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मानव पोषण और जैव अणुओं (विटामिन और कार्बोहाइड्रेट) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रोविटामिन के रूप में त्वचा में कोलेस्ट्रॉल के व्युत्पन्न (7-डाइहाइड्रोकोलेस्ट्रॉल) से पराबैंगनी किरणों की उपस्थिति में संश्लेषित होता है, और यह आंत में कैल्शियम तथा फॉस्फोरस के अवशोषण को नियंत्रित करता है।
- 2. ग्लाइकोजन एक शाखित पॉलीसैक्राइड है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ मुख्य रूप से $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा और शाखा बिंदुओं पर $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों द्वारा जुड़ी होती हैं, और यह जंतुओं एवं कवक में मुख्य रूप से यकृत तथा कंकाल पेशियों में संचित होता है।
- 3. विटामिन B1 (थiamine) के सक्रिय सह-एंजाइम रूप (थiamine pyrophosphate) की कमी के कारण 'बेरी-बेरी' रोग होता है, जो तंत्रिका तंत्र और हृदय प्रणाली को प्रभावित करता है, और पॉलिश किए हुए चावल के अत्यधिक सेवन से इसकी कमी की संभावना बढ़ जाती है।
- 4. सेलूलोज़ पौधों की कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, जो ग्लूकोज की $\alpha$-D-इकाइयों से बनी एक सीधी रैखिक पॉलीसैक्राइड श्रृंखला है, जिसे मानव पाचन तंत्र में मौजूद पाचक एंजाइमों (जैसे एमाइलेज) द्वारा आसानी से पचाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव शरीर में पोषण, विटामिन और कार्बोहाइड्रेट का जैविक महत्व अत्यधिक है। कथन 1, 2 और 3 बिल्कुल सही हैं। विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक वसा में घुलनशील विटामिन है जो त्वचा में कोलेस्ट्रॉल के पूर्ववर्ती यौगिक से सूर्य के प्रकाश की पराबैंगनी किरणों की मदद से बनता है और यह विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए कैल्शियम और फॉस्फोरस के नियमन में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ग्लाइकोजन जंतुओं में कार्बोहाइड्रेट का संचित रूप है जो स्टार्च की तुलना में अधिक शाखित होता है, जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ और शाखाएँ $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसाइडिक बंधों से जुड़ी होती हैं। विटामिन B1 (थायमिन) की कमी से बेरी-बेरी रोग होता है। हालाँकि, कथन 4 गलत है क्योंकि सेलूलोज़ में ग्लूकोज इकाइयाँ $\beta$-D-ग्लूकोज ($\beta-1,4$ ग्लाइकोसाइडिक बंध) के रूप में जुड़ी होती हैं, जिसे मानव शरीर के एंजाइम नहीं पचा सकते हैं।
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत इस बात को स्पष्ट करता है कि किसी कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और उनके अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक स्थिरांक ($h$) के $4\pi$ के बराबर या उससे अधिक होता है।
2. पाऊ अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकता है, अर्थात् एक ही कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण (Spins) के साथ रह सकते हैं।
3. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोष के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि उस उपकोष के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए और उनके चक्रण समदिश (Parallel) न हों।
4. आफबाऊ नियम (Aufbau Principle) के अनुसार, इलेक्ट्रॉनों को कक्षकों में उनकी बढ़ती हुई मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) के क्रम में भरा जाता है, जिसका अर्थ है कि n का मान बढ़ने पर कक्षक की ऊर्जा सदैव कम होती जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुणों के अंतर्गत श्यानता (Viscosity), पृष्ठ तनाव (Surface tension) और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की श्यानता ताप में वृद्धि के साथ घटती है क्योंकि तापमान बढ़ने से द्रवों के अणुओं के बीच लगने वाले संसंजक बल (Cohesive forces) कमजोर हो जाते हैं और उनकी तापीय गति बढ़ जाती है, जबकि गैसों की श्यानता ताप में वृद्धि के साथ बढ़ती है।
2. पृष्ठ तनाव का मूल कारण अणुओं के बीच लगने वाला असंजक बल (Adhesive force) है, और जल की सतह पर यदि कोई सुई तैरती है, तो इसका कारण जल के अणुओं का पृष्ठ तनाव है, जो सुई के भार को संतुलित करता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर आभासी हानि का अनुभव करती है, और उत्प्लावन बल (Buoyant force) का केंद्र विस्थापित द्रव के द्रव्यमान केंद्र पर कार्य करता है।
4. यदि कोई ठोस वस्तु किसी द्रव में तैर रही है, तो वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव का भार वस्तु के कुल भार से अधिक होता है, जिसके कारण वह संतुलन की अवस्था में सतह पर बनी रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है, क्योंकि उच्च ताप पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों और आयनों के बीच संघट्ट (collisions) की आवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे उनका श्रांति काल (relaxation time) घट जाता है।
2. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वे बाह्य चुंबकीय क्षेत्र का पूर्ण विरोध करते हुए आदर्श प्रतिचुंबकीय व्यवहार प्रदर्शित करते हैं, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
4. मिश्रधातुओं (जैसे मैंगनीन या कांस्टेंटन) का उपयोग मानक प्रतिरोधक बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता बहुत कम होती है और उनका प्रतिरोध ताप गुणांक (temperature coefficient of resistance) अत्यधिक उच्च होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, जबकि एल्काइन्स (Alkynes) में कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होता है और उनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ होता है।
2. ऑक्टेन संख्या (Octane number) का उपयोग डीजल इंजनों में प्रयुक्त ईंधन की गुणवत्ता को मापने के लिए किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन कम 'नॉक' (Knocking) उत्पन्न करता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
4. फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया (Fischer-Tropsch process) एक ऐसी रासायनिक विधि है जिसके द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के मिश्रण (वाटर गैस) से कृत्रिम तरल हाइड्रोकार्बन (संश्लेषित ईंधन) का निर्माण किया जाता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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