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History of India
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तुगलक काल में "दीवान-ए-इन्शा" का मुख्य कार्य क्या था?

Detailed Explanation

यह पत्र-व्यवहार का विभाग था।
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→ बौद्ध धर्म के दार्शनिक और संस्थागत विकास के संदर्भ में, 'सौत्रान्तिक' तथा 'वैभाषिक' संप्रदायों की मान्यताओं और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'वैभाषिक' संप्रదాయ के आचार्य बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को प्रत्यक्ष मानते हैं (प्रत्यक्षवादी), जबकि 'सौत्रान्तिक' संप्रदाय बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को केवल अनुमानगम्य (अनुमानवादी) मानता है। 2. महायान बौद्ध धर्म के अंतर्गत 'शून्यवाद' (माध्यमिक दर्शन) के प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने प्रतीत्यसमुत्पाद को ही शून्यता का पर्याय माना है, जिसका अर्थ है कि सभी धर्म स्वसंभाव से रहित हैं। 3. बौद्ध धर्म के इतिहास में 'सर्वास्तिवाद' संप्रదాయ से ही वैभाषिक और सौत्रान्तिक दोनों उप-संप्रदाय विकसित हुए थे, जो सभी कालों (भूत, भविष्य और वर्तमान) में धर्मों के वास्तविक अस्तित्व में विश्वास करते थे। 4. तृतीय बौद्ध संगीति के उपरांत अशोक के काल में बौद्ध संघ में जो गंभीर मतभेद उत्पन्न हुए थे, उनके परिणामस्वरूप थेइवादियों (स्थविरवादियों) ने महायान मत की स्थापना की थी, जिसने आगे चलकर हीनयान को पूरी तरह समाप्त कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों द्वारा अलग-अलग बुलाई जाएंगी, ताकि वे प्रांत के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय ले सकें। 2. माउंटबेटन योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय जनमत संग्रह (Referendum) के माध्यम से लिया गया था, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने पाकिस्तान में शामिल होने के निर्णय का पूर्ण समर्थन किया था। 3. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominions) के सृजन की घोषणा की गई तथा ब्रिटिश सम्राट की उपाधियों से 'भारत के सम्राट' (Emperor of India) शब्द को हटा दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक की नीतियों के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा अंतर सही सुमेलित है? → भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक काल (नरम दल) की कार्यप्रणाली, उनकी राजनीतिक मान्यताओं तथा इसके विरोध में उभरने वाले उग्रवादी (गरम दल) विचारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रारंभिक कांग्रेस के नेताओं (जैसे- दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बैनर्जी) की यह दृढ़ मान्यता थी कि ब्रिटिश शासन मूलतः न्यायप्रिय है और वे 'प्रेरित याचिका, प्रार्थना और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति के माध्यम से भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों की मांग करते थे। 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के उपरांत उत्पन्न राजनीतिक असंतोष के दौरान, गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने कांग्रेस के मंच से पहली बार औपनिवेशिक स्वराज्य के स्थान पर 'पूर्ण स्वतंत्रता' (संपूर्ण राजनीतिक मुक्ति) को अपना तात्कालिक लक्ष्य घोषित कर दिया था। 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव तथा स्वदेशी आंदोलन के प्रस्ताव को लेकर तीव्र मतभेद उभरे, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और उग्रवादी नेताओं को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। 4. उग्रवादी (गरम दल) विचारधारा के उदय का एक प्रमुख कारण लॉर्ड कर्ज़न की प्रतिक्रियावादी नीतियां थीं, जिसके तहत कलकत्ता कॉर्पोरेट अधिनियम, विश्वविद्यालय अधिनियम और अंततः बंगाल का विभाजन शामिल था, जिसने मध्यम वर्ग का ब्रिटिश न्याय पर से विश्वास पूरी तरह उठा दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → बहमनी साम्राज्य के पतन के बाद कितने स्वतंत्र राज्यों का उदय हुआ?
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