अल्बर्ट बंडूरा (Albert Bandura) के 'सामाजिक अधिगम सिद्धांत' (Social Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'स्व-प्रभाविता या सेल्फ-एफ़िकेसी' (Self-Efficacy)—जिसे उस व्यक्ति के अपने स्वयं के विश्वास या आंतरिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके आधार पर वह यह आंकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक निष्पादित करने और वांछित परिणाम प्राप्त करने में कितना सक्षम है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के प्रेरणा स्तर, दृढ़ता (Perseverance), लक्ष्य-निर्धारण और शैक्षणिक निष्पत्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अल्बर्ट बंडूरा के सामाजिक अधिगम (तथा सामाजिक संज्ञानात्मक) सिद्धांत में 'स्व-प्रभाविता' (Self-Efficacy) एक केंद्रीय संप्रत्यय है। इसका तात्पर्य व्यक्ति के उस आंतरिक विश्वास से है जिसके द्वारा वह यह आंकलन करता है कि वह किसी विशिष्ट परिस्थिति या चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने में कितना सक्षम है। विकल्प (b) पूर्णतया वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक रूप से सत्य है क्योंकि जिन विद्यार्थियों में उच्च स्व-प्रभाविता पाई जाती है, वे कठिन चुनौतियों से डरकर भागने के बजाय उन्हें एक अवसर के रूप में स्वीकार करते हैं। वे उच्च लक्ष्यों का निर्धारण करते हैं, असफलता मिलने पर अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करते हैं और अपने प्रयासों में दृढ़ रहते हैं। इसके विपरीत, निम्न स्व-प्रभाविता वाले छात्र अक्सर असफलताओं से जल्दी हताश हो जाते हैं और अपनी क्षमता पर संदेह करने लगते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- स्व-प्रभाविता का निर्माण चार प्रमुख स्रोतों से होता है: प्रत्यक्ष अनुभव (Mastery experiences), vicarious अनुभव, सामाजिक प्रोत्साहन (Social persuasion), और शारीरिक/संवेगात्मक अवस्थाएँ।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि यह वृद्धि मानसिकता (Growth Mindset) के विपरीत स्थिर मानसिकता का वर्णन करता है, जबकि उच्च स्व-प्रभाविता वाले छात्र क्षमताओं को विकसित करने में विश्वास रखते हैं।
- विकल्प (c) असत्य है क्योंकि स्व-प्रभाविता केवल बाहरी पुरस्कारों पर आधारित नहीं होती, बल्कि यह आंतरिक संज्ञानात्मक नियंत्रण और आत्म-नियमन (Self-Regulation) से जुड़ी होती है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि निम्न स्व-प्रभाविता वाले छात्र उच्च जोखिम वाले कार्यों से बचते हैं और सरल या कम चुनौतीपूर्ण कार्य चुनना पसंद करते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: अल्बर्ट बंडूरा का सिद्धांत अवलोकन अधिगम और पारस्परिक determinism पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें अल्बर्ट बंडूरा का सामाजिक अधिगम सिद्धांत।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक प्रतियोगिताओं (जैसे CTET और राज्य TET) में बंडूरा के सिद्धांतों से बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं। कक्षा-कक्षीय परिवेश में एक शिक्षक का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों में सकारात्मक स्व-प्रभाविता का विकास करना है ताकि वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर सकें। जब शिक्षक छात्रों को छोटे-छोटे सफल अनुभवों से जोड़ते हैं और रचनात्मक प्रतिक्रिया (Constructive Feedback) प्रदान करते हैं, तो उनकी स्व-प्रभाविता बढ़ती है और वे शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं।