धि, व्यक्तित्व एवं सृजनशीलता सभी देखें (925) बुद्धि: अवधारणा एवं सिद्धांत212 गार्डनर: बहुबुद्धि301 संवेगात्मक बुद्धि (EQ)11 बुद्धि परीक्षण (IQ)65 व्यक्तित्व: सिद्धांत एवं प्रकार219 व्यक्तित्व मापन एवं परीक्षण24 सृजनशीलता (Creativity)92 अभिक्षमता, अभिवृत्ति एवं अभिरुचि1
वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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अल्बर्ट बंडूरा
Asked 3 सप्ताह पहले · Viewed 1,297 times
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अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'स्वयं की प्रभावकारिता या सेल्फ-इफिकेसी' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्ति की अपनी क्षमताओं में उस आंतरिक विश्वास या धारणा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने, अपने व्यवहार को विनियमित करने और अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रियाओं की योजना बना सकता है और उन्हें क्रियान्वित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लक्ष्य निर्धारण, शैक्षणिक दृढ़ता और आंतरिक अभिप्रेरणा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

अल्बर्ट बंडूरा के 'सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत' (Social Cognitive Theory) में 'स्वयं की प्रभावकारिता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसका तात्पर्य किसी व्यक्ति के उस आंतरिक विश्वास से है कि वह विशिष्ट लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित कर सकता है। जिन विद्यार्थियों में उच्च सेल्फ-इफिकेसी होती है, वे कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्यों को संकट के रूप में नहीं बल्कि सीखने के एक अवसर के रूप में देखते हैं। वे असफलता से हतोत्साहित होने के बजाय अपनी रणनीतियों को बदलते हैं, अधिक प्रयास करते हैं और अपने संज्ञानात्मक संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हैं। विकल्प (C) इस मनोवैज्ञानिक तथ्य को पूरी तरह से प्रमाणित करता है कि उच्च आत्म-प्रभावकारिता विद्यार्थियों में उच्च आकांक्षा स्तर, मानसिक दृढ़ता (Resilience) और आंतरिक अभिप्रेरणा को बढ़ावा देती है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • स्वयं की प्रभावकारिता के स्रोत: बंडूरा के अनुसार, सेल्फ-इफिकेसी चार प्रमुख स्रोतों से विकसित होती है—महारत के अनुभव (Mastery Experiences), तदनुरूपी अनुभव (Vicarious Experiences), सामाजिक प्रोत्साहन (Social Persuasion), और शारीरिक/आवेग संबंधी अवस्थाएँ (Physiological States)।
  • विकल्प (A) का खंडन: उच्च सेल्फ-इफिकेसी वाले विद्यार्थी चुनौतियों से पलायन नहीं करते बल्कि उनका सक्रिय सामना करते हैं और असफलता का कारण बाहरी या स्थिर कारकों की बजाय अपनी कम रणनीतियों को मानते हैं जिन्हें सुधारा जा सकता है।
  • विकल्प (B) का खंडन: सेल्फ-इफिकेसी केवल बाहरी पुरस्कारों पर आश्रित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक अभिप्रेरणा (Intrinsic Motivation) और आत्म-नियमन (Self-Regulation) से गहराई से जुड़ी है।
  • विकल्प (D) का खंडन: यह कोई आनुवंशिक रूप से स्थिर गुण नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक अंतःक्रियाओं, सकारात्मक फीडबैक और प्रभावी शिक्षण विधियों के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम और सामाजिक संज्ञानात्मक सिद्धांत यह रेखांकित करता है कि मानव व्यवहार केवल बाहरी उद्दीपकों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह संज्ञानात्मक, वातावरणीय और behavioral कारकों की त्रिपैक्षीय पारस्परिक अन्योन्यक्रिया (Triadic Reciprocal Causation) का प्रतिफल है। अधिक जानकारी के लिए अल्बर्ट बंडूरा का सिद्धांत और संज्ञानात्मक विकास के आलेखों का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB, और BPSC TRE) में बंडूरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत और विशेष रूप से सेल्फ-इफिकेसी से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक परिदृश्यों पर आधारित होते हैं। एक प्रभावी शिक्षक के रूप में, कक्षा में ऐसा परिवेश निर्मित करना आवश्यक है जहाँ विद्यार्थियों को छोटे-छोटे लक्ष्य हासिल करने का अवसर मिले (Mastery Experiences), जिससे उनकी आत्म-प्रभावकारिता में वृद्धि हो सके। जब छात्र अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना सीखते हैं, तो उनका शैक्षणिक निष्पादन स्वतः सुधर जाता है और वे अधिगम के सक्रिय निर्माता बन जाते हैं।

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'पारस्परिक determinism' (Reciprocal Determinism) की अवधारणा के अनुसार मानव का विकास और व्यवहार त्रिपक्षी अंतःक्रिया (Triadic Reciprocal Causation) का परिणाम होता है, जिसमें व्यक्तिगत कारक (संज्ञानात्मक, जैविक), व्यवहार (Behavior), और पर्यावरण (Environment) परस्पर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं? → अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक विश्वास या क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति यह आकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति में अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने या किसी चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, शैक्षणिक दृढ़ता और लक्ष्य-प्राप्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'स्व-प्रभाविता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्ति के अपने स्वयं के विश्वास या आंतरिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके आधार पर वह यह आंकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और वांछित परिणाम प्राप्त करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, दृढ़ता (Perseverance), लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक निष्पत्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'आत्म-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्ति की अपनी क्षमताओं में उस आंतरिक विश्वास के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को नियोजित और निष्पादित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, दृढ़ता, चुनौतियों से निपटने की क्षमता और शैक्षणिक सफलता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है? → अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'स्व-प्रभावकारिता' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्ति की अपनी क्षमताओं में उस आंतरिक विश्वास और धारणा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके आधार पर वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक क्रियाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित और संयोजित कर सकता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, लक्ष्य निर्धारण और अकादमिक दृढ़ता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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