संज्ञानात्मक विकास
Asked 3 सप्ताह पहले · Viewed 2,617 times
डेविड कोल्ब (David Kolb) के 'अनुभवात्मक अधिगम चक्र' (Experiential Learning Cycle) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अमूर्त समूर्तिकरण या абстракт conceptualization' (Abstract Conceptualization)—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी अपने ठोस अनुभवों पर चिंतन करने के बाद नए तार्किक निष्कर्ष, सैद्धांतिक मॉडल, नियम या सामान्यीकृत अवधारणाओं का निर्माण करते हैं—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञानार्जन, तार्किक संश्लेषण और वैचारिक स्पष्टता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
डेविड कोल्ब के अनुभवात्मक अधिगम चक्र (Experiential Learning Cycle) में 'अमूर्त समूर्तिकरण' (Abstract Conceptualization) वह महत्वपूर्ण बौद्धिक चरण है जहाँ शिक्षार्थी अपने ठोस अनुभवों (Concrete Experience) और उन पर आधारित चिंतन (Reflective Observation) का विश्लेषण करके सामान्यीकृत सिद्धांतों, तार्किक निष्कर्षों और वैचारिक मॉडलों का निर्माण करते हैं। कक्षा-कक्षीय शिक्षण में यह प्रक्रिया छात्रों को रटन विद्या से दूर ले जाकर वैज्ञानिक तार्किकता, विश्लेषणात्मक चिंतन और वैचारिक स्पष्टता विकसित करने में मदद करती है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
अगला प्रश्न →
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of…
← पिछला प्रश्न
लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के…
Related Questions
→
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)—जिसे उस तार्किक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बच्चा यह समझ पाता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, आकार या दिखावे में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या भार अपरिवर्तित (नियत) रहते हैं (जैसे—एक ही मात्रा के पानी को चौड़े बर्तन से लंबे बर्तन में डालने पर पानी की मात्रा समान रहना)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन, मानसिक पलटावी (Reversibility) और वैज्ञानिक संकल्पनाओं के निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जेरोम ब्रूनर (Jerome Bruner) के 'संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'स्पाइरल करिकुलम या चक्रीय पाठ्यक्रम' (Spiral Curriculum)—जिसे उस शैक्षणिक दृष्टिकोण के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी भी कठिन विषय या जटिल संकल्पना को बच्चे की प्रारंभिक विकासात्मक अवस्था में सरल, मूर्त और सहज रूप से प्रस्तुत किया जाता है, और जैसे-जैसे शिक्षार्थी की आयु, बौद्धिक परिपक्वता और संज्ञानात्मक क्षमता का विकास होता जाता है, उसी विषय को अधिक गहराई, जटिलता और औपचारिक तार्किकता के साथ बार-बार उच्च कक्षाओं में क्रमिक रूप से पढ़ाया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान के सुदृढ़ीकरण, संरचनात्मक बोध और अमूर्त चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)—जिसे उस तार्किक मानसिक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक यह समझ जाता है कि किसी वस्तु के बाह्य रूप, आकार, रंग या विन्यास में परिवर्तन होने पर भी उसकी मूल मात्रा, द्रव्यमान, आयतन या संख्या अपरिवर्तित (Constant) रहती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के मूर्त संक्रियात्मक चिंतन, तार्किक आत्मीकरण और गणितीय-वैज्ञानिक अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagne) के 'अधिगम के सोपानिकी सिद्धांत' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning)—जिसे उस सर्वोच्च और सबसे जटिल संज्ञानात्मक अधिगम के स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी पहले से सीखे गए नियमों, सिद्धांतों और संप्रत्ययों का उपयोग करते हुए किसी नवीन, अनपेक्षित और जटिल परिस्थिति या समस्या का तार्किक, विश्लेषणात्मक और सृजनात्मक समाधान खोजता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल, आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र बौद्धिक क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
रॉबर्ट गैग्नी (Robert Gagne) के 'अधिगम के पदानुक्रम' (Conditions of Learning / Hierarchy of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित सर्वोच्च स्तर यानी 'समस्या-समाधान अधिगम' (Problem Solving Learning) की अवधारणा—जिसके तहत शिक्षार्थी पहले से सीखे गए नियमों, सिद्धांतों और कौशलों (Principle Learning) का उपयोग करके एक नई, जटिल और अनूठी स्थिति में उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए आंतरिक वैचारिक नियमों या सूत्रों का आविष्कार करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक प्रसंस्करण, सृजनात्मक विश्लेषण और आलोचनात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
→
एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory or Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)—जिसे उस मानसिक स्थानिक प्रतिनिधित्व (Mental Spatial Representation) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी अपने भौतिक या वैचारिक पर्यावरण के लेआउट, मार्गों, लक्ष्यों और वैकल्पिक रास्तों का एक आंतरिक ढांचा या नक्शा अपने मस्तिष्क में निर्मित करता है, न कि केवल यांत्रिक उत्तेजना-अनुक्रिया (S-R) बंधनों के आधार पर सीखता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्थानिक चिंतन, समग्र अधिगम (Holistic Learning) और लचीली समस्या-समाधान क्षमताओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.