General Science
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आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आवर्तिता (Periodicity) और उनके परमाणु विन्यासों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या सामान्यतः घटती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश में क्रमिक वृद्धि होना है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके समवर्ती हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से काफी बड़ी होती है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान ऑक्सीजन और सल्फर जैसे वर्ग 16 के तत्वों में फ्लोरीन की तुलना में अधिक ऋणात्मक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण इसके 2p उपकोष में आने वाले नए इलेक्ट्रॉन के बीच प्रबल अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण उत्पन्न होता है।
- 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'मोजले' ने तत्वों के वर्गीकरण का आधार परमाणु क्रमांक को माना, जिसके अनुसार तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं, और यह नियम कैथोड किरणों के एक्स-रे स्पेक्ट्रा के अध्ययन पर आधारित था।
- 4. द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे लिथियम, बेरिलियम और बोरॉन) के कुछ गुण अपने से अगले वर्ग के विकर्णतः नीचे स्थित तत्वों (जैसे मैग्नीशियम, एल्युमिनियम और सिलिकॉन) के साथ समानता प्रदर्शित करते हैं, जिसे 'विकर्ण संबंध' (Diagonal relationship) कहा जाता है और इसका मुख्य कारण इनकी लगभग समान आयनिक त्रिज्या तथा ध्रुवण क्षमता का होना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) बढ़ने से परमाणु त्रिज्या घटती है, लेकिन उत्कृष्ट गैसों के मामले में वांडरवाल्स त्रिज्या मापी जाती है जो सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है। फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन से कम ऋणात्मक होती है क्योंकि इसके छोटे आकार के कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण बढ़ जाता है। मोजले का नियम परमाणु क्रमांक पर आधारित है और विकर्ण संबंध छोटे आकार तथा उच्च ध्रुवण क्षमता के कारण उत्पन्न होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भौतिक राशियों और उनके विमीय सूत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सार्वत्रिक गैस नियतांक (Universal Gas Constant): $[ML^2T^{-2}K^{-1}mol^{-1}]$
2. प्लैंक नियतांक (Planck's Constant): $[ML^2T^{-1}]$
3. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity): $[ML^{-1}T^{-1}]$
4. पृष्ठीय तनाव (Surface Tension): $[ML^0T^{-1}]$
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटेटिन' (Somatostatin) हार्मोन अग्र पिट्सुरी ग्रंथि से वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) के स्राव को रोकता है, जबकि यह अग्नाशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाओं से इंसुलिन के स्राव को भी बाधित करता है।
2. एड्रिनल ग्रंथि का कॉर्टेक्स भाग रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र के नियंत्रण में मुख्य रूप से 'एल्डोस्टेरोन' मिनरलोकोर्टिकोइड का स्राव करता है, जो वृक्क की दूरस्थ नलिकाओं (DCT) में सोडियम और जल के पुनःअवशोषण को बढ़ाता है तथा पोटेशियम एवं हाइड्रोजन आयनों के उत्सर्जन को प्रेरित करता है।
3. थायरॉयड ग्रंथि की फोलिक्यूलर कोशिकाओं द्वारा संश्लेषित थायराक्सीन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) हार्मोनों के निर्माण के लिए टायरोसिन अमीनो अम्ल और आयोडीन अनिवार्य होते हैं, और इन हार्मोनों की कमी से वयस्कों में 'मिक्सोएडिमा' (Myxedema) नामक स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
4. पश्च पिट्सुरी ग्रंथि (Neurohypophysis) स्वयं किसी हार्मोन का संश्लेषण नहीं करती, बल्कि यह हाइपोथैलेमस में निर्मित 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हार्मोनों का भंडारण और विमोचन करती है, जहाँ वैसोप्रेसिन मूत्र सांद्रण को नियंत्रित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा, कार्य और संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गतिशील पिंड पर कुल बल द्वारा किया गया कार्य उस पिंड की गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, जिसे 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) कहा जाता है और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है।
2. एक आयाम में होने वाली पूर्णतः प्रत्यास्थ टक्कर (Perfectly elastic collision) के दौरान यदि दोनों टकराने वाले पिंडों के द्रव्यमान समान हों, तो टक्कर के पश्चात उनके वेग आपस में पूर्णतः परस्पर बदल जाते हैं।
3. जब कोई पिंड किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में गति करता है, तो वृत्त के उच्चतम बिंदु पर डोरी या पथ में न्यूनतम आवश्यक तनाव शून्य हो सकता है, बशर्ते पिंड की चाल न्यूनतम क्रांतिक चाल (Critical velocity) के बराबर हो।
4. अप्रत्याशित टक्कर (Inelastic collision) में संवेग संरक्षित रहता है किंतु यांत्रिक ऊर्जा का ह्रास होता है, और इस प्रकार की टक्करों के लिए 'प्रत्यावस्थान गुणांक' (Coefficient of restitution, $e$) का मान शून्य से अधिक और एक से कम ($0 < e < 1$) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुणों के अंतर्गत श्यानता (Viscosity), पृष्ठ तनाव (Surface tension) और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की श्यानता ताप में वृद्धि के साथ घटती है क्योंकि तापमान बढ़ने से द्रवों के अणुओं के बीच लगने वाले संसंजक बल (Cohesive forces) कमजोर हो जाते हैं और उनकी तापीय गति बढ़ जाती है, जबकि गैसों की श्यानता ताप में वृद्धि के साथ बढ़ती है।
2. पृष्ठ तनाव का मूल कारण अणुओं के बीच लगने वाला असंजक बल (Adhesive force) है, और जल की सतह पर यदि कोई सुई तैरती है, तो इसका कारण जल के अणुओं का पृष्ठ तनाव है, जो सुई के भार को संतुलित करता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी द्रव में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर आभासी हानि का अनुभव करती है, और उत्प्लावन बल (Buoyant force) का केंद्र विस्थापित द्रव के द्रव्यमान केंद्र पर कार्य करता है।
4. यदि कोई ठोस वस्तु किसी द्रव में तैर रही है, तो वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव का भार वस्तु के कुल भार से अधिक होता है, जिसके कारण वह संतुलन की अवस्था में सतह पर बनी रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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