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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था और उसके आर्थिक एवं भौगोलिक विस्तार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मांडा (जम्मू-कश्मीर) सिंधु सभ्यता का सबसे उत्तरी स्थल है, जो चेनाब नदी के तट पर स्थित है, जबकि इसकी सबसे दक्षिणी सीमा दाइमाबाद है जो गोदावरी नदी की सहायक नदी प्रवर के तट पर महाराष्ट्र में स्थित है।
  2. 2. सुतकागेंडॉर सिंधु सभ्यता का सबसे पश्चिमी स्थल है जो दासक नदी के तट पर बलूचिस्तान-ईरान सीमा के पास स्थित है, तथा पूर्वी स्थल आलमगीरपुर हिंडन नदी के तट पर उत्तर प्रदेश में स्थित है।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता के पुरास्थलों में से क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा स्थल मोहनजोदड़ो है, जबकि भारत में स्थित सबसे बड़ा हड़प्पाकालीन स्थल राखीगढ़ी (हरियाणा) है।
  4. 4. हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश स्थल अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में विकसित हुए थे, इसलिए कृषि की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अफगानिस्तान के शोतुघई (Shortugai) नामक स्थल से नहरों द्वारा सिंचाई किए जाने के स्पष्ट पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन सिंधु घाटी सभ्यता के भौगोलिक विस्तार, स्थलों और विशेषताओं के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) का कुल क्षेत्रफल लगभग 12,99,600 वर्ग किलोमीटर था और इसका आकार त्रिभुज के समान था। इसका विस्तार उत्तर में मांडा (जम्मू-कश्मीर), दक्षिण में दाइमाबाद (महाराष्ट्र), पश्चिम में सुतकागेंडॉर (बलूचिस्तान) और पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) तक था। मोहनजोदड़ो संपूर्ण सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है, जबकि भारत में राखीगढ़ी और धौलावीरा सबसे बड़े स्थलों में गिने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अफगानिस्तान स्थित शोतुघई से नहरों के अवशेष मिले हैं जो सिंचाई व्यवस्था की पुष्टि करते हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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