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मानव शरीर के परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव हृदय का पेसमेकर या साइनאָएट्रियल नोड (SAN) दाएँ आलिंद की ऊपरी दीवार पर स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजित होने की क्षमता रखता है और हृदय की संकुचन तरंगों (विद्युत आवेगों) की दर को नियंत्रित करता है।
- 2. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) के अंतर्गत मस्तिष्क का 'हाइपोथैलेमस' भाग शरीर के ताप नियमन, भूख-प्यास और भावनाओं का मुख्य नियंत्रण केंद्र होता है, जबकि अनुस्तिष्क (Cerebellum) शरीर के संतुलन और एच्छिक पेशियों की गति को समन्वित करता है।
- 3. एक्सॉन (Axon) के साथ माइलिन आच्छद (Myelin sheath) का निर्माण श्वान कोशिकाओं (Schwann cells) द्वारा केवल केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में किया जाता है, जबकि परिधीय तंत्रिका तंत्र में यह आच्छद अनुपस्थित होता है।
- 4. सिनैप्स (Synapse) के माध्यम से तंत्रिका आवेगों का संचरण रासायनिक संदेशवाहकों यानी न्यूरोट्रांसमीटर (जैसे एसिटيلकोलाइन) के विमोचन द्वारा होता है, जो प्री-सिनैप्टिक झिल्ली से पोस्ट-सिनैप्टिक झिल्ली की ओर गति करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव शरीर के तंत्रों के संदर्भ में कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। श्वान कोशिकाएं (Schwann cells) परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) में एक्सॉन के चारों ओर माइलिन आच्छद का निर्माण करती हैं, न कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में (जहाँ यह कार्य ओलिगोडेंड्रोसाइट्स द्वारा होता है)। हृदय की धड़कन और तंत्रिका आवेगों के संचरण के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के विभिन्न चक्रों और पादप हार्मोन्स की…
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मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके संचरण और उनके रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कुष्ठ रोग' (Leprosy) या हैनसेन रोग का मुख्य कारक 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' (Mycobacterium leprae) नामक अंतःकोशिकी जीवाणु है, जो मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिकाओं और त्वचा को प्रभावित करता है।
2. 'सिफलिस' (Syphilis) एक संक्रामक लैंगिक संचारित रोग (STI) है जो 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक स्पिरोकीट जीवाणु के संक्रमण से फैलता है।
3. 'जापानी एन्सेफलाइटिस' (Japanese Encephalitis) एक विषाणुजनित तीव्र मस्तिष्क संक्रमण है, जिसके विषाणु का संचरण मुख्य रूप से 'कुलेक्स' प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है और इसके लिए सूअरों को प्राकृतिक परपोषी (Reservoir) माना जाता है।
4. 'हेपेटाइटिस बी' एक डीएनए वायरस है जो रक्त, वीर्य और अन्य शारीरिक द्रव्यों के माध्यम से फैलता है, तथा इसके दीर्घकालिक संक्रमण से यकृत कैंसर या सिरोसिस (Cirrhosis) होने का खतरा रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली और नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव आमाशय मेंऑक्सीय (पेरिएटल) कोशिकाओं द्वारा स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन के माध्यम को अम्लीय बनाता है, जो निष्क्रिय पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित करता है, तथा यह आंत में सूक्ष्मजीवों के प्रवेश को भी रोकता है।
2. कूपिकाओं (Alveoli) में गैसों का विनिमय सरल विसरण द्वारा होता है, जो आंशिक दाब (Partial pressure) की प्रवणता पर निर्भर करता है, जहाँ ऑक्सीजन का आंशिक दाब कूपिकाओं में अधिक और विऑक्सीकृत रक्त में कम होता है।
3. हृदय चक्र के दौरान वेंट्रिकुलर सिस्टोल (Ventricular systole) की अवस्था में द्विवलनी (Mitral) और त्रिवलनी (Tricuspid) वाल्व बंद हो जाते हैं, जिससे हृदय की दूसरी ध्वनि 'डब' (Dub) उत्पन्न होती है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में सिनेप्टिक संचरण के दौरान, जब तंत्रिका आवेग एक्सॉन के अंत तक पहुँचता है, तो प्री-सिनैप्टिक झिल्ली पर कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) के प्रवेश के कारण न्यूरोट्रांसमीटर से भरी थैलियाँ एक्सोसाइटोसिस द्वारा सिनैप्टिक दरार में विमुक्त होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास के अंतर्गत 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' (Mutation Theory) और विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों तथा आनुवंशिक विकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries) द्वारा प्रतिपादित उत्परिवर्तन सिद्धांत के अनुसार, नई जातियों की उत्पत्ति अचानक, अनियंत्रित और दिशाहीन बड़े परिवर्तनों (साल्टेशन) के माध्यम से होती है, न कि डार्विन द्वारा बताए गए क्रमिक और छोटे उपयोगी परिवर्तनों से।
2. क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome) एक गुणसूत्रिय विकार है जो मानवों में लिंग गुणसूत्रों की असामान्यता ($47, XXY$) के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रसित पुरुष में मादा जैसे लक्षण (जैसे गाइनेकोमास्टिया) प्रकट होते हैं और वे सामान्यतः बंध्य (Sterile) होते हैं।
3. टर्नर सिंड्रोम (Turner syndrome) एक ऑटोसोमल अपसामान्यता है जिसमें एक गुणसूत्र की अधिकता हो जाती है, जिससे ग्रसित व्यक्तियों का बौद्धिक विकास पूरी तरह से रुक जाता है और उनकी ग्रीवा पर पंख जैसी त्वचा (Webbed neck) पाई जाती है।
4. डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) का मुख्य कारण 21वें गुणसूत्र की ट्राइसोमी (Trisomic condition) है, जिसमें कोशिका विभाजन के दौरान एनाफेज अवस्था में गुणसूत्रों के पृथक्करण में विफलता (Non-disjunction) के कारण कुल 47 गुणसूत्र हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके संचरण और उनके रोगजनकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'क्षय रोग' (Tuberculosis) मुख्य रूप से माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) जीवाणु के संक्रमण से होता है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है और इसके निदान के लिए 'मंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) तथा रोकथाम के लिए 'बीसीजी' (BCG) का टीका लगाया जाता है。
2. 'काली खांसी' (Whooping cough) बोरडेटा परट्यूसिस (Bordetella pertussis) नामक जीवाणु जनित एक अत्यंत संक्रामक श्वसन रोग है, जो ऊपरी श्वसन नली को प्रभावित करता है और इसके जीवाणु द्वारा स्रावित होने वाले एक्सोटॉक्सिन के कारण गंभीर खांसी के दौरे आते हैं।
3. 'पोलियोमाइलाइटिस' (Poliomyelitis) एक तीव्र वायरल संक्रमण है जो एंटरोवाइरस (पोलियोवायरस) के कारण होता है, और यह आंत के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र विशेषकर मेरुरज्जु की मोटर न्यूरॉन्स को नष्ट कर देता है, जिससे पक्षाघात (Paralysis) हो सकता है।
4. 'अमीबायसिस' (Amebiasis) या अमीबी पेचिश का मुख्य कारण एंटाअमीबा जिंजीवालिस (Entamoeba gingivalis) नामक कवक है, जो दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है और यह बड़ी आंत की दीवार को संक्रमित कर खूनी दस्त का कारण बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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