बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'शेपिंग या आकृति-निर्माण' (Shaping)—जिसे उस渐进 (क्र क्रमिक) सुदृढ़ीकरण की मनोवैज्ञानिक तकनीक के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी जटिल, नवीन या अवांछित व्यवहार को सीधे तौर पर एक बार में उत्पन्न करने के बजाय, लक्ष्य व्यवहार की दिशा में आगे बढ़ने वाले क्रमिक और निकटवर्ती सन्निकट व्यवहारों (Successive Approximations) को एक-एक करके सुनियोजित रूप से सुदृढ़ (Reinforce) किया जाता है जब तक कि अंतिम वांछित जटिल व्यवहार पूरी तरह से स्थापित न हो जाए—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के नए कौशलों के अर्जन, जटिल आदतों के निर्माण और सुधारात्मक शिक्षण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बी. एफ. स्किनर का 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) अधिगम के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है। इस सिद्धांत के भीतर 'शेपिंग या आकृति-निर्माण' (Shaping) एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसे 'क्रमिक सन्निकटता का सिद्धांत' (Principle of Successive Approximations) भी कहा जाता है। इसके अनुसार, जब कोई जटिल व्यवहार एक बार में नहीं सीखा जा सकता, तो उस लक्ष्य तक पहुँचने वाले छोटे-छोटे चरणों या क्रमिक प्रयासों को पहचानकर उन्हें सकारात्मक सुदृढ़ीकरण (Positive Reinforcement) दिया जाता है। इस प्रकार, धीरे-धीरे व्यवहार को परिमार्जित करते हुए अंतिम वांछित जटिल कौशल या आदत को सफलतापूर्वक स्थापित किया जाता है। विकल्प (b) इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का बिल्कुल सटीक वर्णन करता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- क्रमिक सन्निकटता (Successive Approximations): लक्ष्य व्यवहार की ओर बढ़ने वाले प्रत्येक छोटे सुधार को पुरस्कृत करना।
- सकारात्मक सुदृढ़ीकरण: वांछित अनुक्रिया की संभावना को बढ़ाने के लिए सुखद उद्दीपक या प्रशंसा प्रदान करना।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि यह केवल अंतिम परिणाम पर बल देता है और मध्यवर्ती चरणों की उपेक्षा करता है जो शेपिंग के विरुद्ध है।
- विकल्प (c) गलत है क्योंकि शेपिंग शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) पर नहीं, बल्कि क्रियाप्रसूत अनुबंधन पर आधारित है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि स्किनर के प्रयोग भले ही पशुओं पर शुरू हुए थे, पर इनका अनुप्रयोग मानव शिक्षण, विशेष शिक्षा और कक्षा-कक्षीय प्रबंधन में व्यापक रूप से होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर का यह सिद्धांत शिक्षा मनोविज्ञान में व्यवहारवाद (Behaviorism) की रीढ़ माना जाता है। इसके अंतर्गत प्रोग्राम्ड लर्निंग (Programmed Learning) और शिक्षण मशीनों (Teaching Machines) का विकास हुआ। अधिक जानकारी के लिए अधिगम के सिद्धांतों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक प्रतियोगिताओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB, KVS) में अक्सर स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन से जुड़े अनुप्रयोग आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। 'शेपिंग' का उपयोग विशेष बच्चों को प्रशिक्षित करने, हकलाने वाले बच्चों के उपचार, जटिल हस्तकला सीखने और अनुशासनात्मक सुधार में किया जाता है। परीक्षार्थियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि जहाँ 'Chaining' कई व्यवहारों की एक श्रृंखला बनाती है, वहीं 'Shaping' एक ही जटिल व्यवहार को चरणों में विभाजित करके परिष्कृत करती है। विकल्पों का यह सूक्ष्म अंतर ही बहुविकल्पीय परीक्षाओं में मेरिट तय करता है।