General Science
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और उनके अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक स्थिरांक ($h$) के $4\pi$ के बराबर या उससे अधिक होता है।
- 2. पाऊ अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकता है, अर्थात् एक ही कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण (Spins) के साथ रह सकते हैं।
- 3. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोष के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि उस उपकोष के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए और उनके चक्रण समदिश (Parallel) न हों।
- 4. आफबाऊ नियम (Aufbau Principle) के अनुसार, इलेक्ट्रॉनों को कक्षकों में उनकी बढ़ती हुई मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) के क्रम में भरा जाता है, जिसका अर्थ है कि n का मान बढ़ने पर कक्षक की ऊर्जा सदैव कम होती जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार $\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$ होता है। पाऊ अपवर्जन सिद्धांत और हुंड का नियम इलेक्ट्रॉनिकविन्यास के मूलभूत सिद्धांत हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि आफबाऊ नियम के अनुसार कक्षकों को उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम ($n+l$ नियम) में भरा जाता है, न कि केवल मुख्य क्वांटम संख्या $n$ के बढ़ते क्रम में। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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Related Questions
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा, कार्य और संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गतिशील पिंड पर कुल बल द्वारा किया गया कार्य उस पिंड की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, जिसे 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) कहा जाता है और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है।
2. एक आयाम में होने वाली पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Perfectly elastic collision) के दौरान यदि दोनों टकराने वाले पिंडों के द्रव्यमान समान हों, तो टक्कर के पश्चात उनके वेग आपस में पूर्णतः परस्पर बदल जाते हैं।
3. जब कोई पिंड किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति करता है, तो वृत्त के उच्चतम बिंदु पर डोरी या पथ में न्यूनतम आवश्यक तनाव शून्य हो सकता है, बशर्ते पिंड की चाल न्यूनतम क्रांतिक चाल (Critical velocity) के बराबर हो।
4. अप्रत्याशित टक्कर (Inelastic collision) में संवेग संरक्षित रहता है किंतु यांत्रिक ऊर्जा का ह्रास होता है, और इस प्रकार की टक्करों के लिए 'प्रत्यावस्थान गुणांक' (Coefficient of restitution, $e$) का मान शून्य से अधिक और एक से कम ($0 < e < 1$) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) और अम्ल-क्षार अवधारणाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की क्षमता रखते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, एक अम्ल प्रोटॉन ($H^+$) का दाता होता है और उसका संयुग्मी क्षार (Conjugate base) उस अम्ल से एक प्रोटॉन कम रखता है, किंतु संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्मों में प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
3. सहसंयोजक बंधों (Covalent bonds) के निर्माण के दौरान परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की साझाकारी होती है, और जिन अणुओं में केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair) उपस्थित होता है, उनकी ज्यामिति वा VSEPR सिद्धांत के अनुसार विकृत हो जाती है।
4. ऑर्थो-नाइट्रोफेनोल (o-Nitrophenol) में अंतःअणु हाइड्रोजन बंधन (Intramolecular hydrogen bonding) पाया जाता है, जिसके कारण इसके क्वथनांक का मान पैरा-नाइट्रोफेनोल (जिसमें अंतरअणु हाइड्रोजन बंधन होता है) की तुलना में काफी अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव पोषण और जैव अणुओं (विटामिन और कार्बोहाइड्रेट) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रोविटामिन के रूप में त्वचा में कोलेस्ट्रॉल के व्युत्पन्न (7-डाइहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल) से पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में संश्लेषित होता है, और यह आंत में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
2. ग्लाइकोजन एक शाखित पॉलीसैक्राइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ मुख्य रूप से $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा और शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और यह जंतुओं एवं कवक में मुख्य रूप से यकृत तथा कंकाल पेशियों में संचित होता है।
3. विटामिन B1 (थiamine) के सक्रिय सह-एंजाइम रूप (थiamine pyrophosphate) की कमी के कारण 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जो तंत्रिका तंत्र और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, और पॉलिश किए हुए चावल के अत्यधिक सेवन से इसकी कमी की संभावना बढ़ जाती है।
4. सेलूलोज़ पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, जो ग्लूकोज की $\alpha$-D-इकाइयों से बनी एक सीधी रैखिक पॉलीसैक्राइड श्रृंखला है, जिसे मानव पाचन तंत्र में मौजूद पाचक एंजाइमों (जैसे एमाइलेज) द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय के संकुचन के दौरान उत्पन्न होने वाले विद्युत आवेगों (Action potentials) की शुरुआत स्वाभाविक रूप से सिनोट्रायल नोड (SA Node) द्वारा होती है, जिसे हृदय का 'पेसमेकर' कहा जाता है, और इसका संचरण एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड (AV Node) के माध्यम से बंडल ऑफ हिस और पुर्किंजे तंतुओं तक होता है।
2. तंत्रिका तंत्र में सिनेप्स (Synapse) के पार रासायनिक संकेतों के संचरण के दौरान, जब तंत्रिकाक्ष (Axon) का अंतिम छोर पर पहुंचता है, तो कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) का प्रवेश न्यूरोट्रांसमीटर से भरे पुटिकाओं (Vesicles) को एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis) द्वारा सिनेप्सिस अंतराल में मुक्त करने के लिए प्रेरित करता है।
3. गैस्ट्रिक पाचन के दौरान, आमाशय की पैराइटल कोशिकाओं (Parietal cells) द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'इन्ट्रीसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) का स्राव किया जाता है, जो छोटी आंत के इलियम (Ileum) क्षेत्र में विटामिन $B_{12}$ के सक्रिय अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
4. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के अंतर्गत अंतःश्वसन (Inhalation) एक सक्रिय प्रक्रिया है जिसमें डायाफ्राम और बाह्य अंतरपर्शुक पेशियों (External intercostal muscles) के संकुचन के कारण वक्ष गुहा का आयतन कम हो जाता है और फुफ्फुसीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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