BaalVikas
Menu
History of India
Asked 2 hours ago · Viewed 0 times

पल्लव राजवंश और चालुक्य राजवंश के संघर्ष, प्रशासनिक व्यवस्था तथा सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का आश्रय लिया था, किंतु प्रसिद्ध तमिल संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उसने शैव धर्म स्वीकार कर लिया और महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (Monolithic) 'रथ मंदिरों' का निर्माण प्रारंभ करवाया।
  2. 2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को निर्णायक रूप से पराजित किया था, जिसका सजीव और विस्तृत वर्णन रवि कीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोले प्रशस्ति' में मिलता है।
  3. 3. पल्लव काल में ग्राम प्रशासन की देखरेख के लिए 'सभा' और 'उर' जैसी स्वायत्त संस्थाएँ थीं, जिनमें 'सभा' मुख्य रूप से ब्राह्मणों को दान में दिए जाने वाले 'ब्रह्मदेय' गाँवों की सभा होती थी, और इसके सदस्यों के चयन के लिए 'कुडुवोलै' (घड़ा प्रणाली) नामक गुप्त मतदान पद्धति का प्रयोग किया जाता था।
  4. 4. बादामी के चालुक्यों की प्रशासनिक व्यवस्था में शासन का विकेंद्रीकरण देखा जाता है जहाँ प्रांतों को 'विषय' और 'राष्ट्र' कहा जाता था, तथा प्रशासन के संचालन में महिलाओं को भी उच्च प्रशासनिक पदों और राज्यपाल के दायित्वों का निर्वहन करने का अवसर दिया जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि पल्लव नरेश महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक काल में जैन धर्म अपनाया था, किंतु संत अप्पर के प्रभाव से शैव बने और महाबलीपुरम (माமல்லपुरम) में स्थापत्य कला की नींव रखी। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पल्लव कला वास्तुकला की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध थी। कथन 2 सही है, पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा तट पर हर्षवर्धन को हराकर 'परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी और इसकी जानकारी रवि कीर्ति रचित ऐहोले शिलालेख से मिलती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'कुडुवोलै' (घड़ा प्रणाली) गुप्त मतदान पद्धति पल्लव प्रशासन की नहीं, बल्कि उत्तरवर्ती **चोल** साम्राज्य के ग्राम प्रशासन की विशेषता थी। कथन 4 सही है, चालुक्य राजवंश में महिलाओं को उच्च प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार प्राप्त थे तथा वे कई प्रांतों की राज्यपाल भी थीं।
Share:
अगला प्रश्न → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में… ← पिछला प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व…

Related Questions

→ सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक संरचना, धार्मिक विश्वासों और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सिंधु सभ्यता की मुहरों (Seals) पर सबसे अधिक बार एक काल्पनिक एकसिंगी पशु (Unicorn) का अंकन मिलता है, जिसके बाद कुबड़ वाले सांड (Humped Bull) का स्थान आता है। 2. लोथल और कालीबंगा दोनों ही सैंधव स्थलों से अग्नि वेदियाँ (Fire Altars) या हवन कुंड के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, जो यहाँ के लोगों द्वारा किसी प्रकार के अनुष्ठान या सार्वजनिक यज्ञ किए जाने का संकेत देते हैं। 3. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे की विभिन्न तकनीकों और शस्त्र निर्माण से पूरी तरह परिचित थे, जिसका प्रमाण कालीबंगा और हड़प्पा से प्राप्त बड़े पैमाने पर लोहे के अस्त्र-शस्त्रों से मिलता है। 4. इस सभ्यता में मातृसत्तात्मक समाज के संकेत मिलते हैं क्योंकि यहाँ से बड़ी संख्या में पकी हुई मिट्टी (Terracotta) की बनी मातृदेवी की मूर्तियाँ प्राप्त हुई हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारत में यूरोपीय कंपनियों के व्यापारिक विस्तार और पुर्तगाली-ब्रिटिश संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगांज़ा का विवाह ब्रिटेन के राजा चार्ल्स द्वितीय के साथ होने पर, पुर्तगालियों ने बॉम्बे (मुंबई) द्वीप को दहेज के रूप में ब्रिटिश ताज को सौंप दिया था, जिसे बाद में ब्रिटिश सम्राट ने ईस्ट इंडिया कंपनी को मात्र 10 पाउंड के वार्षिक किराए पर दे दिया था। 2. ब्रिटिश ईस्ट India कंपनी ने बंगाल में अपनी प्रथम व्यावसायिक कोठी की स्थापना वर्ष 1651 में शाहशुजा की अनुमति से हुगली में की थी, और वर्ष 1690 में जॉब चारनाक द्वारा कलकत्ता (सुतानाती, कालिकाट और गोविंदपुर) की नींव रखे जाने से पहले ही अंग्रेजों ने बॉम्बे को अपनी मुख्य प्रेसीडेंसी बना लिया था। 3. पुर्तगालियों द्वारा भारतीय समुद्रों में लागू की जाने वाली 'कार्टाज' (Cartaz) व्यवस्था के अंतर्गत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से अनुज्ञा पत्र लेना अनिवार्य था, और अफीम, मसालों तथा गोला-बारूद जैसे चुनिंदा सामानों के व्यापार पर पुर्तगाली क्राउन का एकाधिकार था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (Queen Victoria's Proclamation) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश संसद के अंतर्गत 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'इंडियन काउंसिल' का गठन किया गया। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को आधिकारिक रूप से त्यागने की बात कही गई और भारतीय राजाओं को गोद लेने की अनुमति (दत्तक पुत्र का अधिकार) तथा उनके आंतरिक अधिकारों के सम्मान का आश्वासन दिया गया। 3. सेना के पुनर्गठन के क्रम में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों को लागू करते हुए सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया और तोपखाने (Artillery) जैसे संवेदनशील एवं आधुनिक सैन्य विभागों पर पूर्णतः यूरोपीय नियंत्रण स्थापित किया गया। 4. इस घोषणा में यह स्पष्ट घोषणा की गई कि भारतीय प्रजा को उनकी जाति, नस्ल या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना उच्च सरकारी पदों पर योग्यता के आधार पर नियुक्त किया जाएगा, किंतु व्यवहार में इस वादे का ईमानदारी से पालन किया गया और सभी उच्च पदों पर भारतीयों को समान अवसर मिले। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित विभिन्न सुधार आंदोलनों और संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, पशुबलि और छुआछूत का कड़ा विरोध करते हुए 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया, तथा शुद्धि आंदोलन के माध्यम से धर्मांतरित हिंदुओं की वापसी का मार्ग प्रशस्त किया। 2. केशव चंद्र सेन के सहयोग से आत्माराम पांडुरंग द्वारा 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने महाराष्ट्र में अंतर्जातीय विवाह, स्त्री शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और बाल विवाह के निषेध पर विशेष बल दिया, जिसमें महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर का प्रमुख योगदान था। 3. मद्रास में स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने प्राचीन हिंदू दर्शन और वेदांत के पुनरुत्थान के साथ-साथ समाज सुधार, शिक्षा विस्तार और दीन-नदुखियों की सेवा को ही धर्म का सबसे बड़ा अंग माना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.