BaalVikas
Menu
History of India
Asked 4 hours ago · Viewed 0 times

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक-सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी महाराज के केंद्रीय प्रशासन में 'अष्टप्रधान' नामक मंत्रिपरिषद थी, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे छत्रपति के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से अधिकांश मंत्रियों (पंडितराव और न्यायाधीश को छोड़कर) को समय-समय पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
  2. 2. मराठा प्रशासन में 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' केवल स्वराज्य (मराठा गृह प्रदेश) के भीतर किसानों से वसूले जाने वाले आंतरिक भू-राजस्व कर थे, जिनका मराठा साम्राज्य के बाहर के मुगल क्षेत्रों से कोई संबंध नहीं था।
  3. 3. शिवाजी ने अपनी सेना में वंशानुगत सरदारों (सिग्नेचर जागीरदारों) की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया था और सैनिकों को लूट के माल के बजाय नियमित नकद वेतन देने की परंपरा के साथ-साथ 'दाग' एवं 'हुलिया' जैसी अनुशासनात्मक प्रथाओं को कड़ाई से लागू किया था।
  4. 4. शिवाजी के उत्तराधिकारियों के काल में पेशवाओं के उदय के दौरान, 'संगोला की संधि' (1750) के परिणामस्वरूप छत्रपति की स्थिति केवल एक नाममात्र का शासक बनकर रह गई और समस्त वास्तविक प्रशासनिक एवं राजनैतिक शक्ति पेशवा के हाथों में केंद्रित हो गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि शिवाजी महाराज के अष्टप्रधान में पंडितराव और न्यायाधीश को छोड़कर सभी मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना पड़ता था। कथन 2 गलत है क्योंकि 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के आंतरिक क्षेत्रों से नहीं, बल्कि मुगलों के अधीन बाहरी क्षेत्रों (मोगलाई) से वसूले जाने वाले कर थे। कथन 3 गलत है क्योंकि शिवाजी ने जागीर प्रथा को पूरी तरह समाप्त नहीं किया था, हालांकि वे वंशानुगत जागीरदारी के विरोधी थे और सेना में कड़े अनुशासन के साथ नगद वेतन को बढ़ावा दिया था, किंतु 'दाग' एवं 'हुलिया' प्रणाली मुख्य रूप से अलाउद्दीन खिलजी द्वारा सेना में लागू की गई थी। कथन 4 सही है, राजाराम द्वितीय और पेशवा बालाजी बाजीराव के मध्य हुई 'संगोला की संधि' (1750) के बाद छत्रपति केवल नाममात्र के शासक रह गए। विकिपीडिया संदर्भ
Share:
अगला प्रश्न → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त… ← पिछला प्रश्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के काल तथा…

Related Questions

→ वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पांडेय के नेतृत्व में, ताम्रलिक्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (यशवंतराव चव्हाण व नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकारें थीं। 2. जापान द्वारा सिंगापुर पर अधिकार करने के बाद ब्रिटिश सेना के भारतीय युद्धबंदियों को लेकर मोहन सिंह ने 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) की स्थापना की प्रारंभिक पहल की थी, जिसे बाद में रास बिहारी बोस ने 'इण्डियन इंडिपेंडेंस लीग' के अधीन संगठित किया। 3. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार ('आर्ज़ी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद') की स्थापना की और रंगून तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (जिनका नाम क्रमशः 'शहीद' और 'स्वराज' द्वीप रखा गया था) इस सरकार के नियंत्रण में आ गए थे। 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर लाल किले (Red Fort) में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों के दल (Defense Counsel) के मुख्य लीडर भूलाभाई देसाई थे, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रख्यात वकील भी शामिल थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप को लेकर विभिन्न इतिहासकारों एवं विचारकों ने अपने भिन्न-भिन्न मत प्रस्तुत किए हैं। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. आर.सी. मजुमदार (R.C. Majumdar) का यह सुविख्यात मत था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो पहला, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।' 2. ब्रिटिश अधिकारी टी.आर. होम्स (T.R. Holmes) के अनुसार 1857 का यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (Conflict between Civilization and Barbarism) था। 3. विनायक दामोदर सावरकर (V.D. Savarkar) ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस - 1857' में इस घटना को सुनियोजित रूप से भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम बताया था। 4. कार्ल मार्क्स (Karl Marx) ने इस विद्रोह को केवल एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) माना था और कहा था कि यह सामंती ताकतों की प्रतिक्रिया मात्र था, जिसका आधुनिक राष्ट्रवाद से कोई संबंध नहीं था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' (या स्यादवाद) के विपरीत, महात्मा बुद्ध ने संसार की वास्तविक प्रकृति को समझाने के लिए 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य के सिद्धांत) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार प्रत्येक घटना का कोई न कोई पूर्व कारण अवश्य होता है। 2. प्रारंभिक बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों ने ही वेदों की सर्वोच्चता और प्रामाणिकता को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया था, किंतु दोनों ने ही वैदिक यज्ञों और पशुबलि की प्रथा का पुरजोर समर्थन किया था। 3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर को अत्यंत कष्ट देने और संलेखना (कायाक्लेश) जैसी कठोर प्रणालियों पर विशेष बल दिया गया है, जबकि महात्मा बुद्ध ने अति-तपस्या और भोग-विलासिता के मध्य का मार्ग चुनते हुए 'मध्यम मार्ग' (मज्झिमा प्रतिपदा) का उपदेश दिया था। 4. जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने अहिंसा के सिद्धांत को अत्यधिक कठोर बनाया जिसके तहत कृषि कार्य को भी पूर्णतः प्रतिबंधित माना गया, जबकि बुद्ध ने अपनी संघ व्यवस्था में कभी भी कृषि या सामान्य गृहस्थ जीवन को वर्जित नहीं किया और भिक्षुओं को भिक्षावृत्ति के साथ मध्यम जीवन जीने की सलाह दी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → गदर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में सोहन सिंह भकना के नेतृत्व में की गई थी और इसके संस्थापक अध्यक्ष लाला हरदयाल थे, जिन्होंने 'युगांतर गदर' नामक साप्ताहिक पत्र के माध्यम से औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष शुरू किया था। 2. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के सदस्यों ने 'हॉर्डन योजना' के तहत भारत वापस आकर ब्रिटिश सेना के भारतीय सिपाहियों को बगावत के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया, जिसे 'गदर षड्यंत्र' के नाम से जाना जाता है। 3. चंद्रशेखर आजाद ने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) का पुनर्गठन करते हुए वर्ष 1928 में इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया था, और इसमें समाजवाद को आधिकारिक रूप से अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में शामिल किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.